निलंबन से मुक्त हुए IAS विनय चौबे ने संभाला पदभार, कार्मिक विभाग में दिया योगदान
आईएएस अधिकारी विनय चौबे. फाइल फोटो.
झारखंड सरकार के चर्चित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे निलंबन से मुक्त होने के बाद सरकारी सेवा में लौट आए हैं. उन्होंने कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में औपचारिक रूप से योगदान दिया है. उनकी वापसी ने प्रशासनिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है.
Ranchi News: झारखंड सरकार के चर्चित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे ने निलंबन से मुक्त होने के बाद एक बार फिर सरकारी सेवा में वापसी कर ली है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में उन्होंने गुरुवार को औपचारिक रूप से योगदान दिया. विभागीय सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा निलंबन समाप्त करने का आदेश जारी किए जाने के बाद उन्होंने पदभार ग्रहण किया. विनय चौबे की वापसी को राज्य के प्रशासनिक हलकों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. लंबे समय तक विभिन्न जांच और कानूनी प्रक्रियाओं में उलझे रहने के बाद उनकी सेवा में वापसी ने नौकरशाही के बीच नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है.
जेल से बाहर आने के बाद मिली राहत
विनय कुमार चौबे हाल के दिनों में एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए थे. शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था. निलंबन के दौरान वे विभिन्न मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे. सरकारी आदेश के बाद निलंबन समाप्त होने और विभाग में योगदान देने के साथ ही उनकी प्रशासनिक वापसी का रास्ता साफ हो गया है.
शराब घोटाले में क्या हैं आरोप
विनय चौबे पर आरोप है कि उत्पाद नीति-2022 के तहत मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर काम करने की अनुमति दी गई, जिससे राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इसी मामले में 20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी का आरोप है कि मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनियों के साथ मिलीभगत कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया. हालांकि, इस मामले में समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें एसीबी कोर्ट से डिफॉल्ट बेल मिल चुकी है.
चार मामलों में दर्ज है केस
आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से कुल चार अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें चर्चित हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामला भी शामिल है. इस मामले में उन्हें एक अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी. इसके अलावा, जमीन हस्तांतरण मामले, आय से अधिक संपत्ति मामले और शराब घोटाला मामले में भी अदालत से उन्हें डिफॉल्ट बेल प्राप्त हो चुकी है. उनके खिलाफ जगन्नाथपुर थाना में भी एक मामला दर्ज बताया जाता है. हालांकि इन मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है.
प्रशासनिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
निलंबन समाप्त होने और विभाग में योगदान देने के बाद झारखंड मंत्रालय सहित प्रशासनिक हलकों में हलचल देखी जा रही है. धुर्वा स्थित झारखंड मंत्रालय में इस बात की चर्चा है कि आने वाले दिनों में उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल किसी नई नियुक्ति या विभागीय दायित्व को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि को देखते हुए अटकलों का दौर जारी है.
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कई अहम विभागों की संभाल चुके हैं जिम्मेदारी
1999 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी विनय कुमार चौबे राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं. इसके अलावा जल संसाधन विभाग, योजना-सह-वित्त विभाग तथा आबकारी विभाग जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी भी उनके पास रही है. लंबे प्रशासनिक अनुभव और शीर्ष स्तर पर काम करने के कारण उनकी वापसी को राज्य की नौकरशाही में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार उन्हें भविष्य में कौन सी नई जिम्मेदारी सौंपती है.
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