JSCA को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत, मजदूरों की मौत मामले में मुआवजे की जिम्मेदारी बदली

झारखंड हाईकोर्ट का फाइल फोटो.
Jharkhand HighCourt: झारखंड हाईकोर्ट ने जेएससीए को मजदूर मुआवजा मामले में राहत देते हुए कहा कि ठेका कंपनी और ठेकेदार भुगतान के लिए जिम्मेदार हैं. यदि जेएससीए ने मुआवजा दिया है तो वह संबंधित पक्षों से राशि की वसूली कर सकता है.
रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand HighCourt: झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) को निर्माण मजदूरों के मुआवजा मामले में महत्वपूर्ण राहत देते हुए एक अहम फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने स्पष्ट किया कि मजदूरों की मौत के मामले में मुआवजा देने की प्राथमिक जिम्मेदारी ठेका कंपनी एमएस वालमोंट स्ट्रक्चर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके ठेकेदार गुलाब खान की है. हालांकि, यदि जेएससीए ने पहले ही पीड़ित परिवारों को मुआवजा दे दिया है, तो वह यह राशि संबंधित कंपनी और ठेकेदार से वसूलने के लिए स्वतंत्र होगा.
क्या है पूरा मामला
मामला रांची स्थित जेएससीए स्टेडियम में निर्माण कार्य के दौरान हुई तीन मजदूरों की मौत से जुड़ा है. मृतकों के परिजनों ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत मुआवजे की मांग करते हुए श्रम न्यायालय में दावा दायर किया था. श्रम न्यायालय ने 2 मार्च 2023 को दिए अपने आदेश में जेएससीए को मुआवजा भुगतान के लिए जिम्मेदार माना था. इस आदेश को चुनौती देते हुए जेएससीए ने झारखंड हाईकोर्ट में अलग-अलग अपील दायर की थी. दूसरी ओर, मृतक मजदूरों के परिजनों ने भी मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर अपील दाखिल की थी.
हाईकोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान अदालत ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 की धारा 12 का विस्तार से परीक्षण किया. अदालत ने कहा कि निर्माण कार्य का वास्तविक निष्पादन ठेका कंपनी एम/एस वालमोंट स्ट्रक्चर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा था, जबकि गुलाब खान तत्काल नियोक्ता (इमीडिएट एम्प्लॉयर) की भूमिका में थे. अदालत ने माना कि कानून के अनुसार प्रधान नियोक्ता और तत्काल नियोक्ता के बीच जिम्मेदारियों का निर्धारण स्पष्ट है. ऐसे मामलों में यदि प्रधान नियोक्ता मुआवजा देता भी है तो उसे संबंधित ठेकेदार या एजेंसी से वह राशि वसूलने का अधिकार प्राप्त है.
श्रम न्यायालय के आदेश में संशोधन
हाईकोर्ट ने श्रम न्यायालय के आदेश को पूरी तरह निरस्त नहीं किया, बल्कि उसमें संशोधन किया. अदालत ने कहा कि एम/एस वालमोंट स्ट्रक्चर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को प्रधान नियोक्ता और गुलाब खान को तत्काल नियोक्ता माना जाएगा. साथ ही यह भी कहा गया कि यदि जेएससीए ने पहले ही मृतक मजदूरों के परिजनों को मुआवजा दे दिया है तो वह इस राशि की वसूली के लिए श्रम न्यायालय में लंबित रिकवरी कार्यवाही जारी रख सकता है.
रिकवरी प्रक्रिया जारी रखने की छूट
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जेएससीए द्वारा पहले से दायर रिकवरी संबंधी मामलों को आगे बढ़ाने में कोई कानूनी बाधा नहीं होगी. कर्मचारी मुआवजा अधिनियम की धारा 12 के तहत ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होती है कि वह प्रधान नियोक्ता को भुगतान की गई राशि की भरपाई करे. इसलिए जेएससीए को संबंधित कंपनी और ठेकेदार से मुआवजे की राशि वसूलने का पूरा अधिकार रहेगा.
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छह अपीलों पर एक साथ फैसला
हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़ी कुल छह अपीलों पर एक साथ फैसला सुनाया. इनमें एम.ए. संख्या 192, 193 और 194 वर्ष 2023 को आंशिक रूप से स्वीकार किया गया, जबकि एम.ए. संख्या 84, 85 और 86 वर्ष 2024 को खारिज कर दिया गया. इसके साथ ही अदालत ने लंबित सभी अंतरिम आवेदन (आईए) भी निष्पादित कर दिए.
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By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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