आठ वर्ष बीते, झारखंड में सिर्फ 11 हजार वकीलों का ही सत्यापन

Updated at : 02 Apr 2024 12:30 AM (IST)
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झारखंड सहित पूरे भारत में बड़ी संख्या में अधिवक्ता अपनी लॉ डिग्री का सत्यापन कराये बिना वकालत के पेशे में हैं. वैसे अधिवक्ताओं ने सत्यापन के लिए अब तक आवेदन भी नहीं दिया है.

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राणा प्रताप, रांची :

झारखंड सहित पूरे भारत में बड़ी संख्या में अधिवक्ता अपनी लॉ डिग्री का सत्यापन कराये बिना वकालत के पेशे में हैं. वैसे अधिवक्ताओं ने सत्यापन के लिए अब तक आवेदन भी नहीं दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2015 से सत्यापन की कार्रवाई चल रही है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) रूल-2015 के अनुसार, झारखंड में वर्ष 2015 से अधिवक्ताओं के सत्यापन का काम चल रहा है. 29 फरवरी तक राज्य में कुल 34,967 अधिवक्ता थे. इसमें से 16,787 अधिवक्ताओं ने सत्यापन के लिए आवेदन दिया. 11,019 अधिवक्ताओं के शैक्षणिक प्रमाण पत्र विश्वविद्यालयों से सत्यापन होकर काउंसिल को प्राप्त हो गया है. आवेदन करनेवाले शेष अधिवक्ताओं का मामला देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में लंबित है. प्रमाण पत्र सत्यापित होकर नहीं पहुंचा है. वहीं, वर्ष 2010 या उसके बाद के अधिवक्ताओं को सत्यापन कराने की कोई जरूरत नहीं है. बार काउंसिल वेरिफिकेशन रूल-2015 के अनुसार वर्ष 2010 या उसके बाद वकालत का लाइसेंस लेनेवाले को सत्यापन नहीं कराना है. सत्यापन वैसे अधिवक्ताओं को कराना है, जिन्हें 1976 या उसके बाद लाइसेंस मिला हो. बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, लॉ की डिग्री जारी करनेवाले सभी विश्वविद्यालयों द्वारा अधिवक्ताओं के शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन शीघ्रतापूर्वक और बिना किसी शुल्क के किया जायेगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिसमें अदालत की अवमानना की कार्रवाई भी शामिल है. किसी भी प्रतिकूल परिणाम से बचने के लिए विश्वविद्यालयों को निर्देशों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है.

बीसीआइ ने विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र, कहा- शीघ्र करें सत्यापन :

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआइ) ने देश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति/रजिस्ट्रार को अधिवक्ताओं के लॉ डिग्री के शीघ्र सत्यापन करने को लेकर पत्र लिखा है. बीसीआइ ने कहा है कि देश में 20.57 लाख से अधिक अधिवक्ता हैं. इसमें जम्मू व कश्मीर की रिपोर्ट शामिल नहीं है. सत्यापन के लिए 9.22 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुआ है, जिसे संबंधित विश्वविद्यालयों को सत्यापन के लिए भेजा गया. 4.03 लाख से अधिक अधिवक्ताओं का सत्यापन होकर विश्वविद्यालयों से आ चुका है. 144 लॉ डिग्री को फर्जी पाया गया है. 1.99 लाख अधिवक्ताओं ने डिक्लरेशन दिया है.

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