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मजदूरों के सुरक्षित बाहर आने के बाद रांची के ओरमांझी में हो रही थी आतिशबाजी, चल रहा था झूमर का दौर

Updated at : 30 Nov 2023 9:12 AM (IST)
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मजदूरों के सुरक्षित बाहर आने के बाद रांची के ओरमांझी में हो रही थी आतिशबाजी, चल रहा था झूमर का दौर

इस दौरान सुबह से शाम तक रुक-रुक कर गांव में आतिशबाजी होती रही. परिवार के लोगों के अनुसार उन्होंने अपने बेटे से बात कर ली है. अस्पताल से छुट्टी मिलते ही तीनों गांव आयेंगे.

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रांची : ओरमांझी के खीराबेड़ा का माहौल बुधवार को बदला हुआ था. ग्रामीणों के चेहरे खिले हुए थे. सुबह से ही मिठाइयों के बंटने का दौर शुरू था. गांव के तीन बेटे को नयी जिंदगी मिली थी. उत्तराखंड के उत्तरकांशी के सुरंग से 17 दिन सुरक्षित निकलने के बाद राजेंद्र बेदिया, अनिल बेदिया और सुखराम बेदिया के परिवार के लोग खुशी से फूले नहीं समा रहे थे.

इस दौरान सुबह से शाम तक रुक-रुक कर गांव में आतिशबाजी होती रही. परिवार के लोगों के अनुसार उन्होंने अपने बेटे से बात कर ली है. अस्पताल से छुट्टी मिलते ही तीनों गांव आयेंगे. उस वक्त जमकर दीवाली मनायी जायेगी. अनिल बेदिया, सुखराम और राजेंद्र के घर पर देर शाम तक लोगों का आना जाना लगा रहा. वहीं परिवार के सदस्य दिन भर पूजा-अर्चना में भी लीन रहे.

घर आने पर बेटे को देहाती मुर्गा खिलाऊंगा : श्रवण

राजेंद्र बेदिया की मां फूलकुमारी ने बताया कि बेटे से बात हुई है. वह अस्पताल में है. मां ने कहा कि राजेंद्र से फोन पर बात करते ही उनकी आंखों में आंसू आ गये, लेकिन बेटे ने समझाया कि मैं जल्द आऊंगा..चिंता मत करो. राजेंद्र से पिता श्रवण बेदिया और बहन चांदनी ने भी बात की. पिता श्रवण ने कहा कि बेटे की आवाज सुन उनका दिल गदगद हो गया. बेटा घर आयेगा तो उसे देहाती मुर्गा बनाकर खिलायेंगे. उस दिन जश्न मनायेंगे.

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सुखराम के घर मना जश्न, भाभी थी झूमर में लीन

सुखराम बेदिया के घर पर सुबह से ही जश्न का माहौल था. मां पार्वती देवी, पिता बढ़न बेदिया और भाभी संगीता देवी मिठाई बांटते थक नहीं रहे थे. इनके घर के सामने सुबह से ही पटाखे फोड़े जा रहे थे. पार्वती देवी ने कहा कि बेटे का पुनर्जन्म हुआ है. आज दिल हल्का हुआ है. सुखराम की भाभी संगीता ग्रामीणों के साथ झूमर नृत्य में लीन थी. संगीता के अनुसार इतने दिनों के बाद घर के लोगों ने ठीक से खाना खाया है. आज उनके लिए खुशी का दिन है

अनिल के परिवार में था जश्न का माहौल :

अनिल बेदिया के घर की खुशियां देखते ही बन रही थी. घर पर रिश्तेदार मिठाइयां लेकर पहुंच चुके थे. अनिल के पिता चरकू बेदिया और मां संजू देवी के चेहरे चमक रहे थे. परिवार के सदस्य हर बार भगवान को शुक्रिया कर रहे थे. मां संजू ने बताया कि अनिल के घर लौटने के परिवार के लोग दीवाली मनायेंगे. पिता चरकू बेदिया ने कहा कि बहुत दिन के बाद आज बेचैनी खत्म हुई है. परिवार के सदस्योें की आंखों में बार-बार आंसू भी आ जा रहे थे.

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