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Jharkhand Weather: झारखंड में 7 जुलाई तक बारिश के आसार, येलो अलर्ट जारी

Updated at : 01 Jul 2024 10:29 PM (IST)
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Weather: Rain in Birbhum

Birbhum: Commuters move through a waterlogged road during rainfall, in Birbhum district, Saturday, Sept. 30, 2023. (PTI Photo)(PTI09_30_2023_000366B)

मौसम विभाग ने 7 जुलाई तक राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में गरज के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी है. हालांकि मौसम में बदलाव की वजह से किसानों के चेहरे में खुशी आई है.

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Jharkhand Weather : झारखंड की राजधानी रांची सहित राज्य के अन्य जिलों में बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट देखी गई. मौसम विभाग ने 3 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में गरज से भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी की है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में झारखंड के अन्य जिलों में बारिश की संभावना जताई है. लेकिन बारिश किसानों के चेहरे में मुस्कुराहट ले आई है. दरअसल, पिछले कई दिनों से बारिश के नहीं होने से किसानों के चेहरे में मायूसी छाई हुई थी.

बारिश होने से खिले किसानों के चेहरे, गर्मी से मिली राहत

लोहरदगा में रविवार शाम तथा सोमवार सुबह से जारी बूंदाबांदी से जहां मौसम सुहावना हो गया है, तो दूसरी तरफ किसानों के चेहरे खिल उठे है. धान का बिचड़ा लगाने का काम कुछ स्थानों पर शुरू हो गया है साथ ही खेतों में लगी सब्जी फसल को काफी राहत मिली है. बताया जाता है कि रविवार शाम लगभग सात बजे बारिश हुई. इसके बाद सोमवार सुबह दस बजे से लगातार बुंदाबांदी हो रही है. बारिश होने के बाद तपती गर्मी से काफी राहत मिली है. किसान खेती-बाड़ी में जुट गए हैं.

पाकुड़ में दूसरे दिन भी हुई बारिश, किसानों के खिले चेहरे

पाकुड़ में दूसरे दिन भी बारिश होने से मौसम सुहाना बना रहा. सोमवार की सुबह से ही शहर में गरज के साथ बारिश हुई. बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गयी है. बारिश सुबह करीब आठ बजे शुरू हुई, जो रुक-रुक कर करीब दोपहर दो बजे तक हुई. बारिश होने के कारण अधिकतम तापमान व न्यूनतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गयी है. इस दौरान शहर का अधिकतम तापमान 30 डिग्री व न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार आने वाले सात दिनों तक जिले में गरज के साथ बारिश होने की संभावना जतायी गयी है. इधर बारिश होने से किसानों के चेहरे में खुशी देखी गयी. जिले के ज्यादातर किसान अबतक धान का बिचड़ा खेतों में नहीं डाल पाए हैं. बारिश नहीं होने के कारण जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है. लोगों को पानी के लिए भी परेशानी हो रही है. अगर मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक बारिश होती है तो किसान अच्छी तरह से खेती कर पायेंगे. वहीं भूजलस्तर भी बढ़ने की संभावना है, जिससे पानी के लिए हो रही परेशानी कुछ हद तक दूर हो जायेगी.

मानसून के दस्तक से किसानों में खुशी

साहिबगंज में मानसून के दस्तक देते ही किसानों के चेहरे खिल गये हैं, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार की रेल रात्रि से ही बारिश शुरू हुई है. शहर में सोमवार की दोपहर से बारिश का आगाज हुआ है. इधर, बारिश होने से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में किसने खेत मैं बीज बोने का काम शुरू कर दिया है. वहीं शहर में ऊमस भरी गर्मी से निजात मिलने लगी है. शहरी इलाके में हल्की बारिश से ही सड़के कीचड़ में होने लगी है. इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ वीरेंद्र कुमार मेहता ने बताया कि इस वर्ष अच्छी बारिश होने का अनुमान है. पहले चरण में 30 एमएम बारिश होने का अनुमान मौसम विभाग ने लगाया है. रविवार की देर शाम से ही बारिश शुरू हो गयी है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में शहर के तुलना में अधिक हुई है. उन्होंने बताया कि बोरियो, बरहेट क्षेत्र में लगभग 20 एमएम बारिश हुई है, जिससे किसानों के चेहरे में मुस्कुराहट लौटी है. किसानों ने खेत में बीज डालने का कार्य प्रारंभ कर दिया है.

बारिश के साथ ही तोरपा के किसान हल-बैल के साथ खेतों में उतरे

खूंटी के तोरपा में मॉनसून की बारिश शुरू होते ही किसान हल-बैल लेकर खेतों में उतर गये हैं. हालांकि मॉनसून देरी के कारण कई किसान बिचड़ा तैयार नहीं कर पाये हैं. कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ राजन चौधरी ने कहा कि धान की सीधी बुआई के लिए कम समय में तैयार होनेवाली किस्मों जैसे सहभागी, आईआर-64,डीआरटी-1, बिरसा विकास धान-110 या 111, वंदना, ललाट आदि में से किसी एक किस्म का चुनाव करें. फसल में खर-पतवार नियंत्रित रखने के लिए बोआई के दो-तीन दिनों बाद खर-पतवार नाशी दवा प्रेटीलाक्लोर-चार मिली लीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें.उन्होंने कहा कि जो किसान भाई अभी तक धान का बिचड़ा तैयार करने के लिए बीज नहीं डाल पायें हैं, जल्द से जल्द बीज स्थल में बीज डालें. बीज स्थल को जमीन की सतह से थोडा ऊपर बनायें. एक एकड़ में रोपा के लिए जमीन (बीजस्थली) में 15-18 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है. बीज स्थल पर 100 किलोग्राम कम्पोस्ट, ढाई किलोग्राम यूरिया, छह किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट तथा डेढ़ किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटास 100 वर्ग मीटर की दर से मिट्टी में अच्छी तरह से मिला दें.

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Kunal Kishore

लेखक के बारे में

By Kunal Kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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