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प्रणब दा के दिल में बसती थी रांची

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
प्रणब दा के दिल में बसती थी रांची
प्रणब दा के दिल में बसती थी रांची
File Photo

पूर्व राष्ट्रपति व भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के दिल में रांची बसती थी़ वह कई बार रांची आ चुके थे़ यहां छोटे-बड़े कार्यक्रम में शामिल हुए़ रांची के लोगों ने उनको जब भी बुलाया, वे आये़ इस शहर से विशेष लगाव था़ बंगाली समाज के कार्यक्रम में हिस्सा लिया़ उनके व्यवहार और अात्मीय स्वभाव से समाज के लोग अभिभूत रहे़ प्रणब दा पहली बार 1982 में रांची आये. चिंगड़ी मछली के शौकीन इस दिग्गज राजनीतिज्ञ ने झारखंड के परिसीमन आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

झारखंड से जुड़ी विभिन्न सांस्कृतिक, शैक्षणिक, सामाजिक और धार्मिक मामलों से उनका गहरा संबंध रहा. चाहे वह 2016 में रांची में आयोजित निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन का वार्षिक अधिवेशन हो या रांची स्थित आड्रे हाउस में आर्ट गैलरी का उदघाटन. इन कार्यक्रमों का उद्घाटन प्रणब दा के कर कमलों से ही हुआ. प्रणब मुखर्जी निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के प्रति बहुत ही सजग रहे. 12 वर्षों तक लगातार निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के सभापति रहे.

रतन तिर्की ने शेयर की यादें : परिसीमन आंदोलन के समय प्रणब दा ने दिया था आश्वासन : वर्ष 2007 में प्रणब मुखर्जी देश के गृहमंत्री थे. उस वक्त परिसीमन आंद़ोलन पूरे जोरों पर था़ झारखंड भी इस आंदोलन से अछूता नहीं था़ अगस्त और सितंबर में हमलोगों ने जबरदस्त आंदोलन किया था़ यह आंदोलन झारखंड और दिल्ली दोनों जगह हुआ़ दिल्ली के जंतर मंतर पर विशाल धरना हुआ़ संसद मार्ग पर मार्च किया गया़ मेरे साथ कई लोगों ने गिरफ्तारियां दी़ उस वक्त रामेश्वर उरांव ने भी पूरे दमखम के साथ आंदोलन की अगुवाई की़

पूरे आंदोलन का संयोजक मैं (रतन तिर्की), देवकुमार धान, जोय बाखला और कई आंदोलनकारी भी थे. उसी समय प्रणब दा से झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन, रामेश्वर उरांव, हेमलाल मुर्मू, जोय बखला और देवकुमार धान आदि ने झारखंड में परिसीमन लागू नहीं करने की मांग की थी. तब प्रतिनिधिमंडल को प्रणब दा ने आश्वस्त कर दिया था कि झारखंड में परिसीमन आयोग की सिफारिश लागू नहीं होगी. और झारखंड में परिसीमन 2026 तक लागू नहीं होगा.

  • बंगाली एसोसिएशन व देवघर मंदिर से था विशेष लगाव

  • झारखंड टेक्नीकल यूनिवर्सिटी सहित रवींद्र भवन व हज हाउस का भी किया था शिलान्यास

  • जनवरी 2013 में इनके कार्यकाल में झारखंड में लगा था राष्ट्रपति शासन

2016 में आड्रे हाउस में आर्ट गैलरी का किया था उदघाटन : प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बनने से पहले व बाद में कई बार झारखंड के दौरे पर रहे. झारखंड बंगाली एसोसिएशन से उनका गहरा नाता रहा. वहीं देवघर में बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना जरूर करते थे. मुखर्जी वर्ष 2016 में दो दिवसीय दौरे पर नौ जनवरी 2016 को रांची आये थे. विनोबा भावे विवि में दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने के बाद रांची स्थित आड्रे हाउस में आर्ट गैलरी का उदघाटन किया था. साथ ही वहीं से झारखंड तकनीकी विवि के नये परिसर की आधारशिला रखी थी. इसके अलावा बीआइटी मेसरा के डायमंड जुबली समारोह में हिस्सा लिया. खेलगांव में बंगाली एसोसिएशन के सम्मेलन का उदघाटन भी किया था. इसके बाद 25 नवंबर 2016 को भी रांची आये.

वर्ष 2017 में अप्रैल में वे एक बार फिर दो दिवसीय दौरे पर रांची आये. इस बार जयपाल सिंह स्टेडियम के नजदीक रवींद्र भवन टाउन हॉल की नींव रखी. साथ ही हज हाउस का अॉनलाइन आधारशिला रखी. गौरतलब है कि प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल में झारखंड में जनवरी 2013 में राष्ट्रपति शासन भी लगा. उस वक्त अर्जुन मुंडा की सरकार गिर गयी थी. दिसंबर 2018 में प्रणब मुखर्जी एक स्कूल व आइआइएम रांची के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आये. लगभग छह घंटे रांची में रहे थे. संभवत: प्रणब दा का रांची में यह अंतिम कार्यक्रम था.

वर्ष 2020... जब दिल्ली में हेमंत सोरेन को प्रणब दा ने किया था सम्मानित : इसी वर्ष जनवरी में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों नयी दिल्ली में सम्मानित हो चुके हैं. श्री मुखर्जी ने श्री सोरेन को नयी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में चैंपियन ऑफ चेंज अवार्ड 2019 से सम्मानित किया. कार्यक्रम में सिंहभूम की सांसद रही गीता कोड़ा को भी सम्मानित किया गया. मुख्य रूप से श्री सोरेन को झारखंड के बरहेट अौर दुमका विधानसभा क्षेत्र में एक जन प्रतिनिधि के रूप में बेहतर अौर अनुकरणीय कार्य करने के लिए इस अवार्ड से सम्मानित किया गया था. मुख्यमंत्री ने यह अवार्ड राज्य की जनता व अपने पिता शिबू सोरेन को समर्पित किया था.

देवघर से रहा था गहरा लगाव : राष्ट्रपति रहते प्रणब मुखर्जी दो बार देवघर आये थे. बाबा नगरी देवघर से उनका लहरा लगाव रहा था. पहली बार 26 नवंबर 2016 में देवघर में बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना की. यही नहीं, बाबा मंदिर में पूजा करवाने वाले उनके पुरोहित की पंजी में अपना हस्ताक्षर भी किया. दूसरी बार भी वे बतौर राष्ट्रपति 02 अप्रैल 2017 को देवघर आये थे. इस बार भी पहले उन्होंने बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की और उसके बाद देवघर कॉलेज मैदान में 44 किमी लंबी देवघर-बासुकीनाथ सोलर स्ट्रीट लाइट परियोजना का उद्घाटन किया और भारत के सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स केंद्र की आधारशिला रखी.

चिंगड़ी मछली के शौकीन थे राजनीति के दिग्गज प्रणब दा : पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पहली बार 1982 में रांची आये. उन्हें चिंगड़ी मछली पसंद थी़ रांची आये, तो कोलकाता से उनके लिए चिंगड़ी मछली मंगायी गयी़ बड़ी चाव से खाये़ उनके करीबी रहे चंचल चटर्जी उनके इस आगमन के गवाह है़ं उन दिनों को याद कर वह भाव-विह्वल हो जाते है़ं

चंचल बताते हैं : प्रणब मुखर्जी से मेरा पहला परिचय 1980 में हुआ. 1982 में जब वे कैबिनेट मंत्री थे, तो पहली बार बंगीय सांस्कृतिक परिषद के कार्यक्रम में धुर्वा आये थे. फिर 1985 में यूनियन क्लब में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे. वर्ष 1991 और 1996 में जब वे रांची पहुंचे, तो कोकर स्थित हमारे घर भी आये. उनके आगमन को लेकर हमने कोलकाता से खास उनके लिए चिंगड़ी मछली मंगवाया था.

प्रणब दा के आगमन की सूचना पाकर काफी संख्या में आसपास के लोग भी हमारे घर पहुंच गये थे. सबकी एक ही इच्छा थी कि प्रणब दा को करीब से देखें. लोगों की इतनी भीड़ होने के बाद भी वे घबराये नहीं. एक-एक लोगों से मिल कर उनका हाल चाल पूछा. एक बात जो हमने प्रणब दा के जीवन में देखी, वह यह थी कि जब भी मैं दिल्ली जाता था, तो देखता था कि रात 12 बजे तक वह आम लोगों से मिल रहे हैं. चाहे वह उनका परिचित हो या आम आदमी, सबसे मिलने के बाद ही प्रणब दा सोने के लिए जाते थे.

(जैसा चंचल चटर्जी ने बताया)

वह दूसरों को सम्मान देना नहीं भूलते थे : मैं व्यक्तिगत रूप से कई बार प्रणब मुखर्जी से मिली. उनके साथ काम करने का भी मौका मिला़ क्योंकि वे निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के लगातार 12 वर्ष तक सभापति पद पर रहे. उनका व्यक्तित्व बहुत ही सहज और सरल था़ रांची में राजभवन में उनसे मिलने गयी तो, उन्होंने पूछा कि तुम कैसी हो? संगठन का कार्य कैसा चल रहा है?. वह दूसरों को सम्मान देना नहीं भूलते थे. उनके साथ मंच शेयर करने का मौका मिला. मेरी एक पुस्तक का विमोचन भी उनके हाथों से हुआ.

डॉ पंपा सेन विश्वास, शिक्षाविद्

प्रणब दा के जीवन से बहुत कुछ सीखा : प्रणब बाबू को दो बार नजदीक से देखने का मौका मिला. बात 1972 की है, जब मैं प्रणब दा को बहुत करीब से देखा. तब वह बांग्ला कांग्रेस पार्टी में हुआ करते थे. युवा थे. कोलकाता के गोल पार्क में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के पास अनशन पर बैठे थे. दूसरी बार यूनियन क्लब रांची में प्रणब दा से मिलने का अवसर मिला.

सुबीर लहिड़ी, पूर्व कोषाध्यक्ष, यूनियन क्लब

उनके जैसा राजनेता शायद ही कोई हो : प्रणब मुखर्जी रांची में आयोजित निखिल भारतीय बंग साहित्य सम्मेलन में शामिल हुए थे़ देशप्रिय क्लब की ओर से उनका स्वागत किया गया था. जब वह राष्ट्रपति बने थे, तब अलबर्ट एक्का चौक पर हमलोगों ने मिठाइयां बांटी थी़ उनके जाने से बहुत दुख हुआ. बहुत ही सहज राजनेता थे. उतना ही नेक इंसान.

असीम सरकार, सचिव, देशप्रिय क्लब

प्रणब दा से मिलने का कई बार सौभाग्य प्राप्त हुआ : प्रणब दा से मिलने का कई बार सौभाग्य प्राप्त हुआ. कोलकाता, रांची और दिल्ली में मुलाकात हुई. दुर्गा पूजा में उनके गांव में भी मिलना हुआ़ वे मेरे लिए खास व्यक्तित्व रहे हैं, क्योंकि मेरे जीवन में उनका बहुत सहयोग रहा है. उनका आशीर्वाद मिला़ मैं अपने को बहुत ही सौभाग्यशाली मानता हूं.

सुप्रियो भट्टाचार्य

हमेशा रोल मॉडल रहेंगे : प्रणब दा अनुकरणीय व्यक्तित्व थे. वर्तमान राजनीतिक हालात में उनसे सीखना चाहिए. हमेशा रोल मॉडल रहेंगे़ मैं निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन की सदस्य हूं और वह अध्यक्ष रहे हैं, मुझे इसका गर्व है.

डॉ महुआ माजी, साहित्यकार

Post by : Prirtish Sahay

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