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World Youth Skill Day: हुनरमंद बन रहे झारखंड के युवा, विभिन्न क्षेत्रों में बनाया अपना भविष्य

Updated at : 15 Jul 2023 10:31 AM (IST)
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World Youth Skill Day: हुनरमंद बन रहे झारखंड के युवा, विभिन्न क्षेत्रों में बनाया अपना भविष्य

राजधानी में भी युवाओं को हुनरमंद बनाने की कोशिश की जा रही है. युवा मुश्किलों का सामना कर बेहतर भविष्य गढ़ने में जुटे हुए हैं. रोजगार हासिल कर रहे हैं.

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World Youth Skill Day: आज विश्व युवा कौशल दिवस है. थीम है परिवर्तनकारी भविष्य के लिए शिक्षकों, प्रशिक्षकों और युवाओं को कुशल बनाना. युवाओं को हुनरबाज बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 जून 2015 से विश्व युवा कौशल दिवस मनाने की घोषणा की. इसके बाद से युवाओं को स्किल डेवलपमेंट यानी प्रशिक्षण से हुनरमंद बनाने की कोशिश की जा रही है. राजधानी में भी युवाओं को हुनरमंद बनाने की कोशिश की जा रही है. युवा मुश्किलों का सामना कर बेहतर भविष्य गढ़ने में जुटे हुए हैं. रोजगार हासिल कर रहे हैं.

सिलाई को बनाया हुनर का माध्यम

रांची की जसमती कुमारी के पिता निजी संस्थान में काम करते हैं. बड़ी मुश्किल से परिवार का खर्च उठा पता थे. इस कारण मैट्रिक की पढ़ाई के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी. फिर भी परिवार की मदद के लिए नौकरी प्राथमिकता में शामिल रही. जसमती ने बताया कि अधूरी शिक्षा से नौकरी भी नहीं मिल रही थी. इसी बीच कौशल विकास सोसाइटी की प्रचार गाड़ी पर नजर पड़ी और दिनदयान उपाध्याय कौशल योजना की जानकारी मिली. केंद्र पहुंचने पर काउंसेलर ने बताया कि सिलाई मशीन का काम सीख कैसे अच्छा रोजगार हासिल कर सकती हू्ं. ट्रेनिंग के दौरान सिलाई मशीन ऑपरेटर का काम सीखा. साथ ही सिलाई से जुड़ी कई अन्य काम लगातार सीखती रही. आखिरकार अपने हुनर से कपड़ा मिल में नौकरी मिल गयी.

ऑटोमोबाइल में पहचान बना रहे हैं गुड्डू लाल

बोकारो के गुड्डू लाल महतो के सिर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया था. परिवार में मां और बड़े भाई हैं. घर की आर्थिक स्थिति खराब थी. आर्थिक तंगी के कारण इंटर की पढ़ाई में परेशानी हो रही थी. इस स्थिति में गुड्डू ने एक मोटर गैरेज में महज 120 रुपये प्रतिदिन की दैनिक मजदूरी पर काम शुरू किया. खुद के पैसे से किसी तरह इंटर की पढ़ाई पूरी की. इसी बीच झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी के अंतर्गत जीआइएस फाउंडेशन के बारे में पता चला. गुड्डू ने बताया कि मैं पहले से दोपहिया और चार पहिया वाहनों का काम जानता था. इसलिए ऑटोमोबाइल सर्विस टेक्नीशियन के प्रशिक्षण से जुड़ गया. चार माह तक प्रशिक्षण हासिल किया. 2019 में प्लेसमेंट ड्राइव के जरिये गुड़गांव स्थित मारुति सुजुकी में बतौर ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग डिप्लोमा ट्रेनी के पद पर नौकरी मिल गयी.

गैरेज में काम कर इंटर की पढ़ाई पूरी की

झलपो गांव निवासी शहबाज परिवार की दयनीय स्थिति के कारण पढ़ नहीं सके. गैरेज में 250 रुपये प्रतिदिन की हाजिरी पर काम करते हुए इंटर की पढ़ाई पूरी की. शुरुआत से ही सपना कंप्यूटर साइंस में करियर बनाने का था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इसकी इजाजत नहीं दे सकी. इंटर में अच्छे अंक होने के बावजूद बेहतर संस्थान में एडमिशन नहीं ले सका. इसी बीच दोस्तों ने जेआइटीएम स्किल्स की ओर से विभिन्न स्किल कोर्स की जानकारी दी. यहां फील्ड टेक्नीशियन कंप्यूटिंग पेरिफेरल कोर्स से जुड़ गया़ अक्तूबर 2019 से फरवरी 2020 तक प्रशिक्षण हासिल किया. आज इसी केंद्र में एमआइएस एग्जीक्यूटिव पद पर कार्यरत हूं.

रूम अटेंडेंट की ट्रेनिंग ले गढ़ रही भविष्य

फूलो लकड़ा किसान परिवार की बेटी हैं. उन्होंने कहा : परिवार के लिए खेती-किसानी ही एक मात्र रोजगार विकल्प है. आगे की पढ़ाई जारी रखने में परेशानी हो रही थी़ इसी बीच कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्किल डेवलपमेंट सेंटर की जानकारी मिली. संस्था से संपर्क करने पर पता चला कि दीनदयाल उपाध्याय कौशल योजना के तहत नि:शुल्क प्रशिक्षण मिलेगा. परिवार से योजना साझा की तो सभी ने अनुमति दे दी. काउंसेलिंग के जरिये होटल मैनेजमेंट कोर्स को अपनाया. अगले तीन महीने तक रूम अटेंडेंट की ट्रेनिंग हासिल की. प्रशिक्षकों ने कम्युनिकेशन स्किल और पर्सनालिटी ग्रूमिंग में विशेष बल दिया. यहीं मेरे प्लेसमेंट की यूएसपी बनी. प्लेसमेंट प्रक्रिया के जरिये रेडिशन ब्लू बेंगलुरु में नौकरी हासिल करने में सफल रही.

कौशल कॉलेज बन रहा उदाहरण

युवाओं को कुशल बनाने के लिए कल्याण विभाग और पैन आइआइटी एलुमिनी रीच फॉर झारखंड फाउंडेशन (प्रेझा फाउंडेशन) नगड़ा टोली में कौशल कॉलेज चला रहे हैं. यहां राज्यभर के एसटी-एसटी, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग की छात्राओं को आइटीआइ मैन्यूफैक्चरिंग और कुलिनरी कोर्स से जोड़ा जा रहा है. वर्तमान में 180 छात्राएं इंजीनियरिंग ड्राइंग, फिटिंग, सीएनसी-एडवांस फैब्रिकेशन, वेल्डथ्ंग, थ्री-डी प्रोटोटाइपिंग व ऑटो कैड, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस फैब्रिकेशन का प्रशिक्षण ले रही हैं. सैकड़ों छात्राओं का प्लेसमेंट हो चुका है.

राज्य में 298827 को मिली ट्रेनिंग, 116999 को रोजगार

श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी का संचालन कर रहा है. सोसाइटी राज्यभर के लोगों को मुख्यमंत्री सारथी योजना से जोड़ रही है. अब तक 483417 लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के तहत 298827 अभ्यर्थियों को उनकी रुचि अनुसार प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें 116999 अभ्यर्थी देशभर में रोजगार से जुड़े हैं.

बिरसा योजना के तहत मिलेगा परिवहन भत्ता

आज राज्य सरकार मुख्यमंत्री सारथी योजना के अंतर्गत बिरसा की शुरुआत करेगी. सामान्य वर्ग के 18 से 35 आयुवर्ग और 50 वर्ष तक के एससी-एसटी व ओबीसी को कौशल प्रशिक्षण मिलेगा. योजना से जुड़नेवाले अभ्यर्थी को प्रतिमाह 1000 रुपये परिवहन भत्ता मिलेगा.

झारखंड में चलाये जा रहे आठ नर्सिंग कौशल कॉलेज

राज्य में आठ नर्सिंग कॉलेज चलाये जा रहे हैं. रांची जिला में इटकी और चान्हो में केंद्र का संचालन हो रहा है. साथ ही गुमला, पश्चिम सिंहभूम, सराकेला-खरसावां, जामताड़ा, लातेहार और साहेबगंज में कॉलेज संचालित हो रहे हैं. इन संस्थानों मेें 960 सीटें हैं, जहां दो वर्षीय नर्सिंग कोर्स चलते हैं.

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