Ranchi News : महिलाओं ने आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक नेतृत्व के अधिकार की आवाज उठायी

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर रविवार को झारखंड जनाधिकार महासभा समेत कई संगठनों ने मिलकर रांची में महिला अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया. सम्मेलन का मुख्य विषय “समाज, अर्थ और राजनीति में समानता के हक की दावेदारी” था.
रांची (संवाददाता). अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर रविवार को झारखंड जनाधिकार महासभा समेत कई संगठनों ने मिलकर रांची में महिला अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया. सम्मेलन का मुख्य विषय “समाज, अर्थ और राजनीति में समानता के हक की दावेदारी” था. सम्मेलन में राज्य भर से विभिन्न संगठनों की 200 महिला प्रतिनिधियों ने मिलकर आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक नेतृत्व के अधिकार पर आवाज उठायी.
सम्मेलन में लीना और रिया तुलिका पिंगुआ ने महिलाओं के क्रांतिकारी संघर्षों को याद किया. वहीं कई महिलाओं ने अपने निजी जीवन, परिवार व समाज में बराबरी के अधिकार के लिए किये गयो संघर्षों को साझा किया. कवयित्री जसिंता केरकेट्टा ने कहा कि समाज, धर्म और पुरुष महिलाओं को घेर कर रखते हैं. पितृसत्ता को खत्म करने के लिए महिलाओं को इन सब पर सवाल करना होगा. शोधकर्ता नसरीन आलम ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में 32% महिलाओं ने घरेलू हिंसा से पीड़ित रही हैं.सम्मेलन में एकल नारी सशक्ति संगठन की कौशल्या देवी ने कहा कि समाज में एकल महिलाओं को कई तरह के शोषण का सामना करना पड़ता है, जिसके विरुद्ध उनका संगठन लगातार संघर्ष कर रहा है.
कुछ धार्मिक संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने कहा कि धर्म ने तो महिलाओं के निजी जीवन और सामाजिक स्थिति को सीमित दायरों में बांध रखा है. धार्मिक व्यवस्था में भी महिलाओं के लिए नेतृत्व में आना बड़ी चुनौती है. झामुमो से जुड़ी रजनी मुर्मू ने कहा कि जमीन पर अधिकार न होना आदिवासी महिलाओं का गैर-आदिवासियों से अक्सर पिछड़ जाने का एक बड़ा कारण है. वहीं एपवा की नंदिता भट्टाचार्य ने महिला अधिकारों पर मंडरा रहे गहरे संकट को याद दिलाया. कहा कि आरएसएस और भाजपा देश को संवैधानिक मूल्यों के विपरीत हिन्दू राष्ट्र और कॉर्पोरेट राज बनाने पर तुले हैं. एडवा की वीना लिंडा ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को संसद व विधानसभा में आरक्षण देने का ढोंग कर रही है. इसे लागू करवाने के लिए महिलाओं को आंदोलन करना होगा।आदिवासी नेत्री दयामनी बरला ने कहा कि झारखंड बनाने में महिलाओं ने व्यापक संघर्ष किया था, लेकिन राज्य बनने के बाद पुरुष यह भूल गये. उन्होंने राजनीति में महिलाओं की चुनौतियों को साझा किया, कहा कि आज झारखंड में केवल 10-15% विधायक महिला हैं, जबकि कम-से-कम 50% सीटों पर महिलाओं का अधिकार होना चाहिए. कुमुद ने कहा कि महिलाओं के संघर्षों से समाज, धर्म, राजनीति और आर्थिक व्यवस्था में पितृसत्ता को लगातार चुनौती मिली है. जन संघर्ष समिति की एमेलिया ने कहा कि नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को रोकने में महिलाओं की अहम भूमिका थी. कांग्रेस नेत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि राजनीति में संघर्षशील महिलाओं की आवाज अक्सर दबा दी जाती है. महिलाओं को संगठित होकर पितृसत्ता और अर्थ, समाज व राजनीति में बराबरी के अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ेगा. संचालन एलिना होरो, लीना, और रिया तुलिका पिंगुआ ने किया.विभिन्न मांगों के साथ संकल्प पारित
सम्मेलन में प्रतिभागियों ने विभिन्न मांगों के साथ संकल्प पारित किया, जो निम्न हैं. महिलाओं के लिए हर स्तर की नौकरी में 50% आरक्षण लागू हो. लैंगिक समता के लिए विशेष नीति बना कर उसे हर स्तर पर लागू किया जाये. महिला आयोग पुनर्जीवित किया जाये. समलैंगिक समेत सभी ट्रांसजेंडर व क्वीयर व्यक्तियों का हर मौलिक अधिकार व सरकारी योजनाओं में बराबरी सुनिश्चित हो. हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर सक्रिय हो. राज्य में कम से कम 50% विधायक महिला हों. राजनैतिक पार्टियों के हर स्तर की समितियों व नेतृत्व में कम से कम 50% महिलाएं हों.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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