झारखंडी संस्कृति के रोम-रोम में बसा है गीत-संगीत : पिंकू लाल
Published by : CHANDRASHEKHAR UPADHEY Updated At : 18 Oct 2025 9:39 PM
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झारखंड की संस्कृति के रोम-रोम में गीत, संगीत और नृत्य बसा है.
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प्रतिनिधि, रातू.
झारखंड की संस्कृति के रोम-रोम में गीत, संगीत और नृत्य बसा है. झारखंड में जन्म उत्सव से लेकर जतरा, मेला और विभिन्न सामूहिक आयोजनों में गीत, संगीत और नृत्य का आयोजन किया जाता है. हमें विरासत से ही जीवन को एक उत्सव की तरह जीने की सीख मिली है. हम विभिन्न आयोजनों से उसका पालन करते आ रहे हैं. उक्त बातें छोटानागपुर युवा संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष सह समाजसेवी लाल धर्मराज नाथ शाहदेव (पिंकू लाल) ने शुक्रवार की रात शाहदेव राज परिवार लालगुटूवा द्वारा आयोजित नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम का उदघाटन करते हुए कही. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को एक सूत्र में बांधती है एवं लोगों को मिल जुलकर जीवन जीने की सीख देती है. विभिन्न कलाकारों ने अपने गीत, संगीत और नृत्य से रात भर लोगों का खूब मनोरंजन किया. संचालन में न्यू गीतांजलि क्लब लालगुटूवा सहयोगी था. मौके पर मुख्य संरक्षक लाल प्रेम प्रकाश नाथ शाहदेव, लाल किशोर नाथ शाहदेव, जय प्रकाश शाहदेव, मनोज शाहदेव, जयप्रकाश शाहदेव, बबलू तिर्की, शुका उरांव, विक्की सोनी, राजू टोप्पो समेत ग्रामीण शामिल हुए.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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