Ranchi news : झारखंड में रेशम उत्पादन से 1.5 लाख किसानों को मिल रहा रोजगार

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अर्थव्यवस्था और ग्रामीण रोजगार का अहम आधार बनता जा रहा है रेशम उत्पादन. झारखंड में वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1356 मीट्रिक टन तसर रेशम का उत्पादन हुआ.
रांची.
झारखंड में रेशम उत्पादन राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण रोजगार का अहम आधार बनता जा रहा है. यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बना है, बल्कि राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी दिला रहा है. राज्य में लगभग 1.5 लाख रेशम किसान प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रेशम उत्पादन से जुड़े हुए हैं. प्रत्येक किसान परिवार को प्रति फसल औसतन 40-50 हजार रुपये की आय होती है. राज्य में वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1121.77 मीट्रिक टन तसर रेशम का उत्पादन हुआ था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1356 मीट्रिक टन तक पहुंच गया. रेशम मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं, जिसमें तसर रेशम, एरी सिल्क, मुलबरी रेशम और मुगा रेशम शामिल है. तसर रेशम का उत्पादन झारखंड में सबसे अधिक होता है. वर्तमान समय में झारखंड तसर रेशम उत्पादन में देशभर में पहला स्थान रखता है.रेशम निदेशालय में 40 से अधिक परियोजनाएं
हस्तशिल्प निदेशक आकांक्षा रंजन ने बताया कि राज्य सरकार रेशम पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है. उद्योग विभाग के तहत संचालित रेशम निदेशालय की देखरेख में 40 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं. इन योजनाओं के जरिये किसानों को रेशम नर्सरी, यूथ फार्मर रियरिंग, सिल्कवर्म रियरिंग और वाणिज्यिक उत्पादन में सहायता दी जा रही है.
समय-समय पर दिया जाता है प्रशिक्षण
सरकार किसानों को जरूरी उपकरण, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है. साथ ही समय-समय पर आधुनिक तकनीक से अवगत कराने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. राज्य सरकार रेशम का उत्पादन बढ़ाना चाहती है, इस दिशा में लगातार काम किये जा रहे हैं. बताया गया कि हर वर्ष लगभग 60 प्रशिक्षुओं को रेशम क्षेत्र में एक वर्षीय प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे आधुनिक तकनीक अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकें. वित्तीय वर्ष 2023-24 में सरकार ने 33 समूहों को बाजार से लिंकेज उपलब्ध कराया है, जबकि कई समूहों को लूम और सहायक साधन दिये गये हैं. इसके अलावा किसानों को कोकून चढ़ाई, रंगाई-निकासी और डिजाइन प्रशिक्षण भी दिया गया.50 हजार बुनकर परिवार जुड़े हैं
राज्य में करीब 50 हजार बुनकर परिवार रेशम आधारित वस्त्र निर्माण में लगे हैं. पहले अधिकांश कपड़े बाहर से आते थे, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही उत्पादन होने लगा है. इससे गांवों में स्थायी और सामूहिक रोजगार मिल रहा है.
बाजार तक पहुंचाता है झारक्राफ्ट
झारखंड सरकार की एजेंसी झारक्राफ्ट राज्य के रेशम और हस्तशिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही है. वर्तमान में देशभर में झारक्राफ्ट के 14 एंपोरियम संचालित हैं, जहां तसर रेशम और हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री होती है. इससे न केवल कारीगरों और किसानों को बाजार मिलता है, बल्कि उनकी आमदनी भी दोगुनी हो रही है.
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