11 साल बाद भी नहीं बन सकी JUT की नियुक्ति नियमावली, कामकाज पर पड़ रहा है असर
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 02 Nov 2023 9:38 AM
‘विवि अधिनियम-2011’ के माध्यम से वर्ष 2015 में विवि की स्थापना हुई. 15 जून 2017 को प्रथम कुलपति के रूप में प्रो गोपाल पाठक को नियुक्त किया गया. इसके बाद विवि का काम-काज विधिवत रूप से शुरू किया गया
संजीव सिंह, रांची :
झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) की स्थापना के 11 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक न तो स्टैच्यूट (ए रूल ऑफ कंडक्ट) बना है और न ही नियुक्ति नियमावली बनी है. विवि में एडहॉक कमेटी, प्रतिनियुक्ति या फिर आउटसोर्स से काम चल रहा है. विवि द्वारा स्टैच्यूट व नियमावली का प्रारूप बनाकर उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग को कई बार भेजा गया, लेकिन अब तक यह अंतिम रूप नहीं ले सका है.
‘विवि अधिनियम-2011’ के माध्यम से वर्ष 2015 में विवि की स्थापना हुई. 15 जून 2017 को प्रथम कुलपति के रूप में प्रो गोपाल पाठक को नियुक्त किया गया. इसके बाद विवि का काम-काज विधिवत रूप से शुरू किया गया. इसके लगभग सात वर्षों के बाद भी अब तक विवि शासी निकाय का पूर्ण गठन नहीं हो सका है.
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विवि अधिनियम की धारा-16 में विहित प्रावधानों के अनुसार शासी निकाय का गठन होना जरूरी है. कुलाधिपति इसके अध्यक्ष और कुलपति सदस्य सचिव होते हैं. नियमानुसार विवि का बजट तक पास नहीं हो पाया है. विवि के विकास के लिए नीति निर्धारण और कार्ययोजना बनाने के लिए शासी निकाय महत्वपूर्ण है, लेकिन शासी निकाय के संचालन के लिए विभाग ने अबतक नियमावली ही उपलब्ध नहीं करायी है.
तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू (अब राष्ट्रपति) के कार्यकाल में अस्थायी रूप से एग्जीक्यूटिव काउंसिल और एकेडमिक काउंसिल का गठन किया गया, लेकिन स्टैच्यूट व नियमावली नहीं होने की वजह से इसका स्थायी गठन नहीं हो सका है. इतना ही नहीं, वर्तमान में वित्त संबंधित कार्यों के लिए वित्त समिति का भी पूर्णकालिक गठन नहीं हो सका है.
विवि में वित्त पदाधिकारी के पद भी रिक्त हैं. पिछले पांच वर्षों से बिना परिनियम के विवि परीक्षा का भी संचालन हो रहा है. परीक्षा की संचालन नियमावली भी राज्यपाल सचिवालय से अब तक अधिसूचित नहीं है. नियमावली नहीं रहने से कुलपति के पद को छोड़ कर शेष सभी 91 पदों पर सीधी और नियमित नियुक्ति नहीं हो पा रही है. 23 अक्तूबर 2019 को पुनः संशोधित अधिनियम प्रकाशित करते हुए यह व्यवस्था लागू की गयी कि सभी सृजित पदों पर सीधी नियुक्ति जेपीएससी व जेएसएससी द्वारा की जायेगी.
सभी सृजित पदों का रोस्टर भी बनना है, जो अब तक संभव नहीं हो पाया है. विवि में कुल पांच पीजी विभागों का संचालन होना है, लेकिन शैक्षणिक वर्ष 2020 से घंटी आधारित शिक्षकों के भरोसे तीन पीजी विभाग चल रहे हैं. शेष दो विभागों का संचालन विवि के गठन काल से ही बंद है.
विवि में 12 जुलाई 2018 को गजट प्रकाशित कर कुल 92 पद सृजित किये गये हैं. इनमें वीसी, पीएस टू वीसी, सेक्शन अफसर, रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार, पीए टू रजिस्ट्रार, सेक्शन अफसर, अपर डिविजन क्लर्क, फाइनांस अफसर, पीए टू फाइनांस अफसर, अपर डिविजन क्लर्क, परीक्षा नियंत्रक, सहायक परीक्षा नियंत्रक, पीए टू परीक्षा नियंत्रक, सेक्शन अफसर, निदेशक करिकुलम डेवलपमेंट, पीए टू निदेशक करिकुलम डेवलपमेंट,
लाइब्रेरियन, सहायक लाइब्रेरियन, एमआइएस अफसर, इस्टेट अफसर, सहायक निदेशक फिजिकल एडुकेशन, अपर डिविजन क्लर्क, लोअर डिविजन क्लर्क सहित पांच विभाग के लिए पांच प्रोफेसर, आठ एसोसिएट प्रोफेसर, 15 असिस्टेंट प्रोफेसर, 12 टेक्निकल अफसर, 12 लेबोरेटरी असिस्टेंट, पांच स्टोर कीपर तथा दो लोअर डिविजन क्लर्क शामिल हैं. इसके अलावा 12 विभागों में कुल 13 डाटा इंट्री ऑपरेटर के पद आउटसोर्स से रखा जाना है.
विवि के अधिकारियों के पद प्रतिनियुक्ति के भरोसे चल रहे हैं. राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से तैयार विवि के भवन के ज्यादातर भाग का उपयोग पिछले चार वर्षों से बिना किसी वित्तीय लेन-देन के ट्रिपल आइटी द्वारा किया जा रहा है. विवि के गठन काल से अब तक बिना नियमावली अधिसूचित किये हुए ही कॉलेजों को संबंद्धता प्रदान की जा रही है. इस विवि में निजी और सरकारी संस्थानों को मिला कर लगभग 17 इंजीनियरिंग कॉलेज, 42 पॉलीटेक्निक कॉलेज और दो फार्मेसी कॉलेज संचालित हो रहे हैं.
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