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अब गांव की चौपालों से खींची जायेगी विकास की लकीरें: विधायक

Updated at : 25 Dec 2025 8:40 PM (IST)
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अब गांव की चौपालों से खींची जायेगी विकास की लकीरें: विधायक

झारखंड कैबिनेट द्वारा पेसा कानून 2025 को मंज़ूरी दिये जाने पर जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला.

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सिमडेगा. झारखंड कैबिनेट द्वारा पेसा कानून 2025 को मंज़ूरी दिये जाने पर जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. इस ऐतिहासिक फैसले की खुशी में गुरुवार को कांग्रेस प्रदेश कमेटी के निर्देश पर जिला अध्यक्ष सह विधायक भूषण बाड़ा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़ कर जश्न मनाया और एक-दूसरे को मिठाई खिलाई. मौके पर विधायक भूषण बाड़ा ने कहा कि पेसा कानून को लेकर विपक्ष लंबे समय से सिर्फ राजनीति करता रहा है. जबकि यह कानून आदिवासी समाज के अधिकारों से जुड़ा है. अब कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद ग्राम सभाएं सशक्त होंगी.अब गांव की चौपाल से खींची जायेंगी विकास की लकीरें. स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और जनजातीय क्षेत्रों में विकास को नयी गति मिलेगी. उन्होंने कहा कि यह कानून आदिवासी समाज को केवल अधिकार नहीं देता बल्कि उन्हें अपने गांव, जल-जंगल-जमीन और संसाधनों पर निर्णय लेने की ताकत भी देता है. विधायक ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों को ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन का अधिकार देने के उद्देश्य से पेसा कानून को 24 दिसंबर 1996 को लागू किया गया था. यह कानून देश के 10 राज्यों में लागू होता है. विधायक ने कहा कि पेसा कानून के लागू होने से जनता की आवाज़ ही सरकार की दिशा तय करेगी. मौके पर महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य जोसिमा खाखा, विधायक प्रतिनिधि संतोष सिंह, मनोज जयसवाल, अक्षन ख़ान, शकील अहमद, शिव केसरी, सलमान ख़ान, तनवीर अहमद, प्रतिमा कुजूर, शोभेंन तिगा, मंजू देवी, संगीता देवी, सुचित्रा तिर्की, उत्तम सिंह, रतन प्रसाद, आदि उपस्थित थे.

अब सरकार जनता के अनुसार चलेगी: जोसिमा खाखा

कांग्रेस महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य जोसिमा खाखा ने इसे आदिवासी समाज और खासकर महिलाओं के लिए ऐतिहासिक फैसला बताया है. जोसिमा खाखा ने कहा कि पेसा कानून केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, यह आदिवासी स्वशासन, सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना है. उन्होंने कहा कि वर्षों से आदिवासी क्षेत्रों की महिलाएं अपने गांव, जल-जंगल-जमीन से जुड़े फैसलों में भागीदारी की मांग करती रही हैं और अब यह कानून उन्हें अपनी बात खुलकर रखने का संवैधानिक मंच देगा. उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली लागू होने से ग्राम सभाएं मजबूत होंगी और ग्राम सभा में महिलाओं की भूमिका भी निर्णायक होगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

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