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ओडिशा ट्रेन हादसे के बाद रेलवे सुरक्षा पर उठ रहे सवाल, पटरी बदलने पर खर्च नहीं हो रहे पैसे

Updated at : 05 Jun 2023 5:16 PM (IST)
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ओडिशा ट्रेन हादसे के बाद रेलवे सुरक्षा पर उठ रहे सवाल, पटरी बदलने पर खर्च नहीं हो रहे पैसे

सीएजी की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि भारतीय रेलवे को हर साल 4,500 किलोमीटर रेल पटरी बदलना है. लेकिन, वित्तीय बाधाओं के चलते पिछले 6 साल में रेल ट्रैक नहीं बदले गये. बता दें कि देश में करीब 1.15 लाख किलोमीटर लंबा रेल नेटवर्क है.

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ओडिशा के बालासोर या बालेश्वर में हुए ट्रेन हादसे में करीब पौने तीन सौ लोगों की मौत के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. विपक्षी दल यात्री और ट्रेन की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर है, तो सत्ताधारी दल की ओर से रेल हादसों का पुराना रिकॉर्ड दिखाया जा रहा है. इस बीच, कम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) की वर्ष 2022 की रिपोर्ट से पता चलता है कि रेल ट्रैक को बदलने के लिए जो फंड रेलवे को मिलता है, उसका उचित इस्तेमाल नहीं हो रहा है. यहां तक कि कई रेलवे डिवीजन पैसे सरेंडर कर देता है, रेल की पटरी नहीं बदलता.

हर साल 4500 किलोमीटर रेल लाइन भी नहीं बदली

सीएजी की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि भारतीय रेलवे को हर साल 4,500 किलोमीटर रेल लाइन बदलना है. लेकिन, वित्तीय बाधाओं के चलते पिछले 6 साल में रेल लाइन नहीं बदले गये. बता दें कि देश में करीब 1.15 लाख किलोमीटर का लंबा रेल नेटवर्क है. इनमें से हर साल 4,500 किमी ट्रैक को बदलना है. लेकिन, ऐसा हो नहीं रहा है. रिपोर्ट में एक व्हाइट पेपर का जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2016-17 में स्टैंडिंग कमेटी ने जो सिफारिशें कीं थीं, उस पर भी अमल नहीं हो रहा है.

सिर्फ पश्चिमी रेलवे ने खर्च किया 3.01 फीसदी पैसा

रिपोर्ट में कहा गया है वर्ष 2019-20 में देश के सबसे व्यस्त पश्चिमी रेलवे को रेल ट्रैक बदलने के लिए 689.90 करोड़ रुपये दिये गये थे. उसने इसमें से सिर्फ 3.01 फीसदी राशि यानी 20.74 करोड़ रुपये ही खर्च किये. वहीं, भारतीय रेलवे के अन्य जोन ने इस मद में मिले पैसे सरेंडर कर दिये. ऐसा कई सालों से हो रहा है. चूंकि रेलवे जोन इस मद के पैसे खर्च नहीं कर रहे, उनका आवंटन लगातार कम होता जा रहा है.

रेल ट्रैक बदलने के लिए आवंटन भी घटा

सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2018-19 में रेलवे ने रेल ट्रैक बदलने के लिए 9,607.65 करोड़ रुपये का आवंटन किया था, जो वर्ष 2019-20 में घटकर 7,417 करोड़ रुपये रह गया. इतना ही नहीं, यह भी कहा गया है कि वर्ष 2017-18 और वर्ष 2018-19 में सप्लाई की समस्या की वजह से कुछ रेलवे डिवीजनों में कम्प्लीट ट्रैक रिन्यूअल का भी काम पूरा नहीं हो पाया. रिपोर्ट के अंत में कहा गया है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्टैंडिंग कमेटी ने जो सिफारिशें कीं थीं, उसे रेलवे ने पूरा नहीं किया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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