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खरसावां गोलीकांड के शहीदों को झारखंड के दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, CM हेमंत ने कर दिया बड़ा ऐलान

Updated at : 01 Jan 2026 6:08 PM (IST)
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Kharsawan Golikand 1948

खरसावां गोलीकांड के शहीदों को बारी बारी से श्रद्धांजलि देते पूर्व डिप्टी सीएम सुदेश महतो, सीएम हेमंत सोरेन और पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा, Pic Credit- Prabhat Khabar

Kharsawan Golikand 1948: खरसावां गोलीकांड के शहीदों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा और सुदेश महतो ने श्रद्धांजलि दी. इस दौरान शहीदों की पहचान, परिवारों को सम्मान और पेसा कानून को लेकर खूब सियासी बयानबाजी हुई.

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Kharsawan Golikand 1948, शचींद्र कुमार दाश/प्रताप मिश्रा: खरसावां गोलीकांड के शहीदों को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा, पूर्व डिप्टी सीएम सुदेश महतो ने गुरुवार को श्रद्धांजलि देते हुए शहीद वेदी को नमन किया. इस दौरान आदिवासी अधिकारों की रक्षा और पेसा कानून की भावना को लागू करने की बात के साथ साथ , शहीदों और आंदोलनकारियों की पहचान और उनके परिवारों को सम्मान देने की भी बात कही गयी. सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा अपनी पत्नी मीरा मुंडा और तमाम भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पदयात्रा करते हुए शहीद स्थल पहुंचे और 1 जनवरी 1948 को खरसावां गोलीकांड में शहीद हुए आदिवासियों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

आदिवासी समाज के बलिदानों से सबक लेने में असमर्थ रही सरकारें : अर्जुन मुंडा

शहीद स्थल से बाहर निकलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आजादी के बाद भी सरकारें आदिवासी समाज के बलिदानों से ठोस सबक लेने में असफल रही हैं. जिन शहीदों ने अपने रक्त से इतिहास रचा, उनकी धरती आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही है.

आदिवासी समाज का संघर्ष अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ : अर्जुन मुंडा

अर्जुन मुंडा ने कहा कि आजादी से पहले आदिवासी समाज का संघर्ष अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध था, जिसमें भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू और चांद जैसे नायकों ने बलिदान दिया. लेकिन आजादी के बाद खरसावां की लाल मिट्टी ने यह संदेश दिया कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और जीवन पद्धति को समझे बिना स्वतंत्रता अधूरी है. उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून लागू होने के बावजूद उसकी नियमावली आज भी आदिवासी जीवन के अनुरूप नहीं है, जो शहीदों के बलिदान की भावना के साथ अन्याय है.

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कर दिया बड़ा ऐलान

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए बड़ा ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि खरसावां गोलीकांड में शामिल शहीदों, आंदोलनकारियों और उनके परिवारों की पहचान अब राज्य सरकार करेगी. इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा, जो जल्द ही अपना कार्य शुरू करेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन आंदोलनकारियों ने जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अधिकारों के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, उनकी पहचान कर उन्हें सम्मान देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है.

शहीद परिवारों को सम्मानित करना सच्ची श्रद्धांजलि: सीएम हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आगे कहा कि खरसावां शहीद स्थल पर पूरे राज्य से लोग पहुंचते हैं और शहीद हुए आदिवासियों को नमन करते हैं. यह दिन हमेशा याद दिलाता है कि आजाद भारत में भी आदिवासियों पर गोलियां चली थीं और कई लोग शहीद हुए थे. शहीद परिवारों को सम्मानित करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

सुदेश महतो ने सरकार पर उठाये गंभार सवाल

वहीं, आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने शहीदों और आंदोलनकारियों की पहचान को लेकर सरकारों पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों बाद भी शहीदों और आंदोलनकारियों तथा उनके परिवारों की पहचान नहीं हो पाना सरकारों की कमिटमेंट की कमी को दर्शाता है. केवल खरसावां ही नहीं, बल्कि संथाल विद्रोह सहित झारखंड और देश के अन्य आंदोलनों में भी कई शहीद आज तक अज्ञात हैं.

खरसावां गोलीकांड के शहीदों की संख्या जारी की गयी सूची से अधिक: सुदेश महतो

सुदेश महतो ने कहा कि खरसावां गोलीकांड सहित अन्य घटनाओं में शहीदों की जो सत्यापित सूची जारी की गई है, वह पूरी तरह वास्तविक नहीं है और शहीदों की संख्या इससे कहीं अधिक है. उन्होंने सरकार से मांग की कि वे एक ऐसा आयोग गठित करें जो केवल कागजी और औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर शहीदों और आंदोलनकारियों की पहचान कर सके. उन्होंने कहा कि शहीदों की पहचान और उनके आश्रितों को सम्मान मिलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

सुदेश महतो ने पेसा कानून को लेकर भी सरकार को घेरा

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने पेसा कानून को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि पेसा एक्ट को न्यायालय के दबाव में आनन-फानन में कैबिनेट में लाया गया है, जबकि अब तक इसकी नियमावली सार्वजनिक नहीं की गई है. नियमावली सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उसमें पेसा कानून की मूल भावना और सशक्त ग्राम सभा की परिकल्पना को सही तरीके से शामिल किया गया है या नहीं.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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