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झारखंड की इस विधानसभा सीट पर आज तक बीजेपी नहीं खोल पाई खाता, 1990 से लगातार JMM ने लहराई विजय पताका

Updated at : 12 Nov 2024 1:02 PM (IST)
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hemant soren and hemlal murmu

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Barhait Vidhan Sabha: बरहेट विधानसभा सीट 1990 से अब तक झामुमो का अभेद्य किला रहा है. बीजेपी को हर बार बरहेट में नाकामी ही हाथ लगी है. हेमंत सोरेन के इस सीट से चुनाव लड़ने की वजह से इसे हॉट सीट माना जा रहा है.

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Barhait Vidhan Sabha : बरहेट विधानसभा पिछले तीन दशकों से झामुमो का अभेद किला है. यहां से कांग्रेस दो बार तो झामुमो सात टर्म से लगातार जीत रहा है. यहां से वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिछले दो टर्म से विधायक निर्वाचित हो रहे हैं. तीसरी बार भी वे चुनावी मैदान हैट्रिक की तैयारी में हैं. यहां भाजपा आज तक अपना खाता भी नहीं खोल पायी है.

बरहेट विधानसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए है आरक्षित

बरहेट विधानसभा राजमहल लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत आता है. यह सीट एसटी के लिए आरक्षित है. चारों ओर पहाड़ों से घिरे बरहेट विधानसभा क्षेत्र में साहिबगंज जिले के पतना व बरहेट प्रखंड का पूरा क्षेत्र व गोड्डा जिले का सुंदरपहाड़ी व बोआरीजोर प्रखंड क्षेत्र का कुछ भाग शामिल है. इस विधानसभा में कुल मतदाता 2,25,279 है. देश की आजादी के 10 वर्ष बाद 1957 में राजमहल दामिनी विधानसभा क्षेत्र से बरहेट विधानसभा को अलग किया गया. 1952 में यहां के विधायक जेठा किस्कू थे. बरहेट विधानसभा क्षेत्र अलग होने के बाद प्रथम बार 1957 में झारखंड पार्टी से चुनाव लड़े बाबूलाल टुडू ने जीत हासिल की, और वे लगातार दो बार बरहेट विधानसभा के विधायक रहे.

बरहेट से विधानसभा चुनाव जीतने वाले विधायक

झामुमो से ही हेमलाल ने लगाई थी जीत की हैट्रिक

पूर्व मंत्री सह 2024 के लिट्टीपाड़ा विधानसभा से झामुमो प्रत्याशी हेमलाल मुर्मू के नाम बरहेट विधानसभा क्षेत्र में सबसे लंबे समय तक विधायक बनने का रिकॉर्ड है. मुर्मू चार टर्म बरहेट के विधायक बने. संयुक्त बिहार में 1990 में हेमलाल मुर्मू झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी से टिकट लेकर बरहेट विधानसभा सीट के लिये चुनाव लड़े और सीट अपने नाम किया. उसके बाद 1995 तथा 2000 में भी हेमलाल मुर्मू ने बरहेट सीट पर अपनी दबदबा कायम रखते हुए लगातार 15 वर्षों तक प्रतिनिधित्व किया.

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हेमलाल का टिकट काट कर थॉमस सोरेन को दिया टिकट

वर्ष 2005 में झामुमो ने अपने सीटिंग विधायक हेमलाल मुर्मू का टिकट काटकर थॉमस सोरेन को टिकट दिया. थॉमस सोरेन ने भी बरहेट विधानसभा में जीत दर्ज कर यह सीट झामुमो के नाम कर क्रम को आगे बढ़ाया. पुनः हेमलाल मुर्मू 2009 में झामुमो की ही टिकट पर चुनाव लड़कर चौथी बार बरहेट के विधायक बने और लगातार पांचवीं बार झामुमो की झोली में बरहेट सीट को डालकर इसे झामुमो का अभेद्य किला बना दिया.

2014 में हेमंत सोरेन ने बरहेट से दर्ज की जीत

2014 में हेमंत सोरेन खुद बरहेट सीट से चुनावी मैदान में उतरे और चार बार के विधायक रहे हेमलाल मुर्मू को 24,087 वोट से हराकर बरहेट का सीट अपने नाम किया और झामुमो की अजेय रथ को आगे बढ़ाया. पुनः हेमंत सोरेन 2019 में बरहेट से विजयी रहे. इस विधानसभा से सांसद विजय हांसदा के पिता थॉमस हांसदा कांग्रेस की टिकट पर लगातार दो टर्म जीते हैं. कांग्रेस पार्टी से टिकट मिलने के बाद थॉमस हांसदा ने 1980 व 1985 में लगातार दो टर्म जीत दर्ज की.

हेमंत सोरेन के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए कुछ हुए तैयार तो कुछ ने कर लिया किनारा

बरहेट विधानसभा से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बार तीसरी बार चुनावी मैदान में हैं. उनके खिलाफ कुछ लोगों ने चुनाव लड़ने से पूर्व ही किनारा कर लिया है. एक प्रमुख पार्टी के नेता पहले तो बरहेट विधानसभा चुनाव लड़ने की बात करते थे, लेकिन हाल के दिनों में हुए लोकसभा चुनाव में बरहेट विधानसभा का नतीजा देखकर उन्होंने अपना पैर पीछे खींच लिया. दबी जुबान से ही सही लोग कहने लगे कि यहां से बेहतर है, मुझे पार्टी अगल-बगल के विधानसभा क्षेत्र में मौका देती, तो चुनाव लड़ लेता. लेकिन बरहेट में मेहनत करके कोई फायदा नहीं है.

हेमंत सोरेन के बरहेट से लड़ने के बाद बन गई हॉट सीट

बरहेट राज्य का हॉट सीट है, जहां राज्य की ही नहीं देश की निगाहें हैं क्योंकि राज्य के मुख्यमंत्री यहां से चुनावी मैदान में हैं. अब उनके सामने इस बार प्रमुख विपक्षी भाजपा ने गमालियल हेम्ब्रम के ऊपर विश्वास जताया है. उनके चुनावी मैदान में आने से कार्यकर्ताओं में काफी जोश है. वे लोग भी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. ऐसे तो चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशी अपनी जीत का दावा करते हैं, लेकिन हार-जीत का फैसला तो जनता को देना है, जो 23 नवंबर को पता चलेगा.

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Kunal Kishore

लेखक के बारे में

By Kunal Kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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