सिमडेगा में इलाज के दौरान लापरवाही से हुई बच्ची की मौत, थाने में शिकायत

Updated at : 27 Sep 2018 10:56 PM (IST)
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सिमडेगा में इलाज के दौरान लापरवाही से हुई बच्ची की मौत, थाने में शिकायत

जनता क्लिनिक में चल रहा था इलाज सिमडेगा : शहरी क्षेत्र के सलडेगा पाहन टोली भवानी कॉलोनी में रहने वाली एक बच्ची की मौत चिकित्सकों द्वारा गलत इलाज किये जाने के कारण हो गयी. उक्त बच्ची का इलाज भट्ठीटोली स्थित जनता क्लिनिक चिकित्सक द्वारा किया जा रहा था. जानकारी के मुताबिक सलडेगा भवानी कॉलोनी निवासी […]

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जनता क्लिनिक में चल रहा था इलाज

सिमडेगा : शहरी क्षेत्र के सलडेगा पाहन टोली भवानी कॉलोनी में रहने वाली एक बच्ची की मौत चिकित्सकों द्वारा गलत इलाज किये जाने के कारण हो गयी. उक्त बच्ची का इलाज भट्ठीटोली स्थित जनता क्लिनिक चिकित्सक द्वारा किया जा रहा था. जानकारी के मुताबिक सलडेगा भवानी कॉलोनी निवासी रमेश सिंह की पुत्री 14 वर्षीय सुनीता कुमारी 15 दिन पूर्व बीमार हो गयी थी.

श्री सिंह बच्ची को इलाज के लिए जनता क्लिनिक ले गये. जहां उसे मलेरिया से ग्रसित बताया गया. चिकित्सक द्वारा उसका इलाज जारी थी. इसी बीच बुधवार की रात्रि बच्ची गंभीर हो गयी. सुबह से उन्होंने चिकित्सक से बात किया. बात करने पर चिकित्सक ने कहा कि वह बाहर हैं क्लिनिक ले जाइए.

श्री सिंह गुरुवार की सुबह अपनी पुत्री को लेकर जनता क्लिनिक गये. जहां क्लिनिक में काम करने वाले नर्स व कंपाउंडर ने चिकित्सक से बात कर इलाज शुरू कर दी. बच्ची को दवा व इंजेक्शन दिया. किंतु बच्ची स्थिति और भी खराब होती गयी. बच्ची की स्थिति को देखते हुए क्लिनिक के कर्मियों ने उसे सदर अस्पताल ले जाने को कहा.

बच्ची को सदर अस्पताल लाया गया. जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.बच्ची के पिता रमेश सिंह ने इसी की सूचना पुलिस को दी. सूचना मिलते ही पुलिस सदर अस्पताल पहुंच कर शव को कब्जे में ले लिया. बच्ची के पिता ने आरोप लगाया है कि गलत इलाज के कारण बच्ची की मौत हुई है. उन्होंने थाना में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है.

छापामारी के नाम पर की जाती है खानापूरी

जिले में झोला छाप चिकित्सक फल फूल रहे हैं. शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में भी झोला छाप चिकित्सकों द्वारा क्लिनिक खोलकर रोगियों का इलाज किया जाता है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई बार अवैध रूप से चलाये जा रहे क्लिनिक एवं अस्पतालों के खिलाफ छापामारी की जाती है. छापामारी के दौरान कई झोला छाप चिकित्सक क्लिनिक चलाते हुए पकड़े भी जाते हैं. किंतु उनके खिलाफ कोई विशेष कार्रवाई नहीं की जाती है. छापामरी के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जाती है.

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