स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से मलेरिया के मामलों में आयी कमी

Published by :ABDHESH SINGH
Published at :24 Apr 2026 10:31 PM (IST)
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sahibganj

साहिबगंज (फाइल फोटो)

जागरुकता अभियान का दिखा असर, ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी बनी हुई है चुनौती

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साहिबगंज

जिले के मंडरो, बोरियो व बरहेट प्रखंड पहले मलेरिया से काफी प्रभावित क्षेत्र रहे हैं. गोड्डा जिले की सीमा से जुड़े होने के कारण यहां मरीजों की संख्या अधिक मिलती थी. एक समय जिले में हजारों मलेरिया के मामले सामने आते थे और कई लोगों की जान भी चली जाती थी. जिला स्वास्थ्य विभाग की लगातार मेहनत और जागरुकता अभियानों से स्थिति में काफी सुधार हुआ है. वर्ष 2016 में 5275 मामले दर्ज किए गए थे, जो घटकर 2024 में 978 रह गये. हालांकि वर्ष 2025 में फिर 1828 मामले 146 गांवों से सामने आये. विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशक छिड़काव और मच्छरदानी वितरण जैसे उपाय लगातार किए जा रहे हैं. वर्ष 2026 में 15 अप्रैल तक 67 गांवों में 58 नये मामले मिले हैं. यह दर्शाता है कि पहाड़िया और दूरदराज के इलाकों में बीमारी पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी है. मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में ठंड के साथ बुखार, उल्टी, शरीर दर्द, सिर चक्कर और पसीने के साथ बुखार उतरना शामिल हैं. स्वास्थ्य विभाग इन क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है.

बोरियो में तीन साल बाद आये 22 मामले

बोरियो प्रखंड क्षेत्र के देवपहाड़, दुले समेत तीन गांव में तीन वर्षों तक मलेरिया के मामले नहीं आये. इस बार 22 मरीज मिले हैं. लोग जागरूक होने कारण अब अपने को साफ सुथरा रहते हैं. घर मुहल्ले की साफ रखते हैं. साल में दो बार छिड़काव किया जाता है.

क्या कहते हैं सीएस

जिले को मलेरियामुक्त जिला बनाना है. इसके लिए क्षेत्र में जागरुकता फैलाना है. लोगों को बताना है कि लोग नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करें, पानी जमने न दें. मलेरिया होने पर सरकारी अस्पताल में इलाज करायें, मलेरिया की दवा सरकारी अस्पताल में मुफ्त उपलब्ध है.

डॉ रामदेव पासवान, सीएस, साहिबगंज

क्या कहते हैं सलाहकार मलेरिया नियंत्रण

मलेरिया से बचने के लिए मच्छरों के प्रजनन पर नियंत्रण करना आवश्यक है. मलेरिया फैलाने वाले मच्छर ज्यादातर जमे हुए पानी जैसा पानी जैसे गड्ढे छत पर बनी हुई टंकी, फूलदान, मच्छरों के प्रजनन को कम करने के लिए उनके पनपने वाले स्थानों को नष्ट करने की कोशिश करनी चाहिए, उस पानी में कीटनाशक डाले या जला हुआ मोबिल अथवा कैरोसिन तेल डालें. ताकि मच्छर उस पानी में अंडे न दे सकें.

डॉ सती बाबू डाबड़ा, सलाहकार, मलेरिया नियंत्रण

सीएचसी – गांव – कुल जनसंख्या – कुल जांच- मलेरिया पॉजिटिव

बरहेट – 24- 185885- 1438- 03

बरहरवा – 24- 220913- 1979- 00

बोरियो – 18- 133306- 710- 39

मंडरो – 13- 101125- 623- 09

पतना – 17- 123394- 1687- 00

राजमहल – 18- 267714- 1195- 00

साहिबगंज – 08- 193937- 725- 00

तालझारी – 11- 124630- 551- 02

उधवा – 13- 255031- 302- 01

साहिबगंज शहरी – 28 वार्ड -00- 184- 04

कुल – 146- 102375- 23250- 58

2024 आये मामले – 2025 आये मामले – 2026 आये मामले

सीएचसी- संख्या- – सीएचसी- संख्या- सीएचसी- संख्या

बरहेट- 317- बरहेट- 276 बरहेट – 02

बरहरवा- 03- बरहरवा – 12 बरहरवा- 00

बोरियो – 229- बोरियो – 717- बोरियो – 39

मंडरो- 310- मंडरो – 715- मंडरो- 09

पतना – 03- पतना – 12- पतना – 00

राजमहल- 12- राजमहल – 10 राजमहल- 00

साहिबगंज- 02- साहिबगंज -02 – साहिबगंज -00

तालझारी – 03- तालझारी – 16 तालझारी – 02

उधवा – 03- उधवा- 11- उधवा- 01

सदर शहरी- 96- सदर शहरी – 57- सदर शहरी – 04

कुल – 978- कुल- 1828- कुल- 58

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