शहरी श्रमिक नहीं मांग रहे काम, तीन साल में एक लाख मजदूरों को भी नहीं मिला जॉब कार्ड

Updated at : 14 Jun 2024 8:24 PM (IST)
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शहरी श्रमिक नहीं मांग रहे काम, तीन साल में एक लाख मजदूरों को भी नहीं मिला जॉब कार्ड

राज्य के शहरों में मुख्यमंत्री श्रमिक योजना के प्रति श्रमिकों में जानकारी का अभाव है. योजना के तहत अपेक्षित संख्या में श्रमिक काम नहीं मांग रहे हैं.

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रांची. राज्य के शहरों में मुख्यमंत्री श्रमिक योजना के प्रति श्रमिकों में जानकारी का अभाव है. योजना के तहत अपेक्षित संख्या में श्रमिक काम नहीं मांग रहे हैं. योजना के तीन वर्ष बाद भी 99,982 मजदूरों को ही जॉब कार्ड निर्गत किया गया है. जॉब कार्ड लेने वाले श्रमिक भी कम संख्या में काम मांग रहे हैं. श्रमिकों ने 2020-21 से अब तक 26.78 लाख कार्य दिवस की मांग की है. जिसके विरुद्ध निकायों में 26.43 लाख मानव दिवस सृजित किया गया है. कोविड संक्रमण काल के बाद घर लौटे श्रमिकों के लिए शुरू की गयी इस योजना में काम मांगनेवालों को 2.22 करोड़़ रुपये का भुगतान किया गया है.

सभी 48 नगर निकायों में चल रही है योजना

राज्य के सभी 48 नगर निकायों में चल रही इस योजना के तहत राज्य के शहरी क्षेत्रों में काम मांगनेवाले श्रमिकों की संख्या काफी कम है. इस वजह से राज्य सरकार द्वारा शहरों के कुशल, अकुशल श्रमिकों को रोजगार देने के लिए चलायी जा रही मुख्यमंत्री श्रमिक योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है. योजना के तहत स्वीकृत और सक्रिय कार्य योजनाओं की संख्या भी काफी कम है. माना जा रहा है कि जागरूकता के अभाव में शहरी श्रमिक योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं.

100 दिन के रोजगार की है गारंटी

मुख्यमंत्री श्रमिक योजना के तहत शहरों में अकुशल श्रमिकों को हर वर्ष 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गयी है. काम मांगनेवालों को 15 दिनों में रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है. काम मांगनेवालों को कार्य आवंटित नहीं करने पर उनको बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान किया गया है. लंबे समय तक कार्य आवंटित नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता में हर महीने वृद्धि का भी नियम बनाया गया है. 15 दिनों में काम नहीं देने पर बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है.

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