सारंडा सैंक्चुअरी का मामला स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड को भेजा गया, मुख्यमंत्री लेंगे

Author Praveen
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सारंडा सैंक्चुअरी का मामला स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड को भेजा गया, मुख्यमंत्री लेंगे

पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा वन क्षेत्र में वन्य जीव अभयारण्य (वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी) की घोषणा का मामला स्टेट वाइल्ड बोर्ड को भेज दिया गया है.

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रांची. पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा वन क्षेत्र में वन्य जीव अभयारण्य (वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी) की घोषणा का मामला स्टेट वाइल्ड बोर्ड को भेज दिया गया है. इस बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैं. सूत्रों ने बताया कि एक अगस्त को बोर्ड की बैठक संभावित है. इसी दिन सैंक्चुअरी पर फैसला लिया जा सकता है. इधर, सुप्रीम कोर्ट में 23 जुलाई को मामले की सुनवाई है. सूत्रों ने बताया कि कोर्ट में अद्यतन रिपोर्ट पेश की जायेगी और कुछ समय की मांग की जायेगी.

एक्सपर्ट कमेटी की अनुशंसा: खनन भी हो, सैंक्चुअरी भी

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने अपनी अनुशंसा भेज दी है. इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि खनन कार्य भी बाधित न हो और वन्य जीवों का भी संरक्षण हो. इसके लिये सैंक्चुअरी को पश्चिम दिशा की ओर ज्यादा बढ़ाने की अनुशंसा की गयी है. वजह है कि प्रस्तावित सैंक्चुअरी के दायरे में चिड़िया माइंस समेत कई प्रमुख लौह अयस्क खदान आ रहे हैं. कमेटी ने सुझाव दिया है कि पश्चिम दिशा की ओर बढ़ाने पर वन संरक्षण भी होगा और खदानों का भी संरक्षण होगा. भविष्य के लिये लौह अयस्क समेत अन्य खनिजों की जरूरत पूरे देश को है. इसलिए सैंक्चुअरी के निर्धारित क्षेत्र को लौह अयस्क खदान वाले क्षेत्र को बचाते हुए घोषित करना श्रेयस्कर होगा. साथ ही सैंक्चुअरी के एक किमी के दायरे में ही इको सेंसेटिव जोन घोषित करने का भी आग्रह किया गया है.

यह है मामला

एनजीटी ने सारंडा में वन्य जीव अभयारण्य बनाने का निर्देश दिया था. पर राज्य सरकार द्वारा इसका पालन नहीं किये जाने पर मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था. 29 अप्रैल को सुनवाई के दौरान दायर हलफनामे में वन विभाग ने कहा कि अब राज्य सरकार ने 31468.25 हेक्टेयर के मूल प्रस्ताव के स्थान पर 57519.41 हेक्टेयर क्षेत्र को वन्य जीव अभयारण्य के रूप में अधिसूचित करने का प्रस्ताव किया है. 13.06 किलोमीटर क्षेत्र को संरक्षण रिजर्व के रूप में अधिसूचित करने का प्रस्ताव किया गया है. मामले के अनुपालन पर 23 जुलाई 2025 को सुनवाई होगी. पर जब खान विभाग को पता चला तो अधिकारियों की परेशानी बढ़ गयी. क्योंकि प्रस्तावित क्षेत्र में ही अधिकतर लौह अयस्क खदान व अन्य खनिजों के खदान आ रहे हैं. पूरे चाईबासा क्षेत्र में 90 से अधिक लौह अयस्क खदान हैं. जिसमें करीब चार बिलियन टन का रिजर्व भी है. इसी को लेकर एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया. अब फिलहाल मामला स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के फैसले पर निर्भर करता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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