रांची विवि में 109 करोड़ की गड़बड़ी से जुड़ी फाइल गायब, जानें क्या है पूरा मामला

Edited by Sameer Oraon
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रांची विवि से वेतनमान के एरियर के रूप में झारखंड सरकार को गलत जानकारी देकर लिये गये 109.50 करोड़ रुपये की फाइल गायब हो गयी. इस खुलासा तब हुआ जब राजभवन ने इससे संबंधित कार्रवाई की जानकारी देने को कहा.

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रांची: रांची विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षकों को सातवें वेतनमान के एरियर के रूप में राज्य सरकार को गलत जानकारी देकर लिये गये 109.50 करोड़ रुपये से संबंधित मामले की संचिका गायब हो गयी है. इसका खुलासा उस वक्त हुआ, जब राजभवन ने रांची विवि प्रशासन को पत्र भेज कर इस मामले में हुई अब तक की कार्रवाई की जानकारी देने काे कहा. साथ ही वित्तीय अनियमितता के उत्तरदायी पूर्व कुलपति, तत्कालीन वित्तीय सलाहकार (एफए), वित्त पदाधिकारी (एफओ) व रजिस्ट्रार के खिलाफ हुई कार्रवाई की भी जानकारी मांगी.

राजभवन से पत्र मिलने के बाद कुलपति डॉ अजीत कुमार सिन्हा ने जब संचिका की खोज की, तो वह नहीं मिली. कुलपति ने अधीनस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों को शीघ्र ही संचिका खोज कर उनके समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि संचिका नहीं मिलने पर दोषी कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी. कुलपति के निर्देश के बाद सभी विभाग में संचिका की तलाश की जा रही है.

क्या है मामला :

रांची विवि की ओर से 1013 शिक्षकों के लिए एक जनवरी 2016 से 31 मार्च 2019 तक सातवें वेतनमान के तहत राज्य सरकार से एरियर के रूप में 109.50 करोड़ रुपये की मांग की गयी थी. राज्य सरकार ने वर्ष 2020 में 109.50 करोड़ रुपये, जिनमें रांची विवि को 99.60 करोड़ और डीएसपीएमयू के लिए नौ करोड़ 90 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करा दी. विवि में राशि वितरण के समय इस बात का खुलासा हुआ कि विवि में 860 शिक्षक ही हैं, लेकिन सरकार से 1013 शिक्षकों के नाम पर राशि ली गयी है.

यह लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि थी. इतना ही नहीं, विवि प्रशासन ने कुल 1013 शिक्षकों में रांची कॉलेज के 101 शिक्षकों के नाम पर भी लगभग 10 करोड़ रुपये ले लिये. दूसरी तरफ इन्हीं 101 शिक्षकों के नाम पर डीएसपीएमयू (पूर्व में रांची कॉलेज) के नाम पर भी राज्य सरकार ने नौ करोड़ 90 लाख रुपये दे दिये. प्रभात खबर ने नौ मई 2020 को जब इस गड़बड़ी का खुलासा किया, तो मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिये. उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यीय कमेटी द्वारा इसकी जांच भी करायी. गड़बड़ी की पुष्टि होने पर उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यपाल के पास कार्रवाई की अनुशंसा की है.

जिम्मेवार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

यह सही है कि एरियर से संबंधित मूल संचिका अभी तक नहीं मिली है. संचिका नहीं मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कहने पर इससे संबंधित एक संचिका तो मिल गयी है. लेकिन मूल संचिका अभी भी नहीं मिली है. हमने अधिकारियों से कह दिया है कि अगर संचिका नहीं मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी.

डॉ अजीत कुमार सिन्हा, कुलपति, रांची विवि

रिपोर्ट- संजीव सिंह

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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