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संगीत की भाषा, हर दिल की आवाज

Updated at : 21 Jun 2025 12:09 AM (IST)
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संगीत की भाषा, हर दिल की आवाज

आज विश्व संगीत दिवस है. यह हर साल 21 जून को मनाया जाता है.

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रांची. आज विश्व संगीत दिवस है. यह हर साल 21 जून को मनाया जाता है. इसकी शुरुआत 1982 में फ्रांस से हुई थी. इसका उद्देश्य संगीत को सभी के लिए सुलभ बनाना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है. इस वर्ष का थीम हीलिंग थ्रु हार्मोनी है, जो बताता है कि संगीत न केवल भावनाओं को शांत करता है बल्कि तनाव को भी कम करता है और समुदायों को वैश्विक स्तर पर जोड़ने का कार्य करता है. विश्व संगीत दिवस को फेते डे ला म्यूजिक, मेक म्यूजिक डे या म्यूजिक डे के नाम से भी जाना जाता है. फेते डे ला म्यूजिक का शाब्दिक अर्थ है सद्भाव के माध्यम से उपचार. यह न केवल मानसिक तनाव को दूर करता है, बल्कि सामाजिक एकता को भी मजबूत बनाता है. कुछ विद्वानों का मानना है कि संगीत का जन्म प्रकृति से हुआ है. उदाहरण स्वरूप मोर से षडज, चातक से ऋषभ, बकरा से गंधार, कौवे से मध्यम, कोयल से पंचम, मेंढक से धैवत और हाथी से निषाद स्वर की उत्पत्ति मानी जाती है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सार्वभौमिक भाषा और उपचार का माध्यम भी है.

एक कंपलीट ऑर्केस्ट्रा है पियानो

संगीत का अद्भुत वाद्य यंत्र पियानो संगीत की दुनिया में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इसके कीबोर्ड में 88 चाबियां होती हैं. यह एक विदेशी वाद्य यंत्र है लेकिन बॉलीवुड के संगीत में भी इसका व्यापक प्रयोग हुआ है. अलग-अलग चाबियों से विभिन्न सुर निकलते हैं. पियानो को मदर ऑफ ऑल इंस्ट्रूमेंट कहा जाता है. यह वाद्य यंत्रों का राजा होता है. इसकी धुन मन को शांति देती है. रांची के बाजारों में 40,000 रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक के पियानो उपलब्ध हैं. घोष म्यूजिक एंड म्यूजिक वर्ल्ड के संचालक अचिंता कोष बताते हैं कि पियानो करोड़ों रुपये तक के भी होते हैं.

जशवंत बारला : कीबोर्ड प्लेयर

जीएच चर्च में 100 साल पुराना पियानो आज भी देखा जा सकता है, जो जर्मनी से आया था. इसे 75 वर्षीय रांची निवासी कीबोर्ड प्लेयर जशवंत बारला बजा रहे हैं. वे पिछले 50 वर्षों से वाद्य यंत्रों से जुड़े हैं. संगीत उन्हें घर से ही विरासत में मिला. उनके पिता अकॉर्डियन बजाते थे, जिसे वे जर्मनी से लेकर आये थे. आज भी वह ऑर्केडियम उनके घर पर मौजूद है, जिसे गले में टांग कर बजाया जाता था. राज कपूर ने भी इस वाद्य यंत्र को फिल्म संगम में बजाया है. बारला बताते हैं कि पियानो हारमोनियम से विकसित हुआ है, जिसमें सादे और काले की होते हैं. हारमोनियम, कीबोर्ड, पियानो, ऑर्गन, सिंथेसाइजर जैसे वाद्य यंत्र हवा से बजते हैं और सात सुर निकालते हैं. पियानो की धुन बहुत ही अलौकिक होती है. जो इसे सीखते हैं, वे इस क्षेत्र में काफी आगे बढ़ सकते हैं और सेलिब्रिटी बन सकते हैं.

नीरज कच्छप : पियानिस्ट

लॉकडाउन के पूर्व रांची के धुर्वा निवासी पियानिस्ट नीरज कच्छप दिल्ली स्कूल ऑफ म्यूजिक से प्रशिक्षण लेकर रांची लौटे. उन्होंने यहां पियानो के प्रति लोगों को जागरूक किया. आज बड़ी संख्या में बच्चे और वयस्क उनसे पियानो सीख रहे हैं. वे पियानो का होम ट्यूशन लेते हैं और जिमखाना क्लब में पियानो प्ले करते हैं.उनका कहना है कि पियानो एक कंपलीट ऑर्केस्ट्रा है. इसे अकेले बजाया जा सकता है, अन्य किसी वाद्य यंत्र की आवश्यकता नहीं होती. इसकी धुनें कभी खाली नहीं जातीं. पियानो की धुन अन्य वाद्य यंत्रों से अलग होती है और यह मन को शांति प्रदान करती है. संगीत अपने आप में एक थेरेपी है, जो मन को सुकून देती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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