political news : पेसा कानून लागू नहीं कर आदिवासियों को उनके हक व अधिकार से वंचित कर रही सरकार : रघुवर
Updated at : 10 Sep 2025 6:14 PM (IST)
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पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि पेसा नियमावली लागू नहीं करने के पीछे सरकार का अपना निहित स्वार्थ है.
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रांची.
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि भारत का संविधान आदिवासी, दलित, वंचित व शोषित समाज को संवैधानिक अधिकार देता है. लेकिन, संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस-झामुमो की सरकार आज राज्य के आदिवासियों व पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है. भाजपा की सरकार ने राज्य में पेसा कानून लागू करने की दिशा में सार्थक पहल की थी. प्रक्रिया आगे बढ़ी. भाजपा सरकार के बाद हेमंत सरकार ने विभागों से प्राप्त मंतव्य विधि विभाग में भेजा. महाधिवक्ता ने कैबिनेट में ले जाने का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया. लेकिन, मंशा साफ नहीं होने के कारण यह सरकार इसे लटका-भटका रही है. प्रदेश भाजपा कार्यालय में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री दास ने कहा कि पेसा कानून अधिसूचित क्षेत्र की रूढ़िवादी ग्रामसभा को लघु खनिज, बालू, पत्थर के उत्खनन, नीलामी, तालाबों में मछली पालन, केंदू पत्ता आदि के प्रबंधन का अधिकार देता है. यही कारण है कि हाइकोर्ट ने भी इसी भावना के मद्देनजर बालू घाट नीलामी पर निर्देश दिये हैं. उन्होंने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इस रोक को तब तक जारी रखने का आग्रह किया, जब तक राज्य में पेसा कानून लागू नहीं हो जाये. उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली लागू नहीं करने के पीछे सरकार का अपना निहित स्वार्थ है. हेमंत सरकार चाहती है कि राज्य के खनिज संसाधनों बालू व पत्थर को बिचौलिये व दलाल लूटते रहें और मुख्यमंत्री की तिजोरी भरती रहे. राज्य सरकार ने न्यायालय की अवमानना करते हुए बालू से 2000 करोड़ के राजस्व की आय का लक्ष्य निर्धारित कर विज्ञापन निकाला है. इस प्रकार देखा जाये तो पिछले छह वर्षों में राज्य को हजारों करोड़ की लूट का साक्षी बनाया गया है. उन्होंने इसकी सीबीआई जांच कराने की मांग की.एससी-एसटी आयोग का भी गठन नहीं किया
रघुवर दास ने कहा कि कांग्रेस व झामुमो की सरकार आदिवासी समाज को अधिकार नहीं देना चाहती. इस सरकार ने अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग का भी गठन नहीं किया. श्री दास ने कहा कि हेमंत सरकार न गांव का विकास चाहती है और न शहरों का. नगर निकाय चुनाव नहीं कराकर सरकार प्रतिवर्ष 1800 करोड़ के केंद्रीय अनुदान से झारखंड को वंचित रख रही है. जबकि, पेसा नहीं लागू होने के कारण 1400 करोड़ की क्षति हो रही है. उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी धर्म मानने वालों के दबाव में काम कर रही है. यह सरकार तुष्टीकरण में डूबी हुई है. इस सरकार को दलाल व बिचौलियों का सिंडिकेट चला रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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