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प्रवचन ::परिव्राजक को अपनेे जीवन में कुछ परिवर्तन लाना आवश्यकअपने परिव्रजन काल में संन्यासी अनेक लोगों से मिलता तथा उनकी सहायता करता है. वह उनकी आवश्यकताओं तथा इच्छाओं को समझता है तथा उनके जीवन को ध्यान और अध्यात्म की दिशा देता है. अनेक संन्यासियों की मात्र उपस्थिति ही इतनी शक्तिशाली होती है कि उनके संपर्क में आने वाले लोग ध्यान तथा उच्च चेतना में पहुंचने लगते हैं. वर्तमान युग में यात्रा के साधनों का अभूतपूर्व विकास हुआ है. सामाजिक जीवन विनष्ट हो गया है. अतएव परिव्राजक को अपनेे जीवन में कुछ परिवर्तन तथा समायोजन लाना आवश्यक है. कुछ संन्यासी आश्रम बनाकर अपने जिले, प्रदेश अथवा देश में घूम-घूम कर प्रवचन देते, ध्यान की कक्षाएं लेते तथा प्रशिक्षण सत्रों का सचालन करते हैं. जहां भी लोग उन्हें बुलाते हैं, वे पहुंचते हैं और इस प्रकार देश के कोने-कोने में यात्राएं करते रहते हैं. वर्तमान युग में संन्यासियों के समय की सदुपयोगिता के लिए रेल, कार, वायुयान तथा स्टेशन बैगनों का जिसमें वे भोजन तथा विश्राम कर सके, उपयोग अनिवार्य-सा हो गया है. इस प्रकार आधुनिक दक्ष साधनों के कारण ध्यान का विज्ञान समुद्र पार के देशों में घर-घर जल्दी ही पहुंच रहा है.हे भिक्षु, जन-कल्याण के लिए, लोगों के सुख के लिए तथा विश्व के प्रति करुणा के लिए, ईश्वर तथा भिक्षुओं के सुख एवं भलाई के लिए बाहर निकलो… किसी भी मार्ग से दो भिक्षु एक साथ्ज्ञ न जाये. -महात्मा बुद्ध
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