ग्रामीणों ने की श्रमदान कर एक किमी तक सड़क की मरम्मत

Updated at : 19 May 2015 8:13 AM (IST)
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ग्रामीणों ने की श्रमदान कर एक किमी तक सड़क की मरम्मत

सरायकेला : किसी भी क्षेत्र के विकास का पैमाना सड़क को माना जाता है. राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार आधारभूत संरचना सड़क निर्माण के लिए प्रति वर्ष अरबों की राशि खर्च कर रही है. वहीं कई विभागों में विकास की राशि खर्च नहीं होने के कारण सरेंडर हो जा रही है. परंतु आज भी […]

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सरायकेला : किसी भी क्षेत्र के विकास का पैमाना सड़क को माना जाता है. राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार आधारभूत संरचना सड़क निर्माण के लिए प्रति वर्ष अरबों की राशि खर्च कर रही है. वहीं कई विभागों में विकास की राशि खर्च नहीं होने के कारण सरेंडर हो जा रही है. परंतु आज भी कई ऐसे गांव हैं, जिसमें छोटी-छोटी सड़कें लोगों की परेशानी का सबब बन कर रह गयी है.
उन सड़कों का निर्माण नहीं होने से ग्रामीण राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उनमें एक सरायकेला प्रखंड के मुरुप पंचायत अंतर्गत जगन्नाथपुर स्थित आरइओ मुख्य पथ से महालिमोरुप रेलवे फाटक तक एक किमी लंबाई की मुख्य सड़क जो वर्षो से प्रशासनिक पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार है. सड़क निर्माण के लिए ग्रामीण कई बार संबंधित विभाग से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि को भी आवेदन दे चुके हैं.
परंतु उनके आवेदन पर कोई विचार नहीं किया गया. सड़क की स्थिति को देखते हुए और राहगीरों के आवागमन की सुविधा करने के लिए सोमवार को जगन्नाथपुर के समाजसेवी राधेश्याम मंडल के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर सड़क की मरम्मत कार्य को पूरा करने का बीड़ा उठाया. श्री मंडल के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीणों ने सड़क पर मिट्टी मुरुम आदि डाल कर मरम्मत की. साथ ही सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे को भर कर आवाजाही लायक बना डाला.
जन प्रतिनिधियों ने भी की उपेक्षा. सड़क की मरम्मत के लिए ग्रामीणों ने पूर्व मुख्यमंत्री अजरुन मुंडा, सांसद कड़िया मुंडा, विधायक दशरथ गागराई, जिला परिषद सदस्य, मुखिया लक्ष्मी सरदार के अलावा जिला प्रशासनिक पदाधिकारियों में से डीडीसी, प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवेदन देकर सड़क मरम्मत करने की मांग कर चुके हैं. परंतु किसी ने भी सड़क मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया.
बरसात के दिनों में सड़क तालाब का रूप धारण कर लेती है. दर्जनों गांवों के ग्रामीण करते हैं आवाजाही
सड़क से मुरुप, चिलकू, कमलपुर, बिटापुर समेत कई पंचायतों के दर्जनों गावों के ग्रामीण इसी सड़क से होकर प्रतिदिन प्रखंड व जिला मुख्यालय, दैनिक बाजार व आवाजाही के लिए महालिमोरुप रेलवे स्टेशन आते हैं.
लेकिन वर्षो से सड़क का मरम्मत नहीं होने से लोगों का सड़क पर चलना दूभर हो गया है. मरम्मत के अभाव में सड़क अपने अस्तित्व को बचाने में स्वयं संघर्षरत है. ग्रामीणों का कहना है कि श्रमदान के माध्यम से सड़क को चलने लायक बनाया जा रहा है. लेकिन सड़क की मरम्मत नहीं होने से जोरदार आंदोलन किया जायेगा.
श्रमदान में मुख्य रूप से संजय प्रधान, विष्णु प्रधान, सुंदर प्रधान, आदिश्वर प्रधान, शिवानंद महतो, बलभद्र, तरुण कुमार प्रधान, जगन्नाथ, बीरबल, सत्यवान, सत्य मंडल, जीतेन, सुदाम, गणोश समेत कई महिलाओं व पुरुषों का योगदान रहा.
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