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मैनहर्ट घोटाला : रघुवर दास सहित अन्य पर एसीबी में मामला दर्ज, जांच शुरू

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में हुई अनियमितता और भ्रष्टाचार मामले में एसीबी ने मंत्री रघुवर दास सहित अन्य के खिलाफ किया मामला दर्ज
मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में हुई अनियमितता और भ्रष्टाचार मामले में एसीबी ने मंत्री रघुवर दास सहित अन्य के खिलाफ किया मामला दर्ज
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रांची : रांची शहर में सीवरेज-ड्रेनेज निर्माण का डीपीआर तैयार करने के लिए मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में हुई अनियमितता और भ्रष्टाचार मामले में एसीबी ने गुरुवार शाम तत्कालीन नगर विकास मंत्री रघुवर दास सहित अन्य के खिलाफ मामला (प्रिलिमनरी इंक्वायरी) दर्ज कर लिया है. साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है. मामले को लेकर 31 जुलाई को पूर्व मंत्री और विधायक सरयू राय ने एसीबी में लिखित शिकायत की थी.

उसके बाद एसीबी ने जांच की अनुमति के लिए यह मामला मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पास भेज दिया था. गौरतलब है कि हाल ही में सरकार ने इस मामले की जांच की अनुमति दी थी. आरंभिक जांच में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी से संबंधित तथ्य मिलने पर एसीबी प्राथमिकी दर्ज कर विधिपूर्वक कार्रवाई करेगी.

सरयू राय ने अपनी शिकायत में इसका उल्लेख किया था कि निविदा निष्पादन की प्रक्रिया में हर स्तर पर गड़बड़ी हुई है. इस कारण सरकारी राजस्व में करोड़ों का नुकसान हुआ. निविदा अनावश्यक रूप से विश्व बैंक की क्यूबीएस पर आमंत्रित की गयी थी. ऐसा एक षड्यंत्र के तहत हुआ था.

अयोग्य मैनहर्ट को योग्य बनाया

निविदा मूल्यांकन के दौरान भी यह पाया गया कि कोई पार्टी निविदा शर्त के अनुसार योग्य नहीं है. इसलिए निविदा को रद्द कर नयी निविदा के लिए नगर विकास विभाग के सचिव ने प्रस्ताव दिया. लेकिन, तत्कालीन मंत्री रघुवर दास ने इसे खारिज कर दिया. बाद में परिवर्तित शर्तों पर जब निविदा का मूल्यांकन हुआ, तब मैनहर्ट अयोग्य हो गया. लेकिन बाद में इस कंपनी को योग्य कर दिया गया. यह काम मंत्री के दबाव में किया गया, जिसके लिए मूल्यांकन समिति दोषी है.

निगरानी ने पांच बार मांगी थी अनुमति

मामले में निगरानी ब्यूरो की ओर से भी पांच बार पत्र लिखकर जांच करने की अनुमति निगरानी आयुक्त से मांगी गयी थी, लेकिन जांच की अनुमति नहीं मिली. मामले में निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण को जांच का आदेश दिया गया.

जांच में यह स्पष्ट हो गया गया कि मैनहर्ट अयोग्य था. इसके बाद भी मामले को दबाये रखा गया. इसी बीच मामला न्यायालय गया और न्यायालय ने भी याचिकाकर्ता को निगरानी के महानिदेशक के पास जाने को कहा. लेकिन निगरानी आयुक्त से अनुमति नहीं मिलने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई.

मैनहर्ट की नियुक्ति को अवैध पाया

सरयू राय की शिकायत के अनुसार, निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण कोषांग ने अपनी जांच में साबित कर दिया कि किस तरह मैनहर्ट का चयन अधिक दर पर अनुचित तरीके से किया गया. शिकायत में इसका भी उल्लेख था कि विधानसभा की कार्यान्वयन समिति ने मामले की गहन जांच में पाया कि मैनहर्ट की नियुक्ति अवैध है.

लेकिन रघुवर दास ने कार्यान्वयन समिति की जांच को प्रभावित और बाधित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा. पूर्व में भी इस मामले में निगरानी जांच के लिए वर्ष 2009 में राज्यपाल के तत्कालीन सलाहकार ने निगरानी आयुक्त को आदेश दिया था.

पिछले 11 साल से हो रही थी जांच की मांग

मैनहर्ट मामले की जांच की मांग पिछले 11 वर्षों से की जा रही थी. उस समय भाजपा के विधायक रहे सरयू राय ने अपनी ही पार्टी नेताओं के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया था. आरोप है कि निविदा मूल्यांकन में यह पाया गया कि कोई भी निविदा शर्त के अनुरूप नहीं थी. इसलिए, तत्कालीन नगर विकास सचिव ने इसे रद्द कर नयी निविदा का प्रस्ताव दिया. आरोप है कि तत्कालीन विभागीय मंत्री रघुवर दास के दबाव में आखिरकार इसी कंपनी को योग्य करार दिया गया.

निर्दलीय विधायक सरयू राय ने 31 जुलाई को मामले की लिखित शिकायत एसीबी से की थी. कहा था कि निविदा निष्पादन की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है. इससे करोड़ों के सरकारी राजस्व का नुकसान हुआ है. अनावश्यक रूप से संबंधित निविदा विश्व बैंक की क्यूबीएस पर आमंत्रित की गयी थी. ऐसा षड्यंत्र के तहत किया गया था.

शिकायत में उल्लेख था कि विधानसभा की कार्यान्वयन समिति ने मामले की जांच में पाया कि मैनहर्ट की नियुक्ति अवैध है. लेकिन, रघुवर दास ने कार्यांवयन समिति की जांच को प्रभावित और बाधित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था.

posted by : sameer oraon

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