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1 लाख रुपये का इनामी उग्रवादी संतोष गंझू ने किया सरेंडर, ऐसे जुड़े थे टीएसपीसी संगठन से

नामी संतोष गंझू ने रांची पुलिस और सीआरपीएफ के सामने सरेंडर कर दिया है. पूछताछ में उसने बताया कि वह 2013 में टीएसपीसी के सब जोनल कमांडर सागर गंझू के संपर्क में आया.

रांची: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी के सदस्य और एक लाख के इनामी संतोष गंझू ने शुक्रवार को रांची पुलिस और सीआरपीएफ के समक्ष सरेंडर कर दिया. उसे सरेंडर की राशि का चेक भी प्रदान किया गया. आरोपी उग्रवादी बुढ़मू थाना क्षेत्र के सिरम का रहने वाला है. मौके पर रांची एसएसपी कार्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान एसएसपी ने बताया कि संतोष गंझू ने पूछताछ में जानकारी दी है कि उसके पिता के नाम पर गांव में तीन एकड़ जमीन थी. उस जमीन को उसके पिता ने बेच दिया था. इस कारण परिवार के सदस्यों के पास जीवन-यापन के लिए कुछ नहीं बचा था. आरोपी पहले घर में रहकर मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था. आरोपी की पहली पत्नी की मौत 2011 में हो गयी थी.

वर्ष 2013 में सब जोनल कमांडर सागर गंझू से मिला

पत्नी की मौत के बाद आरोपी 2013 में अपने बगल के गांव सलय टांड़ निवासी टीएसपीसी के सब जोनल कमांडर सागर गंझू से मिला. इस दौरान उग्रवादी गांव के युवकों पर संगठन से जुड़ने के लिए दबाव दे रहे थे. इसी दबाव में आकर वह सागर गंझू के दस्ते में शामिल हो गया. इस दौरान उसने संगठन विस्तार के लिए कई गांवों का भ्रमण किया. वर्ष 2015 मई माह में ओरमांझी थाना क्षेत्र के गंजा गांव में रेलवे लाइन निर्माण का कार्य किया जा रहा था, जहां उसने लेवी के लिए फायरिंग की घटना को अंजाम दिया था.

वहीं दूसरी ओर उसने 2015 में ही ओरमांझी थाना क्षेत्र के इचादाग स्थित क्रेशर में लेवी वसूलने के लिए वहां काम कर रहे मुंशी और मजदूरों के साथ मारपीट की थी. इन दोनों घटना में उसके साथ उग्रवादी सागर, मनीष महतो, गोपाल गंझू, तारालाल गोप, मनिलाल महतो, उमेश महतो, भोला महतो, किशन गंझू, मुकेश महतो और अमन साहू आदि शामिल थे.

तीन वर्ष संगठन में रहा, फिर पत्नी को लेकर चला गया था राजस्थान

संतोष गंझू ने बताया कि करीब तीन वर्ष संगठन में रहने के बाद वह मुरपिरी गांव निवासी सबीता कुमारी से शादी कर उसे साथ लेकर राजस्थान चला गया था. वहां वह झुंझनू नामक जगह में मुर्गा फॉर्म में मजदूरी करने लगा. कई बार उसके घर में पुलिस ने कुर्की जब्ती की कार्रवाई भी की. इस बात की जानकारी उसे गांव के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दी थी. तब उसने विचार किया कि उसे सरेंडर कर देना चाहिए. इसी बीच सीआरपीएफ और पुलिस अधिकारियों के संपर्क में आकर उसने सरेंडर कर दिया.

संतोष गंझू ने अपने साथी नक्सलियों से भी सरेंडर करने की अपील की है. वह सरेंडर करने के लिए अपनी पत्नी के साथ पहुंचा था. उसकी पत्नी ने कहा अब वह अपने पति के साथ चैन का जीवन जी सकती है. एसएसपी ने आगे बताया कि संतोष गंझू राजस्थान में रहने के बावजूद उग्रवादियों से संपर्क में रहकर उनके लिए थिंकटैक का काम करता था.

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