शेरशाहबादी समुदाय को देना होगा जाति प्रमाण पत्र

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शेरशाहबादी समुदाय को देना होगा जाति प्रमाण पत्र

प्रखंड सह अंचल मुख्यालय बरहरवा में समर्थकों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू

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बरहरवा

शेरशाहबादी डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शेरशाहबादी समुदाय को जाति प्रमाण पत्र निर्गत कराने की मांग को लेकर सोमवार को समुदाय के सैकड़ों लोगों द्वारा प्रखंड सह अंचल कार्यालय बरहरवा के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया. इस दौरान हाथों में तख्तियां लिये लोगों ने धरना स्थल पर इंकलाब जिंदाबाद, शेरशाहबादी समुदाय को जाति प्रमाण पत्र देना होगा, जिला प्रशासन होश में आओ आदि नारे लगाकर जिला प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की. इस दौरान धरना पर बैठे लोगों ने सरकार से बरहरवा प्रखंड क्षेत्र के शेरशाहबादी समुदाय के लोगों को जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने की मांग की. सोसाइटी के मो इश्तियाक, मो अजमाइल, सफीकुल इस्लाम, शकील अहमद आदि ने कहा कि शेरशाहबादी समुदाय सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ी हुई है. 2014 से पूर्व समुदाय के लोगों को अंचल द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत जाति प्रमाण पत्र निर्गत किये जाते थे. जिससे उन्हें शिक्षा, रोजगार एवं सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता था. लेकिन, अंचल कार्यालय द्वारा 2014 के बाद से शेरशाहबादी समुदाय को जाति प्रमाण पत्र निर्गत करना बंद कर दिया गया है. जिसके कारण समुदाय के हजारों युवाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और मजबूरन वे लोग आंदोलन करने पर विवश हैं. मौके पर शाहीन अख्तर, तौफ़ाइल शेख, सोयेब अख्तर, नवाज शरीफ, परवेज आलम, मौसूद आलम, मुस्तफिजुर रहमान सहित अन्य मौजूद थे.

धरने पर बैठे लोगों ने कहा

पहले समुदाय के लोगों को शेरशाहबादी जाति प्रमाण पत्र दिया जाता था. बरहरवा प्रखंड के एक दो पंचायतों को छोड़कर बाकी के सभी पंचायतों में शेरशाहबादी समुदाय के लोग निवास करते हैं. इसीलिये हमलोग चाहते है कि इसे पुनः चालू किया जाये.

सफीकुल इस्लाम

2002 से 2012 तक लगातार यहां के नौजवानों को शेरशाहबादी जाति प्रमाण पत्र मिलता था. 2012 के बाद बिना किसी सरकारी आदेश कैसे बंद कर दिया गया है, जबकि झारखंड सरकार के गजट में आज भी शेरशाहबादी नोटिफाइड है. बरहरवा प्रखंड में शेरशाहबादी समुदाय के करीब 50,000 लोग रहते हैं.

मोहम्मद इस्तियाक

शेरशाहबादी समुदाय के लोगों के खतियान में शेख लिखा हुआ है, लेकिन जब खतियान नोटिफाइड हुआ था, उस समय कहा गया था कि शेरशाहबादी समुदाय एक्सेप्टेड शेख हैं न की ओरिजिनल में शेख है. इस आधार पर 1996 से समुदाय के लोगों को जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया जाता था.

मोहमद अजमाइल

शेरशाहबादी समुदाय की भाषा-संस्कृति और रहन सहन भिन्न है. इस कारण समुदाय के लोगों को अविभाजित बिहार से ही अलग जाति प्रमाण पत्र दिया जाता था. लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इसे बंद कर दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी धरना जारी रहेगा.

शकील अहमद

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Abdhesh Singh

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