Jharkhand News: NGT की बालू निकासी पर लगी रोक हटेगी, फिर भी घाटों पर संकट रहेगा बरकरार, जानें क्या है वजह

झारखंड में एनजीटी की बालू निकासी पर लगी रोक हट जाएगी. इसके बावजूद भी घाटों पर संकट बरकरार रहेगी. दरअसल झारखंड राज्य खनिज विकास निगम को टेंडर प्रक्रिया पूरी करनी थी जो नहीं हो सकी है. पूर्व से बंदोबस्त केवल 17 बालू घाटों की ही निकासी हो सकेगी.
रांची : झारखंड में बालू निकासी पर लगी एनजीटी की रोक 16 अक्तूबर से हट जायेगी. यह रोक 10 जून से 15 अक्तूबर तक मॉनसून को लेकर लगती है. दूसरी ओर इस दौरान झारखंड राज्य खनिज विकास निगम(जेएसएमडीसी)को टेंडर की प्रक्रिया पूरी करनी थी, जो नहीं हो सका है. इससे रोक हटने के बाद भी राज्य के बालू घाट चालू नहीं हो सकेंगे. पूर्व से बंदोबस्त केवल 17 बालू घाटों की ही निकासी हो सकेगी. शेष बालू घाटों का जब तक टेंडर नहीं हो जाता, तब तक बालू की वैध रूप से निकासी नहीं हो सकती. रांची जिले में एक भी बालू घाट का टेंडर नहीं हो सका है.
एनजीटी के बाद से राज्य के सभी बालू घाटों की डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट (डीएसआर) बनायी जा रही है. भूतत्व निदेशालय द्वारा डीएसआर बनाकर जिलों को भेजा जा रहा है. डीएसआर को अंतिम रूप से स्टेट इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) द्वारा मंजूरी दी जानी है. 14 जिलों ने डीएसआर तैयार करके सिया को भेज दिया गया है. सिया से मंजूरी मिलने के बाद ही बालू घाटों का टेंडर निकल सकेगा.
कैटगरी दो के सभी बालू घाटों का संचालन जेएसएमडीसी को ही करना है. कैटगरी दो में राज्य में 608 बालू घाट चिह्नित हैं. इन घाटों को तीन श्रेणी यानी कैटेगरी ए में 10 हेक्टेयर से कम, कैटगरी बी में 10 से 50 हेक्टेयर और कैटगरी सी में 50 हेक्टेयर से अधिक के बालू घाटों को रखा गया है. इन बालू घाटों के संचालन के लिए माइंस डेवलपमेंट ऑपरेटर की नियुक्ति की जायेगी. प्रथम चरण में जेएसएमडीसी द्वारा एजेंसी को सूचीबद्ध कर लिया गया है.
दूसरे चरण में एजेंसी के चयन के लिए फायनेंशियल बिड की प्रक्रिया जिलावार संबंधित डीसी के द्वारा बालू घाटवार करना था. डीसी को संबंधित घाटों के लिए श्रेणीवार सूचीबद्ध एजेंसी में से वित्तीय निविदा के माध्यम चयन करना था. इसी दौरान पंचायत चुनाव आ गया, जिसके चलते वित्तीय निविदा नहीं हो सकी.
एनजीटी के आदेश से सभी बालू घाटों का डीसीआर तैयार हो रहा है. कई जिलों में डीएसआर तैयार कर सिया की मंजूरी के लिए भेजा गया है. जैसे-जैसे मंजूरी मिलेगी, वहां टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी.
अमीत कुमार, खान निदेशक
वर्तमान में स्टॉकिस्ट के माध्यम से बालू की बिक्री हो रही है. जिस कारण दर 25 से 32 हजार प्रति हाइवा है, जबकि मई-जून में इसकी दर आठ से 10 हजार रुपये प्रति हाइवा थी. बालू कारोबारी बताते हैं कि एनजीटी पर लगी रोक हटने से बहुत ज्यादा दर में परिवर्तन नहीं होगा. घाटों का टेंडर हो जाये और बालू की निकासी होने लगे, तो दर घटकर सामान्य हो जायेगी.
झारखंड में केवल 17 बालू घाटों से ही वैध रूप से बालू का उठाव हो सकेगा. वजह है कि इन घाटों की बंदोबस्ती पूर्व में ही हो चुकी है. जेएसएमडीसी के चतरा के चार, सरायकेला-खरसावां के एक, कोडरमा के दो, दुमका दो, देवघर के पांच, हजारीबाग के एक, खूंटी के दो व गुमला के एक बालू घाट ही ऐसे हैं, जिनमें माइंस डेवलपर सह ऑपरेटर(एमडीओ) नियुक्त हैं, जो वैध तरीके से बालू का उठाव कर सकते हैं.
रिपोर्ट- सुनील चौधरी
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By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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