छऊ मुखौटे की दिल्ली में गूंज, राष्ट्रपति करेंगी सरायकेला के इस शिल्पकार का सम्मान

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छऊ मुखौटा शिल्पकार सुशांत महापात्र का स्वागत करते संगीत नाटक अकादमी के सदस्य.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज दिल्ली में गुरु सुशांत महापात्र समेत 115 कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित करेंगी. जानें पूरी खबर.

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सरायकेला : सरायकेला की पहचान बने छऊ और पारंपरिक मुखौटा शिल्प को राष्ट्रीय मंच पर बड़ी पहचान मिलने जा रही है. छऊ मुखौटा शिल्पकार और गुरु सुशांत कुमार महापात्र को 13 अगस्त को नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित करेंगी. देशभर के कलाकारों के बीच सरायकेला के इस कलाकार को मिलने वाला यह सम्मान जिले की समृद्ध छऊ परंपरा के लिए खास उपलब्धि है.

दिल्ली के होटल अशोका में हुआ स्वागत

पुरस्कार ग्रहण करने के लिए गुरु सुशांत कुमार महापात्र नयी दिल्ली पहुंच चुके हैं. संगीत नाटक अकादमी के सदस्य दीपक जोशी ने होटल अशोका में उनका स्वागत किया. इस दौरान उन्हें समारोह से जुड़ी तैयारियों की जानकारी दी गयी. विज्ञान भवन में 13 अगस्त को पूर्वाह्न 11:30 बजे होने वाले समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 2024 और 2025 के लिए देशभर के विभिन्न कला क्षेत्रों के कुल 115 कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और पुरस्कार प्रदान करेंगी.

सम्मान सूची में झारखंड के तीन नाम

इस सम्मान सूची में झारखंड से गुरु सुशांत महापात्र के अलावा बुंडू, रांची की दो सगी बहनों बुटन देवी और सोमवारी देवी का नाम भी शामिल है. दोनों पारंपरिक नचनी नृत्य परंपरा को जीवित रखने के लिए जानी जाती हैं. समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल और संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा समेत कई अतिथि मौजूद रहेंगे.

मुखौटों से मिली पहचान, अब राष्ट्रीय सम्मान

सरायकेला छऊ की खास पहचान उसके पारंपरिक मुखौटे हैं. नृत्य में इन मुखौटों की अहम भूमिका होती है. इनके निर्माण में पारंपरिक तकनीक व विशिष्ट कलात्मकता का इस्तेमाल किया जाता है. गुरु सुशांत महापात्र ने इस पारंपरिक मुखौटा शिल्प को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. अब उनके काम को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के जरिए राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिल रहा है. संगीत नाटक अकादमी की ओर से वर्ष 1952 से ये पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं. अकादमी फेलोशिप प्राप्तकर्ताओं को 3 लाख रुपये, जबकि अकादमी पुरस्कार विजेताओं को ताम्रपत्र, अंगवस्त्र और 1 लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाती है.


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शचिंद्र कुमार दाश

लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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