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विरासत में मिले पारंपरिक झुमर संगीत को आगे बढ़ा रही हैं दीपा

Updated at : 06 Dec 2018 1:22 PM (IST)
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विरासत में मिले पारंपरिक झुमर संगीत को आगे बढ़ा रही हैं दीपा

शचिंद्र कुमार दाश सरायकेला : पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण ने भारतीय संगीत सरिता की लय और ताल की परिभाषा को भले बदल दिया हो, गांवों-कस्बों के कलाकार अब भी अपनी विरासत को बचाने की कोशिशों में जुटे हैं. सरायकेला-खरसावां के उदालखाम की रहनेवाली महिला लोक कलाकार दीपा कुमारी भी गीत-संगीत की अपनी विरासत को आगे […]

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शचिंद्र कुमार दाश

सरायकेला : पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण ने भारतीय संगीत सरिता की लय और ताल की परिभाषा को भले बदल दिया हो, गांवों-कस्बों के कलाकार अब भी अपनी विरासत को बचाने की कोशिशों में जुटे हैं. सरायकेला-खरसावां के उदालखाम की रहनेवाली महिला लोक कलाकार दीपा कुमारी भी गीत-संगीत की अपनी विरासत को आगे बढ़ा रही हैं. 18 साल की दीपा कुमारी को झुमर संगीत विरासत में मिली है.

दीपा की अथक कोशिशों का ही परिणाम है कि कोल्हान के झूमर प्रेमियों की जुबान पर ‘दीदी गे झुमर नाचे मना ना करिहा…, श्रावन भादर मासे, रीमी-झीमी पानी खसे…, सुन गे बाबूर मांय, चार भुजन आने जाये…’ बस गया है. कोल्हान ही नहीं, बाहर भी दीपा के कुरमाली झूमर के हजारों दीवाने हैं.

सामाजिक विषमता की बेड़ियों को तोड़ कर विरासत में मिली कुरमाली झूमर संगीत को बचाने में जुटी हैं दीपा. शिवा लोक कला झूमर समिति की इस उदीयमान कलाकार ने मर्यादाओं के भीतर रह कर अब तक झारखंड, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में 300 से अधिक स्टेज शो किये हैं. दीपा कुमारी कुरमाली झुमर गीत तो गाती ही हैं, साथी कलाकारों के साथ बेहतरीन नृत्य भी प्रस्तुत करती हैं.

झुमर सम्राट संतोष महतो की बेटी दीपा अभी स्नातक की पढ़ाई कर रही है. वह 12 साल की थी, जब पिता ने अपनी विरासत लाडली बेटी को सौंपी थी. दीपा के बड़े भाई सुधांशु महतो भी इस विद्या में पारंगत हैं. दीपा के दादा कृष्णा महतो भी झुमर कलाकार थे.

दीपा बताती हैं कि उनके पिता संतोष महतो झारखंड के नामी झुमर लोक कलाकार हैं. उन्होंने हमेशा दीपा को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. दीपा कहती हैं कि झुमर विशुद्ध रूप से लोक गीत है. झुमर संगीत जीवन के उतार-चढ़ाव का आईना है. इसमें जीवन का हर रंग समाहित है.

दीपा की इच्छा : विदेशों तक पहुंचे झुमर की छटा

दीपा की इच्छा है कि झुमर की सतरंगी छटा विदेशों तक पहुंचे. इस नृत्य कला को सरकारी संरक्षण मिले और आने वाली पीढ़ी के लिए झुमर अकादमी की स्थापना की जाये. वहां झुमर नृत्य-संगीत के प्रशिक्षण की व्यवस्था हो. प्रभात खबर के अपराजिता सम्मान समारोह में चाईबासा में उभरते लोक गायक के रूप में दीपा कुमारी को इसी साल सम्मानित किया गया. दीपा कहती हैं कि ‘प्रभात खबर’ ने सम्मान देकर आगे बढ़ने के प्रति प्रेरित किया.

खूब इज्जत मिलती है जमीन से जुड़े कलाकारों को

दीपा का कहना है कि इस कला से जुड़े लोग शोहरत की बुलंदियों तक भले नहीं पहुंच पाते, लेकिन जमीनी स्तर पर इज्जत बहुत मिलती है. दीपा का मानना है कि मेहनत व परिश्रम के बल पर ही खेतों की मेड़ से निकला यह रास्ता एक दिन विश्व के रंगमंच तक जरूर पहुंचेगा. घर-परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. फिर भी वह विरासत में मिली इस कला को सहेजने में जुटी है.

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