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IN PICS: पिपरा में सुपुर्द-ए-खाक हुए झारखंड के मंत्री हाजी हुसैन अंसारी, श्रद्धांजलि देने पहुंचे CM हेमंत सोरेन

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
पिपरा गांव पहुंचकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किये झारखंड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के अंतिम दर्शन.
पिपरा गांव पहुंचकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किये झारखंड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के अंतिम दर्शन.
Balram

मधुपुर (बलराम) : झारखंड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी (74) को रविवार (4 अक्टूबर, 2020) को मधुपुर स्थित उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. पैतृक गांव पिपरा में दोपहर बाद जोहर की नमाज अता करने के बाद पिपरा कब्रिस्तान में उन्हें मिट्टी दी गयी. इससे पहले शनिवार की रात को उनके पार्थिव शरीर को राजधानी रांची से मधुपुर ले जाया गया.

रविवार सुबह पथलचपटी स्थित आवास में कुछ देर के लिए उनके शव को रखा गया. यहां लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किये. इसके उपरांत पैतृक गांव पिपरा ले जाया गया, जहां पिपरा कब्रिस्तान में उनका अंतिम संस्कार किया गया. मंत्री हाजी हुसैन अंसारी का शनिवार को रांची स्थित मेदांता अस्पताल में हो गया था. 23 सितंबर को सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें मेदांता में भर्ती कराया गया था.

इस दौरान जांच में उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आयी थी. शुक्रवार को दोबारा जांच में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आयी, लेकिन तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ. इसके एक दिन बाद शनिवार की शाम 3:50 बजे हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया. डॉक्टर के अनुसार उन्हें मधुमेह के अलावा किडनी की भी बीमारी थी. शनिवार देर शाम स्वर्गीय अंसारी के पार्थिव शरीर को इनके विधानसभा क्षेत्र मधुपुर ले जाया गया.

स्व अंसारी का जन्म 23 जुलाई, 1947 को मधुपुर के पिपरा गांव में हुआ था. उनके निधन पर राज्य सरकार ने रविवार व सोमवार को दो दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है. इसके चलते सोमवार को भी सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहेगा. हाजी हुसैन अंसारी मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार विधायक चुने गये थे. वह वर्ष 1995, 2000, 2010 और 2019 में झामुमो के टिकट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे.

हाजी हुसैन अंसारी के परिवार को सांत्वना देने पहुंचे कृषि मंत्री बादल पत्रलेख.
हाजी हुसैन अंसारी के परिवार को सांत्वना देने पहुंचे कृषि मंत्री बादल पत्रलेख.
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वर्ष 2004 में वह विपक्ष के नेता भी थे. अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वह चार बार मंत्री रहे. वर्ष 2009 में शिबू सोरेन के नेतृत्व में गठित सरकार में हाजी हुसैन अंसारी पहली बार मंत्री बने थे. इसके बाद वह झामुमो के समर्थन से बनी अर्जुन मुंडा की सरकार व हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली पिछली सरकार में भी मंत्री थे. वर्ष 2020 में महागठबंधन की सरकार बनने पर इन्हें अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बनाया गया था. वह हज कमेटी के चेयरमैन भी रह चुके थे.

हाजी हुसैन अंसारी को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. पिपरा गांव स्थित उनके मकान से जब दिवंगत मंत्री का जनाजा निकला, तो सड़क पर मानो लोगों का सैलाब आ गया. जो कब्रिस्तान तक जा सकते थे, वे जनाजे के साथ गये. जो नहीं जा सकते थे, अपने-अपने मकान की छतों से लोकप्रिय नेता की एक झलक पाने को बेताब दिख रहे थे. मंत्री का पार्थिव शरीर जब कब्रिस्तान पहुंचा, तो लोगों की आंखें नम थीं.

तिरंगा में लिपटे हाजी हुसैन अंसारी के पार्थिव देह पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पुष्पों की माला चढ़ायी.
तिरंगा में लिपटे हाजी हुसैन अंसारी के पार्थिव देह पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पुष्पों की माला चढ़ायी.
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हाजी हुसैन अंसारी की एक झलक पाने के लिए बेताब थे पिपरा गांव के लोग.
हाजी हुसैन अंसारी की एक झलक पाने के लिए बेताब थे पिपरा गांव के लोग.
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हाजी हुसैन अंसारी को आखिरी विदाई देने के लिए उमड़ा था ऐसा हुजूम.
हाजी हुसैन अंसारी को आखिरी विदाई देने के लिए उमड़ा था ऐसा हुजूम.
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Posted By : Mithilesh Jha

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