अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर संगोष्ठी

Author Jitendra
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अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर संगोष्ठी

अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर जशपुरिया सभागार बीसा में संगोष्ठी हुई.

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प्रतिनिधि, अनगड़ा.

अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर जशपुरिया सभागार बीसा में संगोष्ठी हुई. मुख्य वक्ता भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रो यदुनाथ पांडेय ने कहा कि इतिहास के पन्नों में कुछ नाम ऐसे दर्ज हो जाते हैं, जो समय की सीमाओं को लांघकर अमरत्व पा लेते हैं. अहिल्याबाई होल्कर उन्हीं में से एक हैं. अहिल्याबाई निष्पक्ष व त्वरित न्याय के लिए प्रसिद्ध थीं. एक सामान्य परिवार से निकल कर मालवा की महारानी बननेवाली अहिल्याबाई न केवल एक कुशल प्रशासिका थीं, बल्कि उस दौर में वह नारी सशक्तीकरण की मिसाल बनीं. उनके शासनकाल में धर्म, न्याय और लोककल्याण का अद्भुत संगम देखने को मिला. अपने राज्य व सीमाओं से बाहर उनके द्वारा बनवाये व जीर्णोद्धार कराये गये मंदिर, धर्मशालाएं, कुएं, घाट और पुल आज भी उनके सेवा भाव व दूरदर्शिता की गवाही देते हैं. उनके इन्हीं धर्म-कर्म ने उन्हें ””लोकमाता”” बना दिया. अहिल्याबाई को भारतीय इतिहास की सबसे अनूठे महिला शासकों में से एक माना जाता है. मालवा साम्राज्य की शासक के रूप में उन्होंने विदेशी आक्रांताओं द्वारा नष्ट किये गये मंदिरों का पुनर्निमाण कर धर्म का संदेश पूरे देश में दिया. अध्यक्षता जैलेंद्र कुमार ने की. मौके पर डॉ अनिल कुमार मिश्रा, रामसाय मुंडा, प्रभुदयाल बड़ाइक, सोहराय बेदिया, संजय नायक, पंचम भोगता सहित अन्य उपस्थित थे.

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