Seraikela News : कृष्णापुर में भिंडी की खेती बनी मुनाफे की फसल, 180 एकड़ में लहराई हरियाली

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 24 Apr 2025 11:23 PM

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कृष्णापुर में भिंडी की खेती बनी मुनाफे की फसल, 180 एकड़ में लहराई हरियाली

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खरसावां. खरसावां प्रखंड के कृष्णापुर का तालाब किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है. कृष्णापुर व आस-पास के क्षेत्रों में इस तालाब के पानी से करीब 180 एकड़ की भूमि पर किसान सब्जी की खेती कर रहे हैं. इसमें से अधिकतर किसान भिंडी की खेती कर रहे हैं. इस तालाब से कृष्णापुर, गोपालपुर व डांगलटांड़ के किसानों को भी काफी लाभ मिल रहा है. कृष्णापुर के अधिकतर किसान धान की खेती खत्म होने पर भिंडी की खेती में जुट जाते हैं. पूरे प्रखंड में सबसे अधिक भिंडी की खेती कृष्णापुर पंचायत में होती है. यहां के खेतों में फरवरी के अंतिम सप्ताह से ही भिंडी तैयार होने लगती है. मई-जून तक भिंडी निकलते लगती है. शुरुआती दिनों में भिंडी की कीमत 60 से 80 रुपये प्रतिकिलो रहती है. वहीं वर्तमान में 30-40 रुपये किलो के भाव से भिंडी बिक रही है.

खरसावां, चक्रधरपुर व चाईबासा के बाजार में करते हैं भिंडी की बिक्री से लेकर

कृष्णापुर के किसान बताते हैं कि वे लोग खरसावां, राजखरसावां व बड़ाबांबो के बाजार के साथ चक्रधरपुर व चाईबासा में भी भिंडी की ब्रिकी करते हैं. कुछ किसान स्वयं बाजारों में जा कर भिंडी बेचते हैं. वहीं अधिकतर किसान व्यापारी व थोक के भाव में भिंडी बेच देते हैं. भिंडी की खेती कर किसान हर वर्ष अच्छी-खासी आमदनी कर रहे हैं.

सिंचाई की व्यवस्था हो, तो सालों भर होगी खेती

किसान बताते हैं कि कृष्णापुर गांव में दो बड़े तालाब हैं. इसी तालाब के पानी से किसान सब्जी की खेती करते हैं. इसके अलावे सिंचाई की अन्य सुविधा नहीं है. भिंडी के खेतों में पानी का पटवन करने के दौरान एक तालाब सूख गया है. जबकि दूसरे तालाब में अभी पानी है. कहते हैं सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था हो, तो बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती हो सकेगी. इसके लिए सरकार को क्षेत्र में लिफ्ट एरिगेशन व डीप बोरिंग पर ध्यान देने की जरूरत है.

बत्तख पालन से भी हो रहे लाभान्वित

कृष्णापुर गांव के लोग तालाब से सब्जियों की खेती के साथ बत्तख पालन भी कर रहे हैं. बतख के अंडों की बिक्री कर किसान रोजगार कर रहे हैं. तालाब की खुदाई के बाद गांव में काफी हद तक पानी की समस्या का समाधान हुआ है.

किसानों के बोल

-खेती के लिए कृष्णापुर का तालाब किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है. इसी तालाब के पानी से क्षेत्र में करीब 200 एकड़ जमीन पर भिंडी की खेती हो रही है. इससे किसानों को अतिरिक्त मुनाफा हो रहा है. -छोटेलाल महतो, ग्रामीण कृष्णापुर — कृष्णापुर व आस-पास के किसान दिसंबर में धान के बाद भिंडी की खेती में जुट जाते हैं. भिंडी की खेती में काफी मेहनत होती है. हालांकि मुनाफा भी ठीक-ठाक हो जाता है. कार्तिक महतो, किसान कृष्णापुर (17 केएसएन 7)– खरसावां प्रखंड में कृष्णापुर भिंडी की खेती के लिए प्रसिद्ध है. यहां उपजाये गये भिंडी व्यापारियों के माध्यम से चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला-खरसावां के बाजारों में पहुंचती है. -नीतीश महतो, ग्रामीण कृष्णापुर (17 केएसएन 8)– भिंडी समेत अन्य सब्जियों की खेती के लिए सिंचाई में परेशानी होती है. तालाब के पानी से खेती होती है. सिंचाई के लिए लिफ्ट एरिगेशन व डीप बोरिंग की व्यवस्था करने पर क्षेत्र के किसान और वृहद पैमाने पर सब्जी की खेती कर सकेंगे. -प्रताप महतो, किसान कृष्णापुर (17 केएसएन 9)

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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