ओके... भोजपुरी साहित्य के साहित्यकार-नाट्यकार चौधरी कन्हैया के निधन पर शोक

साहिबगंज . भोजपुरी साहित्य के प्रसिद्ध विद्वान व बिहार के राज्य कृषि सेवा के अधिकारी चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह का निधन ब्रेन हेमरेज से आरा में हो गया. श्री सिंह के निधन से साहित्य प्रेमियों में विशेष कर भोजपुरी भाषा-भाषियों में शोक की लहर है. दो जनवरी 1941 में नोनार, भोजपुर में इनका जन्म हुआ […]
साहिबगंज . भोजपुरी साहित्य के प्रसिद्ध विद्वान व बिहार के राज्य कृषि सेवा के अधिकारी चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह का निधन ब्रेन हेमरेज से आरा में हो गया. श्री सिंह के निधन से साहित्य प्रेमियों में विशेष कर भोजपुरी भाषा-भाषियों में शोक की लहर है. दो जनवरी 1941 में नोनार, भोजपुर में इनका जन्म हुआ था.श्री चौधरी के निधन पर एक शोक सभा का आयोजन साहित्यकार परिषद द्वारा गुरुवार को किया गया. शोकसभा की अध्यक्षता करते हुए रामजन्म मिश्रा ने कहा कि श्री चौधरी भोजपुरी नाट्य साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर थे. विश्वासघात नाटक 2008, अपराजिता एकांकी संग्रह 2009 की चर्चा करते हुए डॉ मिश्र ने कहा कि चौधरी की रचना के केंद्र में समाज का अंतिम व्यक्ति होता है. सच्चिदानंद ने श्री चौधरी की सभी प्रकाशित पुस्तकों पर प्रकाश डालते हुए भोजपुरी का प्रमुख स्तंभ बताया. इनके निधन से भोजपुरी साहित्य को अपूरणीय क्षति हुई है. इनकी प्रकाशित कृतियों में माटी की महक, नया एगो सूरज, बड़प्पन, सही मंजिल सहित दर्जनों कहानी है. हरे राम ओझा ने कहा कि भोजपुरी साहित्य दर्पण कोष तीन भाग में प्रकाशित कर श्री चौधरी ने ऐतिहासिक कार्य किया है. इनमें भोजपुरी के सभी जीवित मित्र रचनाकारों का परिचय एक जगह संग्रहित कर शोधार्थियों का कार्य सरल कर दिया. मौके पर अनिरुद्ध प्रभाष, राजेंद्र प्रसाद ठाकुर, रामलाल परिहार, गंगा प्रसाद राय, संजय पांडे, विमल मुर्मू, स्नेह शंकर, सुधा आनंद मुख्य रूप से उपस्थित थे.
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