सरकारी डेयरी के जानवरों को ही चारा का संकट

Updated at : 17 May 2020 12:43 AM (IST)
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सरकारी डेयरी के जानवरों को ही चारा का संकट

गव्य विकास विभाग की डेयरी के जानवर संकट में हैं. उनको सही ठंग से चारा नहीं मिल पा रहा है. इससे कई जानवर बीमार होने लगे हैं. किसान प्रशिक्षण केंद्र, धुर्वा स्थित डेयरी के अलावा विभाग की अन्य सभी डेयरी में यही स्थिति है.

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रांची : गव्य विकास विभाग की डेयरी के जानवर संकट में हैं. उनको सही ठंग से चारा नहीं मिल पा रहा है. इससे कई जानवर बीमार होने लगे हैं. किसान प्रशिक्षण केंद्र, धुर्वा स्थित डेयरी के अलावा विभाग की अन्य सभी डेयरी में यही स्थिति है. डेयरी के गायों की देखरेख का काम विभाग के मुख्य अनुदेशक का है. पर मुख्य अनुदेशक का पद दिसंबर-2019 से रिक्त है. अजीत कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद से इस पर किसी का पदस्थापन नहीं हुआ है. मुख्य अनुदेशक के न रहने से गत छह माह से चारा आपूर्तिकर्ता को भुगतान नहीं हो पा रहा है. सभी डेयरियों में प्रति माह करीब तीन लाख रु के चारे की खपत होती है.

इधर अधिक रकम बकाया हो जाने के कारण करीब 70 पशुओं को किसी तरह सिर्फ सूखा चारा दिया जा रहा है. पर अब आपूर्तिकर्ता ने सूखा चारा देने से भी मना कर दिया है. इस संबंध में विभागीय लोगों का कहना है कि किसान प्रशिक्षण केंद्र के परिसर में ही कुछ हरा चारा लगाया गया है. जानवरों को यही दिया जा रहा है. इसे ही जानवरों को दिया जा रहा है. पर स्थिति यही रही, तो कुछ जानवरों को बचाना भी मुश्किल होगा.

पौष्टिक आहार नहीं मिलने के कारण दूध में भी कमी आ गयी है. इधर मुख्य अनुदेशक के प्रभार या पदस्थापन की संचिका पांच बार विभाग भेेजी गयी है. पर हर बार किसी न किसी कारण से संचिका लौटा दी गयी. इस कारण अब तक किसी का पदस्थापन नहीं हो पाया है. मजदूरों को मानदेय भी नहींडेयरी के जानवरों को पालने के लिए करीब दो दर्जन दैनिक मजदूर रखे गये है. इन मजदूरों का मानदेय भी मुख्य अनुदेशक के हस्ताक्षर से ही जारी होता है. इस कारण इन्हें भी मानदेय भुगतान नहीं हो रहा है. एक दैनिक मजदूर ने बताया कि लॉकडाउन के कारण ज्यादा परेशानी है. पैसे के अभाव में घर चलाना मुश्किल हो गया है.

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