आधी रात 3 ट्रकों की टक्कर, 6 घंटे तक केबिन में तड़पता रहा चालक
दुर्घटनाग्रस्त ट्रक
तमाड़ में नेशनल हाईवे पर भीषण ट्रक हादसे में एक चालक 6 घंटे तक केबिन में फंसा रहा. इस घटना ने हाईवे की राहत-बचाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
शुभम हल्दार की रिपोर्ट
तमाड़/रांचीः जिले के तमाड़ थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर मंगलवार देर रात करीब दो बजे तीन ट्रकों की जोरदार टक्कर हो गई. हादसा इतना भीषण था कि दो ट्रकों के केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और दोनों चालक उसमें फंस गए. एक चालक को कुछ देर की मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया गया, लेकिन दूसरा चालक करीब छह घंटे तक क्षतिग्रस्त केबिन में फंसा रहा. वह दर्द से कराहता रहा और सुबह करीब आठ बजे उसे बाहर निकालकर इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया.
पीछे से टक्कर के बाद तीसरा ट्रक भी भिड़ा
जानकारी के अनुसार, एक ट्रक जमशेदपुर से रांची की ओर जा रहा था. इसी दौरान पीछे से आ रहे दूसरे ट्रक ने उसे जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर के बाद पीछे से आ रहा तीसरा ट्रक भी दूसरे ट्रक से जा भिड़ा. हादसे में दूसरे और तीसरे ट्रक के केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. दोनों चालकों के केबिन में फंसने की सूचना मिली. एक चालक को कुछ देर बाद बाहर निकाल लिया गया, जबकि दूसरा चालक छह घंटे तक केबिन में फंसा रहा.
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रात दो बजे से सुबह आठ बजे तक केबिन में फंसा रहा चालक
हादसे के बाद चालक के केबिन में फंसे होने की जानकारी के बावजूद उसे तत्काल बाहर नहीं निकाला जा सका. रात करीब दो बजे से सुबह आठ बजे तक वह क्षतिग्रस्त केबिन में फंसा रहा. इस दौरान वह दर्द से कराहता रहा. सुबह राहत-बचाव की कार्रवाई के बाद उसे केबिन से बाहर निकाला गया और इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया.
हादसे ने हाईवे की राहत-बचाव व्यवस्था पर उठाये सवाल
इस घटना के बाद नेशनल हाईवे पर आपातकालीन राहत-बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दुर्घटना के बाद किसी व्यक्ति के क्षतिग्रस्त वाहन में फंसने की स्थिति में उसे जल्द बाहर निकालने के लिए त्वरित राहत व्यवस्था जरूरी है. ऐसे में सवाल है कि रात करीब दो बजे हादसा होने के बाद चालक को सुबह आठ बजे तक मदद का इंतजार क्यों करना पड़ा.

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समय पर मदद पहुंचती तो कम हो सकती थी परेशानी
हादसे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि हाईवे की पेट्रोलिंग और आपातकालीन राहत व्यवस्था कितनी प्रभावी है. दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को छह घंटे तक क्षतिग्रस्त केबिन में फंसे रहना पड़ा. घटना ने हाईवे पर दुर्घटनाओं के बाद त्वरित राहत-बचाव व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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