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आस्था व श्रद्धा का प्रतीक है जीइएल चर्च

Updated at : 18 Dec 2025 9:57 PM (IST)
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आस्था व श्रद्धा का प्रतीक है जीइएल चर्च

1968 में रखी रखी गयी चर्च की आधारशिला और 1969 में बन कर हो गया तैयार

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बानो. जीइएल चर्च बानो विश्वासियों के लिए आस्था व श्रद्धा का प्रतीक है. 1968 में इस गिरजाघर की आधारशिला रखी गयी और 1969 में गिरजाघर बन कर तैयार हो गया. उद्घाटन संस्कार समारोह में जर्मन के पादरी और झारखंड पार्टी के अध्यक्ष एनइ हीरो शामिल हुए थे. इसके साथ ही टकरमा पेरिस काउंसिल द्वारा बानो को एक मंडली के रूप में घोषित किया गया. शुरुआती दिनों में जिस स्थान पर चर्च बनाया गया है, वहां गर्ल्स हॉस्टल बनाया गया था. इसकी देखभाल शिक्षक नेल्सन बरजो द्वारा किया जा रहा था. इसके बाद 1968 में गिरजाघर बनाने का निर्णय हुआ. एक साल में गिरजाघर बन कर तैयार हुआ. उद्घाटन समारोह के बाद लोग प्रार्थना आरंभ किया. पहला चेयरमैन प्रचारक इलियास तोपनो व पादरी रिमोन सुरीन को बनाया गया. शुरुआत दिनों में विभिन्न गांवों के 65 परिवार गिरजाघर में आराधना करते थे. 24 वर्षों के बाद बानो को पास्टोरेट बनाया गया, जिसमें पहला चेयरमैन पादरी जकरिया केरकेट्टा को बनाया गया. मार्च 2014 में राइट रेव्ह विशप जोलेन मरसलन द्वारा धूमधाम के साथ पेरिश का उद्घाटन और संस्कार कराया गया. पेरिश का पहला चेयरमैन उज्जवल केरकेट्टा को बनाया गया. बानो पास्टोरेट के अंतर्गत 13 मंडली को शामिल किया गया. इधर, 2014 में नये गिरजा घर का निर्माण शुरू किया गया, जो 2020 में बन कर तैयार हुआ. पांच अक्तूबर 2022 को नये गिरजाघर का उद्घाटन किया गया. उदघाटन समारोह में खूंटी कदमा डायोसिस के विशप रेव्ह जोसेफ सांगा व सिसई विधायक जिग्गा मुंडा शामिल हुए. गिरजाघर के बसंत कोंगाड़ी ने बताया कि बानो पेरिश का आपसी सहयोग से नया चर्च निर्माण किया गया, ताकि विश्वासियों को आराधना विनती करने में सुविधा हो. इधर, क्रिसमस पर्व को लेकर गिरजाघर का रंग-रोगण व सजावाट शुरू कर दिया गया है. महिला संघ व युवा संघ के सदस्य क्रिसमस को लेकर चर्च में सजावट करने में लगे हैं. जीइएल चर्च बानो विश्वासियों के लिए आस्था व श्रद्धा का प्रतीक है. 1968 में इस गिरजाघर की आधारशिला रखी गयी और 1969 में गिरजाघर बन कर तैयार हो गया. उद्घाटन संस्कार समारोह में जर्मन के पादरी और झारखंड पार्टी के अध्यक्ष एनइ हीरो शामिल हुए थे. इसके साथ ही टकरमा पेरिस काउंसिल द्वारा बानो को एक मंडली के रूप में घोषित किया गया. शुरुआती दिनों में जिस स्थान पर चर्च बनाया गया है, वहां गर्ल्स हॉस्टल बनाया गया था. इसकी देखभाल शिक्षक नेल्सन बरजो द्वारा किया जा रहा था. इसके बाद 1968 में गिरजाघर बनाने का निर्णय हुआ. एक साल में गिरजाघर बन कर तैयार हुआ. उद्घाटन समारोह के बाद लोग प्रार्थना आरंभ किया. पहला चेयरमैन प्रचारक इलियास तोपनो व पादरी रिमोन सुरीन को बनाया गया. शुरुआत दिनों में विभिन्न गांवों के 65 परिवार गिरजाघर में आराधना करते थे. 24 वर्षों के बाद बानो को पास्टोरेट बनाया गया, जिसमें पहला चेयरमैन पादरी जकरिया केरकेट्टा को बनाया गया. मार्च 2014 में राइट रेव्ह विशप जोलेन मरसलन द्वारा धूमधाम के साथ पेरिश का उद्घाटन और संस्कार कराया गया. पेरिश का पहला चेयरमैन उज्जवल केरकेट्टा को बनाया गया. बानो पास्टोरेट के अंतर्गत 13 मंडली को शामिल किया गया. इधर, 2014 में नये गिरजा घर का निर्माण शुरू किया गया, जो 2020 में बन कर तैयार हुआ. पांच अक्तूबर 2022 को नये गिरजाघर का उद्घाटन किया गया. उदघाटन समारोह में खूंटी कदमा डायोसिस के विशप रेव्ह जोसेफ सांगा व सिसई विधायक जिग्गा मुंडा शामिल हुए. गिरजाघर के बसंत कोंगाड़ी ने बताया कि बानो पेरिश का आपसी सहयोग से नया चर्च निर्माण किया गया, ताकि विश्वासियों को आराधना विनती करने में सुविधा हो. इधर, क्रिसमस पर्व को लेकर गिरजाघर का रंग-रोगण व सजावाट शुरू कर दिया गया है. महिला संघ व युवा संघ के सदस्य क्रिसमस को लेकर चर्च में सजावट करने में लगे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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