जगन्नाथो लोकनाथाे, नीलाद्रीश: परो हरि:...

Updated at : 27 Jun 2018 5:29 AM (IST)
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जगन्नाथो लोकनाथाे, नीलाद्रीश: परो हरि:...

देवस्नान पूर्णिमा कल, 108 कलश जल से स्नान करेंगे प्रभु जगन्नाथ, प्रभु जगन्नाथ के दर्शन को पहुंचेंगे हजारों श्रद्धालु खरसावां : शुक्रवार (28 जून) को देवस्नान पूर्णिमा है. देव स्नान पूर्णिमा पर जगन्नाथ मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना कर चतुर्था मूर्ति (प्रभु जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा व सुदर्शन) को विशेष स्नान कराया […]

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देवस्नान पूर्णिमा कल, 108 कलश जल से स्नान करेंगे प्रभु जगन्नाथ, प्रभु जगन्नाथ के दर्शन को पहुंचेंगे हजारों श्रद्धालु

खरसावां : शुक्रवार (28 जून) को देवस्नान पूर्णिमा है. देव स्नान पूर्णिमा पर जगन्नाथ मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना कर चतुर्था मूर्ति (प्रभु जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा व सुदर्शन) को विशेष स्नान कराया जायेगा. सरायकेला, खरसावां, हरिभंजा, चांडिल समेत क्षेत्र के सभी जगन्नाथ मंदिरों में इसकी तैयारियां चल रही हैं. प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा को मंदिर के गर्भगृह से स्नान मंडप में ले जाकर विषेश पूजा अर्चना की जायेगी. इसके पश्चात स्नान मंडप में 108 कलशों के जल से उन्हें स्नान कराया जायेगा. प्रभु जगन्नाथ के महास्नान को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचेंगे. स्नान पूर्णिमा के मौके पर प्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के दर्शन को काफी फलदायी माना जाता है.
स्नान के पश्चात 15 दिन नहीं होंगे महाप्रभु के दर्शन. मान्यता है कि स्नान पूर्णिमा के दिन अत्यधिक स्नान से प्रभु जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं. इसके पश्चात एक पखवाड़े, यानि 15 दिन तक अणसर गृह में उनका उपचार चलेगा. इन 15 दिनों में प्रभु जगन्नाथ किसी भी भक्त को दर्शन नहीं देते. देव स्नान पूर्णिमा के साथ ही रथ यात्रा उत्सव की तैयारियों की भी शुरुआत हो जाती है.
नेत्र उत्सव पर भक्तों को दर्शन देंगे प्रभु जगन्नाथ. स्नान पूर्णिमा के 15 दिन बाद, 13 जुलाई को भगवान जगन्नाथ का नेत्र उत्सव आयोजित होगा और उसी दिन भक्तों को प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा के नव यौवन रूप के दर्शन होंगे. 14 जुलाई को प्रभु जगन्नाथ की प्रसिद्ध वार्षिक रथयात्रा निकलेगी. प्रभु जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ रथ पर सवार होकर अपनी मौसी के घर जायेंगे. खरसावां, हरिभंजा, चांडिल समेत कुछ स्थानों पर एक दिन में ही प्रभु जगन्नाथ मौसी बाड़ी पहुंचेंगे, जबकि सरायकेला, दलाइकेला आदि स्थानों पर दो दिन में, यानि 15 जुलाई को मौसीबाड़ी पहुंचेंगे. 22 जुलाई को बहुरा यात्रा पर प्रभु मौसीबाड़ी से रथ पर सवार हो कर पुन: श्रीमंदिर वापस लौटेंगे.
देव स्नान पूर्णिमा के साथ ही शुरू हो जायेंगी रथ यात्रा की तैयारियां
रथ यात्रा के कार्यक्रम
28 जून : पूर्णिमा पर श्रीजगन्नाथ स्नान यात्रा
13 जुलाई : नेत्र उत्सव व व प्रभु जगन्नाथ के नव यौवन रूप के दर्शन
14 जुलाई : श्री मंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए रथ यात्रा
15 जुलाई : गुंडिचा मंदिर में चतुर्था मूर्ति का पहंडी बिजय
18 जुलाई : हेरा पंचमी पर मां लक्ष्मी द्वारा रथ भंगिनी
21 जुलाई : श्री जगन्नाथ का अनंत फलदायी नवमी संध्या दर्शन
22 जुलाई : श्री जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर तक बहुरा यात्रा
23 जुलाई : श्रीमंदिर में चतुर्था मूर्ति का पहंडी बिजय
जिले में रथयात्रा का भव्य आयोजन होता है
सरायकेला खरसावां जिले में बडे पैमाने पर प्रभु जगन्नाथ की रथा यत्रा आयोजित होती है. जगत के नाथ प्रभु जगन्नाथ की द्वादश यात्राओं में वार्षिक रथ यात्रा सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है. रथ यात्रा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. जिले के सरायकेला, खरसावां, हरिभंजा, सीनी, चांडिल, गम्हरिया, दलाइकेला, संतारी, जोजोकुड़मा, बंदोलोहर, चाकड़ी, पोटोबेड़ा आदि जगहों पर रथ यात्राओं का आयोजन होता है.
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