झारखंड के नीरज मुर्मू को मिला प्रतिष्ठित डायना अवार्ड, दुनियाभर में इन खास बच्चों को ही मिलता है यह अवार्ड
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 03 Jul 2020 2:52 AM
गिरिडीह जिले के दुलियाकरम बाल मित्र ग्राम के पूर्व बाल मजदूर नीरज मुर्मू (21) को ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवार्ड से सम्मानित किया गया है.
रांची : गिरिडीह जिले के दुलियाकरम बाल मित्र ग्राम के पूर्व बाल मजदूर नीरज मुर्मू (21) को ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवार्ड से सम्मानित किया गया है. दुलियाकरम बाल मित्र ग्राम ‘कैलाश सत्यार्थी िचल्ड्रेंस फाउंडेशन’ द्वारा संचालित है. नीरज को यह अवार्ड गरीब व हाशिये के बच्चों को शिक्षित करने के लिए दिया गया है.
ब्रिटेन में वेल्स की राजकुमारी डायना की स्मृति में हर साल यह अवार्ड प्रदान किया जाता है. नौ से 25 साल तक के उन बच्चों और युवाओं को सम्मानित किया जाता है, िजन्होंने अपनी नेेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए सामाजिक बदलाव में असाधारण योगदान दिया हो.
नीरज दुनिया भर के उन 25 युवाओं में शामिल हैं, जिन्हें अवार्ड मिला है. नीरज के प्रमाणपत्र में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख है कि दुनिया बदलने की दिशा में उन्होंने नई पीढ़ी को प्रेरित और गोलबंद करने का महत्वपूर्ण काम किया है. कोरोना महामारी संकट की वजह से उन्हें यह अवार्ड डिजिटल माध्यम द्वारा आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया.
सीएम ने नीरज को दी बधाई : ब्रिटिश सरकार द्वारा डायना अवाॅर्ड से सम्मानित किये जाने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नीरज मुर्मू को शुभकामनाएं और बधाई दी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि नीरज की उपलब्धि पूरे झारखंड के लिए गौरव का क्षण है. बच्चों के साथ सामाजिक बदलाव लानेवाले इस शिक्षक की यात्रा प्रेरणादायक है. मुख्यमंत्री ने कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन के कैलाश सत्यार्थी को भी अपना मार्गदर्शन नीरज को देने के लिए धन्यवाद दिया है.
नीरज ने 20 बाल मजदूरों को अभ्रक खदानों से मुक्त कराया : गरीब आदिवासी परिवार में जन्मे नीरज 10 साल की उम्र में ही परिवार का पेट पालने के लिए अभ्रक खदानों में बाल मजदूरी करने लगे. बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने जब उसे बाल मजदूरी से मुक्त कराया, तब उनकी दुनिया ही बदल गयी. नीरज सत्यार्थी आंदोलन के साथ मिल कर बाल मजदूरी के खिलाफ अलख जगाने लगे.
ग्रेजुएशन की पढ़ाई जारी रखते हुए उसने गरीब बच्चों के लिए अपने गांव में स्कूल की स्थापना की है. इसके माध्यम से वह तकरीबन 200 बच्चों को समुदाय के साथ मिल कर शिक्षित करने में जुटे हैं. नीरज ने 20 बाल मजदूरों को भी अभ्रक खदानों से मुक्त कराया है.
मैं उन बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाने के काम में और तेजी लाऊंगा, जिनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गयी है. साथ ही अब मैं बाल मित्र ग्राम के बच्चों को भी शिक्षित करने पर अपना ध्यान केंद्रित करूंगा. इस अवार्ड ने मेरी िजम्मेदारी और बढ़ा दी है.
– नीरज मुर्मू
Posted by : Pritish Sahay
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