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समाज और सरकार एक दूसरे के पूरक : मंत्री

Updated at : 31 Jul 2025 12:31 AM (IST)
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समाज और सरकार एक दूसरे के पूरक : मंत्री

64 वर्ष पूर्व स्थापित डोरंडा कॉलेज समाज में शिक्षा का अलख जगाने के अपने उद्देश्य को पूरा कर रहा है.

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रांची. 64 वर्ष पूर्व स्थापित डोरंडा कॉलेज समाज में शिक्षा का अलख जगाने के अपने उद्देश्य को पूरा कर रहा है. यह कॉलेज आज बट वृक्ष तरह बड़ा हो गया है, इसकी छांव में 15 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. उक्त बातें राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कही. वे बुधवार को डोरंडा कॉलेज के 64वें स्थापना दिवस समारोह में बोल रहे थे. मंत्री ने कहा कि वे कभी इस कॉलेज के बारे में नहीं जानते थे. आने से पूर्व कॉलेज के बारे में जानकारी इकट्ठा की. कैंपस में आने के बाद सुखद अनुभूति इस बात की हुई कि समाज और सरकार कहीं न कहीं एक दूसरे के पूरक होते हैं. सारे काम सरकार ही नहीं कर सकती हैं. विकास के लिए सबों का साथ जरूरी होता है. 64 वर्ष पूर्व डोरंडा कॉलेज का सपना देखने वाले तमाम शिक्षा प्रेमियों को मैं नमन करता हूं. उम्मीद है कि यह कॉलेज और ऊंचाइयों पर जायेगा. रांची विवि के प्रभारी कुलपति प्रो डीके सिंह ने कहा कि सभी कॉलेज अपने यहां लेब्रोटरी, लाइब्रेरी को बेहतर बनायें. अप टू डेट रखें, ताकि विद्यार्थी आधुनिक युग में अपने को तैयार कर सकें. वहीं प्राचार्य डॉ राजकुमार शर्मा ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कॉलेज अपने स्थापना काल से निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है. वे यहां लगभग डेढ़ वर्षों से कार्य कर रहे हैं. विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है. कॉलेज में चल रहे वोकेशनल और जनरल कोर्सेज में प्लेसमेंट भी हो रहे हैं. कार्यक्रम में डॉ युगेश कुमार महतो की पुस्तक नागपुरी व्याकरण का विमोचन भी किया गया. मंच संचालन डॉ मंजू लाल और डॉ अरविंद कुमार ने संयुक्त रूप से किया. धन्यवाद ज्ञापन प्रो कंचन मुंडा ने किया.

शिक्षक व कर्मचारी हुए सम्मानित

इस अवसर पर 20 सेवानिवृत्त व कार्यरत शिक्षक व कर्मचारी सम्मानित किये गये. सम्मानित होनेवाले शिक्षकों में डॉ वीएस तिवारी, डॉ हरमिंदर वीर सिंह, डॉ जीएस श्रीवास्तव, डॉ शकील अहमद, डॉ रजनी टोप्पो, डॉ जेबा परवीन, डॉ सुमन आदि शामिल थे.

सांस्कृतिक कार्यक्रम का हुआ

आयोजन कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये. इनमें गणेश वंदना, नृत्य, कृष्ण लीला, कविता पाठ, दुर्गा स्तुति, शिव तांडव नृत्य, आदिवासी नृत्य, ग्रुप डांस सहित नुक्कड़ नाटक आदि शामिल थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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