सिमडेगा में हाहाकार: 10 दिनों से प्यासा है शहर, 40 साल पुराने मोटर ने दिया जवाब

केलाघाघ के पंप हाउस में लगे खराब मोटर की मरम्मत करते कर्मी
Simdega Water Crisis: भीषण गर्मी के बीच सिमडेगा शहर में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है. पिछले 10 दिनों से जलापूर्ति ठप रहने के कारण लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं. 1985 की पुरानी व्यवस्था और मोटर में आई बड़ी खराबी ने नगर परिषद की तैयारियों की पोल खोल दी है. पढ़ें, सिमडेगा के इस गहरे जल संकट पर हमारी विशेष रिपोर्ट
Simdega Water Crisis, सिमडेगा (रविकांत साहू की रिपोर्ट): सिमडेगा जिले के शहरी क्षेत्र में पिछले 10 दिनों से जलापूर्ति पूरी तरह बंद रहने के कारण भीषण पेयजल संकट गहरा गया है. चिलचिलाती धूप और बढ़ती गर्मी के बीच पानी की एक-एक बूंद के लिए शहरवासी जद्दोजहद कर रहे हैं. वर्तमान में स्थिति यह है कि लोग चापाकल, मोहल्लों की छोटी जलमीनार और निजी स्रोतों के सहारे किसी तरह अपनी प्यास बुझा रहे हैं. नगर परिषद की सुस्त कार्यप्रणाली और पुरानी मशीनरी इस संकट का मुख्य कारण बनकर उभरी है.
मोटर की खराबी और पार्ट्स की अनुपलब्धता
जानकारी के अनुसार, शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को संचालित करने वाले मुख्य मोटर में आई गंभीर तकनीकी खराबी के कारण सप्लाई ठप हुई है. नगर परिषद द्वारा मरम्मत का कार्य तो शुरू कराया गया, लेकिन सिमडेगा जैसे शहर में मोटर के आवश्यक पार्ट्स उपलब्ध नहीं होने के कारण काम अधर में लटका है. अधिकारियों का कहना है कि जरूरी कलपुर्जे ओडिशा के राउरकेला से मंगाए जा रहे हैं, जिसमें काफी समय लग रहा है.
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एक्सपायरी पाइपलाइन के भरोसे शहर
हैरानी की बात यह है कि जलापूर्ति योजना के तहत वर्ष 1985 में जलमीनार परिसर में जो उपकरण लगाए गए थे, उन्हीं के भरोसे आज भी पूरे शहर की प्यास बुझाई जा रही है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, लगभग 10 वर्ष पहले ही पाइपलाइन और अन्य संयंत्रों को ‘एक्सपायरी’ घोषित किया जा चुका था. इसके बावजूद कोई वैकल्पिक या आधुनिक व्यवस्था नहीं की गई, जिसका खामियाजा आज सिमडेगा की जनता भुगत रही है.
अगले रविवार तक ही राहत की उम्मीद
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अरविंद कुमार तिर्की ने बताया कि मोटर अत्यंत पुराना होने के कारण उसके पार्ट्स आसानी से नहीं मिल रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई है कि राउरकेला से पार्ट्स पहुंचने और मरम्मत पूरी होने के बाद अगले रविवार तक ही नियमित जलापूर्ति बहाल हो पाएगी. फिलहाल, परिषद द्वारा टैंकरों के माध्यम से चिन्हित इलाकों में पानी पहुंचाया जा रहा है, जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है.
जनता में बढ़ता आक्रोश
शहर के विभिन्न मोहल्लों के निवासियों ने प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी व्यक्त की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मी में ऐसी समस्या आती है, लेकिन प्रशासन ने कभी भी स्थायी समाधान निकालने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए. फिलहाल, सिमडेगा की जनता के लिए आने वाले कुछ दिन काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं.
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लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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