रांची एयरपोर्ट विस्तारीकरण में ये है सबसे बड़ी बाधा, ग्रामीण क्यों कर रहे हैं विरोध?

Ranchi Airport Flight Schedule
विस्थापितों ने बताया कि जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया है, उसमें से 70 प्रतिशत से अधिक विस्थापितों को मुआवजा भी नहीं मिला है. जिला प्रशासन ने कहा था कि विस्थापितों को बसाने के लिए तीन डिसमिल जमीन देंगे.
रांची : बिरसा मुंडा एयरपोर्ट विस्तारीकरण में जमीन अधिग्रहण की समस्या बाधा बन रही है. मुआवजा नहीं मिलने के कारण ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं. बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के विस्थापितों का कहना है जिला प्रशासन ग्रामीणों को छलने का काम कर रहा है. इस कारण विस्थापित इसका विरोध कर रहे हैं. सरकार ने 301.12 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने की बात कही थी, जबकि इससे अधिक 373 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है.
विस्थापितों ने बताया कि जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया है, उसमें से 70 प्रतिशत से अधिक विस्थापितों को मुआवजा भी नहीं मिला है. जिला प्रशासन ने कहा था कि विस्थापितों को बसाने के लिए तीन डिसमिल जमीन देंगे. जबकि, विस्थापित कम से कम 20 डिसमिल जमीन देने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा जहां विस्थापितों को बसाया जायेगा, वह क्षेत्र नगर निगम के अंदर आता हो. वहीं, विस्थापितों को एयरपोर्ट में नौकरी व रोजगार देने, एयरपोर्ट के अंदर व बाहर धार्मिक स्थल को संरक्षित करने की मांग भी शामिल है.
गढ़ाटोली में जिला प्रशासन ने 126 लोगों को नोटिस देकर मकान हटाने को कहा है. जबकि, इसमें 80 से अधिक विस्थापितों को मुआवजा नहीं मिला है और न ही उन्हें बसाया गया है. विस्थापित कहां जायेंगे. इस लिए विरोध हो रहा है.
अजीत उरांव, एयरपोर्ट विस्थापित मोर्चा के अध्यक्ष
जमीन अधिग्रहण के बाद गढ़ाटोली का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा. सरकार ने पुनर्वास के लिए अभी तक कुछ नहीं किया है. जबकि, नोटिस पर नोटिस भेजा जा रहा है. सरकार महज तीन डिसमिल देने की बात कह रही है. ऐसे में चार-चार भाइयों का परिवार कैसे रहेगा.
बासु बसंत उरांव, विस्थापित
जमीन अधिग्रहण के बाद कुछ लोगों को पैसा मिला है और कुछ को नहीं मिला है. जिला प्रशासन ने 40 डिसमिस जमीन लिया है और पैसा अभी तक सिर्फ 10 डिसमिस जमीन का मिला है.
विनोद गाड़ी, विस्थापित
जिन लोगों की जमीन ली गयी है, उन्हें निर्धारित मुआवजा मिलना चाहिए. वहीं, ज्यादा जमीन ली जा रही है और पैसा का भुगतान कम किया गया है. जिला प्रशासन जमीन की मापी किये बैगर घेराबंदी कर जमीन अधिग्रहण करना चाहता है. ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं.
बिरसा लिंडा, विस्थापित
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By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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