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रिम्स के कोविड वार्ड में चल रही भाड़े की नर्सिंग, कोरोना का भय दिखा लोगों से ले रहे हैं हजारो रूपये

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
रिम्स चिकित्सा व्यवस्था में निजी एजेंसी का दखल रिम्स को पता ही नहीं
रिम्स चिकित्सा व्यवस्था में निजी एजेंसी का दखल रिम्स को पता ही नहीं
प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची : रिम्स की चिकित्सा व्यवस्था में निजी नर्सिंग सर्विसेज एजेंसी का दखल हो गया है. कोरोना का भय दिखा कर 'वैष्णवी हेल्थ होम केयर नर्सिंग सर्विसेज' नामक एजेंसी परिजनों को ठगने का काम कर रही है. भाड़ा पर नर्स व नकली परिजन उपलब्ध कराने के लिए यह एजेंसी असली परिजनों से 1,500 रुपये प्रतिदिन ले रही है. परिजनों से पांच दिन के लिए एडवांस के रूप में 5,000 रुपये लिये जाते हैं.

सेवा जारी रखने के लिए पांच दिन बाद दोबारा पैसा लिया जाता है. निजी नर्सिंग सर्विसेज काफी समय से यह सेवा धड़ल्ले से मुहैया करा रही है, लेकिन प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं है. सोमवार को यह मामला प्रकाश में तब आया, जब बोकारो की एक कोरोना संक्रमित महिला के परिजन से एजेंसी के कर्मचारी ने 1,500 रुपये की मांग की.

परिजन से पांच दिन पूरा होने पर सेवा जारी रखने के लिए सोमवार को एजेंसी ने पैसे की मांग की. परिजनों का कहना था कि पैसा खत्म हो गया है, पर कोरोना के भय से उक्त एजेंसी से यह सेवा ले रहे हैं. परिजनों ने कहा कि इस बारे में हम ज्यादा कुछ नहीं बता सकते हैं, क्योंकि बाद में हमें परेशानी हो सकती है.

इधर, सांसद प्रतिनिधि राजकिशोर ने कहा कि परिजन द्वारा फोन करने पर वह ट्रॉमा सेंटर गये थे. परिजनों ने उक्त एजेंसी के बारे में जानकारी दी है. एजेंसी का कर्मचारी पहले तैयार हुआ, बाद में किया इनकार : एजेंसी के कर्मचारी से मरीज का परिजन बनकर जब प्रभात खबर संवाददाता ने बात की, तो कर्मचारी नर्स व परिजन मुहैया कराने को तैयार हो गया.

प्रतिदिन 1,500 रुपये का खर्च बताया. एडवांस के रूप में 5,000 रुपये उपलब्ध कराने को कहा. ट्राॅमा सेंटर में सात से आठ बजे के बीच आने को कहा. बाद में कर्मचारी से जब दोबारा बात की गयी, तो उसने ऐसी सेवा से इनकार कर दिया.

रिम्स के साथ ऐसी किसी एजेंसी का कोई करार नहीं हुआ है. अगर किसी एजेंसी द्वारा कोविड मरीजों को भाड़ा पर परिजन व नर्स उपलब्ध कराये जा रहे हैं, तो यह गलत है. शिकायत मिलने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इस बारे में मंगलवार को ही कुछ कहा जा सकता है.

डॉ संजय कुमार, उपाधीक्षक, रिम्स

Posted By : sdameer Oraon

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