झारखंड में मैट्रिक के बाद 41 प्रतिशत विद्यार्थी छोड़ देते हैं सरकारी स्कूल, चुनते हैं दूसरा विकल्प

Updated at : 10 Sep 2022 7:21 AM (IST)
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झारखंड में मैट्रिक के बाद 41 प्रतिशत विद्यार्थी छोड़ देते हैं सरकारी स्कूल, चुनते हैं दूसरा विकल्प

झारखंड के सरकारी स्कूलों के बच्चे 10वीं के बाद 11वीं में नामंकन नहीं लेते. जबकि राज्य गठन के बाद 451 नये प्लस टू स्कूल खोले गये हैं. इसके अलावा 125 और हाइस्कूल को प्लस टू विद्यालय में अपग्रेड किया गया है

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रांची : झारखंड के सरकारी विद्यालयों से मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा पास करनेवाले 41.4 % विद्यार्थी 11वीं कक्षा में सरकारी स्कूलों में नामांकन नहीं लेते हैं. यह खुलासा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने वर्ष 2021-22 की तैयार रिपोर्ट में किया है. इसके अनुसार कक्षा 10वीं से 11वीं में नामांकन दर मात्र 58.6 % है. 41.4 % बच्चों ने फिर से सरकारी स्कूलों में नामांकन नहीं लिया. इन विद्यार्थियों ने 12वीं की पढ़ाई सरकारी विद्यालयों से नहीं की.

एक ओर 10वीं के बाद 11वीं में लगभग आधे बच्चे सरकारी स्कूल छोड़ दे रहे हैं, वहीं राज्य गठन के बाद पिछले 22 वर्षों में 451 नये प्लस टू स्कूल खोले गये हैं. राज्य गठन के समय झारखंड में मात्र 59 प्लस टू स्कूल थे, आज इनकी संख्या बढ़कर 510 हो गयी है. इसके अलावा 125 और हाइस्कूल को प्लस टू विद्यालय में अपग्रेड किया गया है. इन विद्यालयों में भी 11वीं की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है.

राज्य में चार स्तर पर इंटर की पढ़ाई :

राज्य में वर्तमान में इंटर की पढ़ाई चार स्तर पर हो रही है. अंगीभूत कॉलेज, डिग्री संबद्ध कॉलेज, इंटर कॉलेज और प्लस टू विद्यालय. इनमें से केवल प्लस टू स्कूल का संचालन शिक्षा विभाग करता है. राज्य में यूजीसी के निर्देश के बाद भी अंगीभूत व डिग्री कॉलेजों से इंटर की पढ़ाई बंद नहीं हुई. इसे लेकर झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भी भेजा था. इसके बाद भी अंगीभूत कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई बंद नहीं हुई. इस मामले को लेकर झारखंड हाइकोर्ट में याचिका भी दाखिल की गयी थी.

कक्षा एक से 12वीं तक की नामांकन दर मात्र 26 % :

रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा एक से 12वीं तक की नामांकन दर मात्र 26% है. राज्य में सबसे अधिक नामांकन दर कोडरमा जिले की है. कोडरमा की कक्षा एक से 12वीं तक की नामांकन दर 57% है. वहीं दुमका व पाकुड़ की नामांकन दर सबसे कम है. इन दोनों जिलों में नामांकन दर मात्र 17% है.

कक्षा चार तक में नामांकन में बढ़ोतरी

विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कक्षा एक से चार में नामांकन दर में बढ़ोतरी हुई है. वहीं कक्षा पांच से छह की नामांकन दर में देवघर, गढ़वा, हजारीबाग व कोडरमा को छोड़कर शेष सभी जिलों में कमी है. कक्षा आठवीं से नौवीं कक्षा में भी राज्य के सभी जिलों में नामांकन में कमी की बात सामने आयी है. पाकुड़, गोड्डा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम में नामांकन दर 50 % से भी कम है. पाकुड़ में 31 %, गोड्डा में 34 %, पश्चिमी सिंहभूम में 36 % व पूर्वी सिंहभूम में नामांकन दर 49 % रही.

इन जिलों की स्थिति खराब : रिपोर्ट के अनुसार, पाकुड़, साहिबगंज, पलामू, गोड्डा, खूंटी, चतरा, गुमला, देवघर, सरायकेला-खरसावां, गिरिडीह, प सिंहभूम, जामताड़ा व पलामू की स्थिति खराब रही.

इन जिलों में स्थिति बेहतर : दुमका, सिमडेगा, धनबाद, गढ़वा, पूर्वी सिंहभूम, बोकारो, हजारीबाग, लोहरदगा, कोडरमा, रामगढ़ में कक्षा पांच से छह में नामांकन की स्थिति बेहतर रही.

नामांकन कम होने की जांच कर मांगी रिपोर्ट

नामांकन दर में कमी को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने गंभीरता से लिया है. विभागीय सचिव ने इसे लेकर सभी जिलों के डीइओ और डीएसइ को पत्र भेजा है. जिलों को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि विद्यालयवार नामांकन दर की समीक्षा की जाये. नामांकन दर में आयी कमी की जांच करने को कहा गया है. शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करते हुए झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक को इसकी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है.

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