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Raksha Bandhan 2022: आज दिनभर है मुहूर्त, भाइयों की कलाई पर बहना बांध रही राखी

Updated at : 12 Aug 2022 11:03 AM (IST)
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Raksha Bandhan 2022: आज दिनभर है मुहूर्त, भाइयों की कलाई पर बहना बांध रही राखी

आज रक्षाबंधन है. उदया काल में पूर्णिमा मिलने के कारण शुक्रवार को दिनभर मुहूर्त रहेगा. ऐसे में बहनें अपने भाइयों को कभी भी राखी बांध सकती है. गुरुवार को कुछ देर के लिए बारिश थमने पर बाजार में राखी लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी.

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Raksha Bandhan 2022: शुक्रवार को भाई-बहन के प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन है. बहन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी. वहीं, भाई भी बहनों की सुरक्षा का संकल्प लेंगे. सावन की पूर्णिमा तिथि गुरुवार सुबह 9:35 बजे से लग गयी है़ वाराणसी पंचांग के अनुसार, 12 अगस्त की सुबह 7:05 बजे तक पूर्णिमा है. इस दिन उदया काल में विशुद्ध रूप से पूर्णिमा मिलने के कारण दिन भर पूर्णिमा तिथि मान्य होगी़ इस कारण शुक्रवार को ही स्नान दान की पूर्णिमा और श्रावणी उपाकर्म भी किया जायेगा.

राखी के बाजार में उल्लास दिखा

गुरुवार शाम बारिश थमते ही लोगों ने राखी और मिठाइयों की खरीदारी की़ राखी दुकानों में काफी भीड़ रही. सबसे ज्यादा इवेल आइ, कौड़ी, मंत्र राखी, स्टोन, जूट आदि से बनी राखियों की मांग रही़ इनकी ऑनलाइन खरीदारी ज्यादा हुई़ वहीं, बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर के अलावा फ्रूट, इरेजर, पपेट, एवेंजर राखी काफी बिकी. फ्रूट राखी भी आकर्षण का केंद्र रही़ कस्टमाइज राखी के व्यवसाय से जुड़ी कोकर की अनुभा ने बताया कि इस बार डिजाइन राखी की डिमांड ज्यादा रही़ चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता, पटना, नोएडा सहित अन्य शहरों में 100 से अधिक पार्सल किये गये. अोवर ब्रिज के पास रहनेवाली उर्मिला मोटानी ने बताया कि बच्चों के लिए फ्रूट्स और टेडी राखी पसंद की गयी.

शुक्रवार को है रक्षाबंधन

पंडित कौशल कुमार मिश्र ने कहा कि चतुर्दशी युक्त पूर्णिमा में रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है. इस कारण शुक्रवार को त्योहार मनाया जा रहा है. मैथिली पंचांग के अनुसार भी 12 अगस्त को ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है. पंडित कपिलदेव मिश्र ने कहा कि जिसका उदय होता है, उसी का अस्त माना गया है. इस कारण शुक्रवार को त्योहार मनाया जा रहा है. इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र रात 3:48 बजे तक मिल रहा है. इसके अलावा सौभाग्य योग दोपहर 1:51 बजे तक मिल रहा है.

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भाई को कभी अकेले नहीं छोड़ती

राजधानी रांची के अरगोड़ा निवाीस आयुषी बोस और सुबोजीत बोस जुड़वां हैं. सुबोजीत स्पेशल चाइल्ड है. आयुषी कभी उसे अकेले नहीं छोड़ती. वह कहती हैं : भाई को देखकर बाहरवाले बहुत कुछ कहते, पर मैंने हमेशा उनका जवाब दिया़. हमदोनों भी आम बच्चों की तरह रहते हैं.हर वर्ष उसके लिए स्पेशल राखी खरीदती हूं.

बड़ी बहन को ही बांधती हैं राखी

वहीं, रांची के पिपरटोली की पूनम बेटे का फर्ज निभा रही हैं. पांच बहनों में मंझली पूनम छोटी बहनों को पढ़ाने के लिए नौकरी कर रही हैं. बड़ी बहन की शादी हो गयी है. मां घरों काम करती हैं. पिता माली थे, पर पैर टूटने के कारण उनका अभी काम बंद है. पूनम कहती हैं : रक्षाबंधन पर बहनें मुझे ही राखी बांध देती हैं. मैं भी तोहफे लाकर देती हूं.

Posted By: Samir Ranjan.

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