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PLFI सुप्रीमो दिनेश गोप ने सरेंडर के नाम पर शेल कंपनी में ट्रांसफर कराये थे 27 लाख, अभी खुलेंगे और राज

Updated at : 09 Oct 2023 12:43 PM (IST)
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PLFI सुप्रीमो दिनेश गोप ने सरेंडर के नाम पर शेल कंपनी में ट्रांसफर कराये थे 27 लाख, अभी खुलेंगे और राज

गिरफ्तारी से पहले पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप ने सरेंडर के नाम पर शेल कंपनी भव्या इंजीकॉम में 27 लाख रुपये ट्रांसफर कराये थे. यह पैसे लेवी में वसूले गये थे. दिनेश गोप को सरेंडर कराने के नाम पर सुमंत कुमार ने अन्य लोगों के सहयोग से एक नेता के साथ बैठक भी की.

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Jharkhand News: एनआईए की जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तारी से पहले पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप ने सरेंडर के नाम पर शेल कंपनी भव्या इंजीकॉम में 27 लाख रुपये ट्रांसफर कराये थे. यह पैसे लेवी में वसूले गये थे. दिनेश गोप का सहयोगी सुमंत कुमार भव्या इंजीकॉम के अलावा दूसरी शेल कंपनी शिव आदि शक्ति मिनरल प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक के पद पर था. जबकि दिनेश गोप की दूसरी पत्नी शकुंतला इसमें पार्टनर थी. दिनेश गोप से लेवी का पैसा नकद लेकर सुमंत कुमार शेल कंपनी में जमा करता था. वहीं दूसरी ओर शेल कंपनी में पैसा जमा करने का काम दिनेश गोप का सहयोगी अरुण गोप और फूलेश्वर गोप भी करता था. इस काम में सुमंत का सहयोगी हटिया के सिंह मोड़ निवासी पेशे से इंजीनियर जितेंद्र कुमार भी था. जितेंद्र के खिलाफ भी एनआइए पूर्व में चार्जशीट कर चुकी है.

केस में चार्जशीटेड इंजीनियर जितेंद्र बना सरकारी गवाह, खोलेगा और राज

दिनेश गोप को सरेंडर कराने के नाम पर सुमंत कुमार ने अन्य लोगों के सहयोग से एक नेता के साथ बैठक भी की. जितेंद्र कुमार ने भी दिनेश गोप के लेवी में वसूले गये पैसे को एक नंबर करने के लिए रांची और पानीपत के हवाला कारोबारियों से मोबाइल फोन पर बातचीत की थी. सरेंडर के लिए पैसे का भुगतान दिल्ली में करना था. इस कारण जितेंद्र द्वारा एक कंपनी से भव्या इंजीकॉम में 27 लाख रुपये ट्रांसफर कराये गये थे, ताकि दिल्ली में पैसे का भुगतान हो सकें और दिनेश गोप को सरेंडर कराया जा सकें. अब इस मामले में जितेंद्र कुमार सरकारी गवाह बन गया है. अब वह दिनेश गोप द्वारा लेवी वसूली और इसे शेल कंपनी में निवेश का और राज खोलेगा.

उल्लेखनीय है कि यह केस नोट बंदी के दौरान वर्ष 2016 में बेड़ो में 25.38 लाख रुपये से जुड़ा है. जब दिनेश गोप द्वारा लेवी में वसूले गये पैसे को पेट्रोल पंप संचालक को बैंक में जमा कराने के लिए दिया गया था. इसी केस के अनुसंधान के दौरान एनआईए को इस बात की जानकारी मिली थी कि दिनेश गोप शेल कंपनी तैयार करवाकर उसमें भी लेवी के पैसे जमा कराता है.

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