आदिवासी भाषा व पारंपरिक खेलों के संरक्षण पर लगा सेमिनार

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आदिवासी भाषा व पारंपरिक खेलों के संरक्षण पर लगा सेमिनार

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सिमडेगा. कोलेबिरा प्रखंड के टुटीकेल में आदिवासी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विलुप्त प्राय भाषाओं व पारंपरिक खेलों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके संरक्षण के उद्देश्य से आदिवासी कला केंद्र टूटीकेल के सभागार में प्रखंड स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन होप व फिमी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया. सेमिनार के प्रथम सत्र में उज्जवल कुशवाहा ने कहा कि जब कोई भाषा खत्म होती है, तो केवल शब्द नहीं मरते, बल्कि पूरी सभ्यता मौन हो जाती है. हमारी लुप्त प्राय आदिवासी भाषाओं व पारंपरिक खेलों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों और शिक्षा से जोड़ना समय की सबसे बड़ी मांग है. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी भाषाओं कुड़ुख, संथाली, मुंडारी आदि का संरक्षण प्रदान करना है. सेमिनार में लुप्त हो रहे खेलों के संरक्षण पर चर्चा की गयी, ताकि आज के युवाओं को शारीरिक व पारंपरिक खेलों से जोड़ा जा सके. मनोरमा एक्का ने आदिवासी मौखिक परंपराओं को मोबाइल ऐप के माध्यम से सहेजने पर विशेष बल दिया गया. आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान व पुरखा साहित्य को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक विशेष कार्य योजना की जरूरत बतायी. कार्यक्रम के दौरान आदिवासी कला, हस्तशिल्प की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया. सेमिनार में 50 चयनित प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम को सफल बनाने में अरविंद वर्मा, दिनेश केरकेट्टा, वरलेस सुरीन, बहालेंन लुगून, लीलावती सुरीन आदि ने अहम भूमिका निभायी.

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