Seraikela kharsawan News : हाथियों के संरक्षण के लिए 4 हजार लोगों ने लगायी दौड़

Edited by AKASH
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झारखंड वन विभाग की ओर से जंगली हाथियों के संरक्षण के लिए रविवार को सरायकेला-खरसावां जिले के दलमा वन्यजीव अभयारण्य में आयोजित 16 किलोमीटर के दौड़ा का आयोजन किया गया.

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जमशेदपुर/चांडिल.

झारखंड वन विभाग की ओर से जंगली हाथियों के संरक्षण के लिए रविवार को सरायकेला-खरसावां जिले के दलमा वन्यजीव अभयारण्य में आयोजित 16 किलोमीटर के दौड़ा का आयोजन किया गया. ‘रन फॉर गजराज’ के नाम से आयोजित इस दौड़ में लगभग 4 हजार लोगों ने हिस्सा लिया और हाथी को संरक्षित करने का संदेश दिया. इस दौड़ में 400 महिलाओं ने भी शिरकत की. दौड़ की शुरुआत दलमा पहाड़ की तराई स्थित शहरबेड़ा फुटबॉल मैदान से हुई और यहीं आकर समाप्त हुई.

दौड़ का शुभारंभ ईचागढ़ की विधायक सविता महतो, सरायकेला-खरसावां जिले के उपायुक्त नितिश कुमार सिंह, गज परियोजना के उपनिदेशक सबा आलम अंसारी समेत कई अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर किया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रतिभागी और स्थानीय लोग मौजूद रहे. दौड़ का आयोजन महिला व पुरुष दोनों वर्गों में हुआ. दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 31,000 रुपये, दूसरे और तीसरे स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः 21,000 रुपये और 11,000 रुपये मिले. चौथे और पांचवें स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को 5,000-5,000 रुपये का पुरस्कार दिया गया. विजेताओं को प्रशस्ति-पत्र भी प्रदान किया गया.

सरकार और वन विभाग का सफल प्रयास : सविता महतो

मौके पर प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए विधायक सविता महतो ने कहा कि झारखंड सरकार और वन विभाग का यह एक सफल प्रयास है. जिसके माध्यम से हाथियों के संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंच रहा है. हाथी के संरक्षण के साथ-साथ यह दौड़ लोगों को फिटनेस के प्रति भी जागरूक करेगा.

ग्रामीणों को हाथी संरक्षण के प्रति जागरूक करना उद्देश्य : सबा अंसारी

गज परियोजना के उपनिदेशक सबा आलम अंसारी ने कहा कि हमारा उद्देश्य ””””रन फॉर गजराज”””” (हाफ मैराथन) के माध्यम से अभयारण्य के आसपास के ग्रामीणों को हाथी संरक्षण के प्रति जागरूक और प्रोत्साहित करना था. अच्छी संख्या में प्रतिभागी ने इस दौड़ में हिस्सा लिया. अधिकतर प्रतिभागी अभयारण्य के आसपास के गांवों से थे. वन विभाग के अनुसार दलमा वन्यजीव अभयारण्य के भीतर लगभग 86 गांव हैं और लगभग 51 गांव 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं. यह अभयारण्य न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए, बल्कि हाथियों के प्रवास गलियारे और आवास के रूप में भी प्रसिद्ध है. डीएफओ ने यह भी बताया कि लंबे अंतराल के बाद, पांच हाथी दलमा लौट आये हैं.

रन फॉर गजराज में अन्य राज्य को शामिल करना गलत : आनंद

चांडिल. चांडिल प्रखंड की भादुडीह पंचायत के मुखिया बुद्धेश्वर बेसरा ने चाकुलिया मोड़ में प्रेसवार्ता कर रन फॉर गजराज दलमा मैराथन के आयोजनकर्ता वन विभाग पर पक्षपात का आरोप लगाया है. कहा कि रन फॉर गजराज दलमा मैराथन में स्थानीय लोगों की घोर उपेक्षा की गयी है. यहां तक की दलमा इको सेंसेटिव जोन के अंतर्गत आनेवाले पंचायतों के मुखिया व जनप्रतिनिधियों को भी नहीं बुलाया गया. पांचवीं अनुसूची में सभी मुखिया आदिवासी हैं. वन विभाग द्वारा आदिवासियों के साथ घोर उपेक्षा की गयी. दलमा अंचल के अंतर्गत आनेवाले गांव के आदिवासी व अन्य लोगों द्वारा वन विभाग की मनमानी का विरोध किया जायेगा. काठजोड़ गांव के ग्राम प्रधान आनंद सिंह ने कहा कि रन फॉर गजराज दलमा मैराथन में अन्य राज्य के प्रतिभागियों को छल प्रपंच कर विजयी बनाया गया.

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