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किसान सम्मान समारोह में बोले मंत्री बादल पत्रलेख- त्याग की प्रतिमूर्ति होते हैं अन्नदाता, योगदान भूल सकते

कृषि मंत्री श्री बादल ने कहा कि हम हमेशा किसानों से संवाद करते हैं. यह जानने की कोशिश करते हैं कि सरकार से उनको क्या चाहिए. हमने छोटा प्रयास किया है. कृषि ऋण माफी किया गया.

रांची : प्रभात खबर के किसान सम्मान समारोह में किसानों के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया. सभी को प्रशस्ति पत्र दिया गया. इस मौके पर विशिष्ट अतिथि कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के मंत्री बादल ने कहा कि किसानों की स्थिति किसी से नहीं छिपी है. देश की आजादी के बाद से सभी सरकारों ने किसानों के लिए सोचा. 1960 में जब देश में भुखमरी की स्थिति थी, तो वैज्ञानिक डॉ एमएस स्वामीनाथन के सुझाव के कारण देश में कृषि के क्षेत्र में क्रांति आ गयी. उस समय किये गये अन्नदाता के त्याग को कोई नहीं भूल सकता है. किसान की भावना अलग होती है. वह त्याग की प्रतिमूर्ति होते हैं. इसके बावजूद किसान आज भी तंगहाली में जी रहे हैं.

कृषि मंत्री श्री बादल ने कहा कि हम हमेशा किसानों से संवाद करते हैं. यह जानने की कोशिश करते हैं कि सरकार से उनको क्या चाहिए. हमने छोटा प्रयास किया है. कृषि ऋण माफी किया गया. अनुदान पर बीज दिया जा रहा है. सात लाख किसानों को फसल बीमा का पैसा दिलाया गया. 14 लाख से अधिक किसानों को सूखा राहत का लाभ दिया गया. इसके बावजूद किसानों की परेशानी कम नहीं हो रही है. राज्य में किसान लगातार दूसरी बार सूखा झेल रहे हैं. इसके बावजूद किसान हिम्मत से खड़े हैं. बादल ने कहा कि किसानों से हमारी नजदीकी है. यह आगे भी रहेगी.

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जीडीपी में घट रहा किसानों का योगदान

मंत्री ने कहा कि जीडीपी में किसानों का योगदान घट रहा है. पहले 50 फीसदी के करीब था. यह घटा है. बैंकों से सीडी रेशियो बढ़ाने का आग्रह किया गया है. हाल में बैंकों का सहयोग भी बढ़ा है. सात लाख नये किसानों को केसीसी ऋण दिया गया. पहले से 14 लाख को मिल रहा था. इसको और बेहतर किया जा सकता है. किसानों को भी बैंकों से संबंध अच्छा रखना चाहिए. समय पर ऋण चुकाना चाहिए. ऐसा करने से बैंक किसानों के पीछे भागेंगे. हम चाहते हैं कि हमारे किसान भी समृद्ध हों. किसान भी सम्मान समारोह में कार से आयें.

किसानों पर जलवायु परिवर्तन का असर : आशुतोष चतुर्वेदी

प्रभात खबर के प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि देश की पूरी अर्थव्यवस्था खेती-किसानी पर ही निर्भर है. मौजूदा परिस्थिति में किसानों को बहुत परेशानी है. किसानों पर जलवायु परिवर्तन का असर भी दिख रहा है. समय पर बारिश नहीं होने या ज्यादा बारिश हो जाने से खेती प्रभावित होती है. किसानों के सामने बाजार का भी बड़ा संकट है. इस कारण किसानों को अपने उत्पाद सस्ती दर पर बेचने पड़ते हैं. आज भी किसान साहूकारों के चंगुल में हैं. इस कारण कर्ज उनकी समस्या बन जाती है. मीडिया का ध्यान भी बहुत खेती-किसानी पर नहीं है. डॉ एमएस स्वामीनाथ ने कृषि को समवर्ती सूची में डालने की अनुशंसा की थी. अब पारंपरिक खेती का दौर चला गया है. किसानों को नकदी फसलों पर ध्यान देना होगा. झारखंड के किसान भी नये-नये प्रयोग कर रहे हैं.

किसान होना गर्व की बात : आरके दत्ता

प्रभात खबर के कार्यकारी निदेशक आरके दत्ता ने कहा कि राज्य में कोई मीडिया हाउस पहली बार किसानों को सम्मानित कर रहा है. भारत कृषि प्रधान देश है. किसान जादूगर हैं, जो मिट्टी से अनाज उगाते हैं. किसान होना अपने-आप में गर्व की बात है. नये-नये प्रयोग कर किसान खेती-बारी से भी अच्छी कमाई कर सकते हैं. ऐसा कई किसान कर रहे हैं. गेहूं-धान के अतिरिक्त औषधीय पौधे की खेती भी कर सकते हैं. फल-फूल के क्षेत्र में अच्छी संभावना है. श्री दत्ता ने कहा कि प्रभात खबर सामाजिक दायित्व के तहत कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करता है. समाज के सभी वर्गों को प्रोत्साहन देने का प्रयास करता रहा है. आगे भी किसानों के सम्मान में समारोह का आयोजन किया जाता रहेगा. धन्यवाद ज्ञापन प्रभात खबर के वाइस प्रेसिडेंट विजय बहादुर ने किया.

पति की मौत के बाद टूट गयी थी, खेती ने दिया सहारा : कंडुलना

लोहरदगा के कुड़ू की एमलेम कंडुलना ने बताया कि 2006 में पति की मौत हो गयी थी. इसके बाद वह पूरी तरह टूट गयी थी. तीन साल का बच्चा था. पति की मौत के बाद मजदूरी करने लगी. अपनी जमीन नहीं थी. प्रदान संस्था के सहयोग से खेती-बारी सीखा. 2014 में केरल गयी. वहां से लौटने के बाद 25 डिसमिल जमीन लीज पर लिया. इसमें जैविक खेती की. कई तरह की फसल लगायी. इससे होने वाली कमाई से एक एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती करने लगी. इसमें पपीता की खेती की. इससे 2.56 लाख रुपये की कमाई हुई. अभी स्ट्रॉबेरी के खेती कर रही हूं. दो लाख की फसल बेच चुकी हूं.

डेयरी उद्योग चला रहे हैं रातू के इंद्रदेव महतो

रातू, रांची के किसान इंद्रदेव महतो सेना में थे. सेना से रिटायर होने बाद गांव में आकर खेती करने लगे. इसके बाद दो गाय से अपना कारोबार शुरू किया. आज उनके पास 40 गाय है. वह मेघा डेयरी के सहयोग से डेयरी उद्योग भी चला रहे हैं. 2.5 एकड़ में जानवरों के लिए चारा लगाये हुए हैं. उन्होंने बताया कि खेती-बारी से संतुष्ट हैं.

20 एकड़ का फार्म चला रहीं शंकरी देवी

शंकरी देवी देवघर की हैं. उन्होंने बताया कि वह 20 एकड़ का फार्म चला रही हैं. यहां कृषि की कई नयी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. पांच से छह क्विंटल दूध उत्पादन होता है. इसके अतिरिक्त मुर्गा, हंस व बकरी का पालन भी फार्म में करती हैं.

इन बैंकों के प्रतिनिधि हुए सम्मानित

इस मौके पर उल्लेखनीय काम करने वाले विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया. उन्होंने अपनी-अपनी शाखा में किसानों के हित में उल्लेखनीय काम किये हैं.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लोधमा शाखा के ब्रांच मैनेजर : अभय कुमार सिंह

बैंक ऑफ इंडिया के सीनियर मैनेजर कृषि वित्त विभाग जोनल कार्यालय : चंद्रदेव

केनरा बैंक की एग्रीकल्चर एक्सटेंशन अफसर : रूम्पा वालडुम खाखा

इंडियन बैंक ईचाक ब्रांच के सीनियर मैनेजर : अजीत सिंह चौहान

झारखंड राज्य कोऑपरेटिव बैंक भरनो के ब्रांच मैनेजर : नारायण जी

यूको बैंक केशवारी ब्रांच हेड : प्रभाष आनंद

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया सिल्ली के रूरल डेवलपमेंट अफसर : ऋषा वरुण

बैंक के इन वरीय अधिकारियों को राज्यपाल ने किया सम्मानित

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के रीजनल मैनेजर : सुनील आनंद

बैंक ऑफ इंडिया के जीएम : मनोज कुमार

झारखंड कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष : विभा सिंह

नाबार्ड एजीएम : डीटी लुगुन

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के डीजीएम : सोनालिका

केनरा बैंक के एजीएम : सुनील कुमार सिंह

इंडियन बैंक के जोनल मैनेजर : एफ आर बखोरी

यूको बैंक के जोनल मैनेजर : रिटायर्ड मेजर विक्रांत टंडन

नोट : कार्यक्रम में मेघा डेयरी के एलेन एक्का और ग्रामीण सेवा संघ के सचिव विलाश साठे को भी सम्मानित किया गया.

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