Jharkhand: उत्पाद विभाग में गबन के मिले थे सबूत, लेकिन प्रेम प्रकाश की वजह से दर्ज तक नहीं हुई प्राथमिकी

Updated at : 02 Jun 2022 9:12 AM (IST)
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Jharkhand: उत्पाद विभाग में गबन के मिले थे सबूत, लेकिन प्रेम प्रकाश की वजह से दर्ज तक नहीं हुई प्राथमिकी

इडी की छापेमारी के बाद सत्ता के गलियारे का पावर प्लेयर कहा जानेवाला पीपी उर्फ प्रेम प्रकाश इन दिनों सुर्खियों में है. भले ही सरकार किसी पार्टी की हो, पीपी की हनक बराबर बनी रही.

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रांची: सत्ता के गलियारे में अपनी धाक जमान‍े वाला या यूं कहे सियासत का पावर प्लेयर प्रेम प्रकाश इन दिनों चर्चा में है, वजह है उनके ठिकानों पर ईडी का छापा पड़ना. सरकार भले ही किसी की रही हो प्रेम प्रकाश की हनक हमेशा बरकरार रही है. इसका प्रमाण है साल 2018 में उत्पाद विभाग में 7 करोड़ का गबन. उन पीपी किसान पोल्ट्री फार्म के नाम से अंडे की आपूर्ति करता था.

साथ ही मेसर्स शॉमक इंजीनियरिंग एंड कंस्लटेंसी सर्विसेज के साथ एमओयू कर अशोक नगर में दफ्तर खोला था. यहीं से वह उत्पाद विभाग के राज्यभर की 230 शराब दुकानों का संचालन करता था. साथ ही इन दुकानों से पैसे का संग्रह कर उसे बैंक में जमा करने का भी काम करता था.

दुकानों की पड़ताल जब विभागीय अधिकारियों ने की, तब स्टॉक और शराब बिक्री के पैसे में बड़ा अंतर पाया गया था. करीब सात करोड़ रुपये की गड़बड़ी पायी गयी. तत्कालीन उत्पाद आयुक्त, महाप्रबंधक (संचालन), उपायुक्त उत्पाद के समक्ष स्टॉक की गणना की गयी थी. शराब दुकानों के स्टाफ का बयान लिया गया था.

इस आधार पर 28 जुलाई 2018 को झारखंड राज्य बिवरेज कॉरपोरेशन के महाप्रबंधक सुधीर कुमार ने प्रेम प्रकाश व अन्य के खिलाफ प्राथमिकी के लिए आवेदन देने अरगोड़ा थाना गये थे. साथ ही प्रेमप्रकाश से जुड़े गौरव सिंह, अनिल कुमार झा, मंजीत (पीपी का चालक) और विनय शंकर (पीपी का दूसरा चालक) को पकड़कर भी उत्पाद विभाग की टीम अरगोड़ा थाना ले गयी थी.

आवेदन में उक्त चार के अलावा प्रेम प्रकाश, राजदीप और कामजीत सिंह (पीपी का सरकारी अंगरक्षक) पर भी सात करोड़ के राजस्व की चोरी, विभाग के साथ धोखाधड़ी के लिए डेली के स्टॉक रजिस्टर में छेड़छाड़ का आरोप महाप्रबंधक ने लगाया था.

लेकिन उस वक्त की ब्यूरोक्रेसी में बड़े पद पर बैठे एक अफसर के फोन की घंटी पीपी के समर्थन में बजी और उत्पाद विभाग की पूरी टीम थाने से बैरंग लौट गयी. पीपी के चारों आदमी को भी छोड़ दिया गया. बाद में यह बात सामने आयी कि पीपी ने झारखंड बिवरेज कॉरपोरेशन को पैसा जमा कर दिया और फोन करनेवाले अफसर के हस्तक्षेप के कारण उत्पाद विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

Posted By: Sameer Oraon

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